कोटा के JK लोन अस्पताल में बच्चों की मौत के प्रकरण में 3 सदस्यीय महिला सांसदों के दल ने किया निरीक्षण

कोटा के JK लोन अस्पताल में बच्चों की मौत के प्रकरण में 3 सदस्यीय महिला सांसदों के दल ने किया निरीक्षण

कोटा के JK लोन अस्पताल में बच्चों की मौत के प्रकरण में 3 सदस्यीय महिला सांसदों के दल ने किया निरीक्षण

कोटा: जिले का जेकेलोन मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में बच्चों की मौत के बढ़ते आंकडों ने चिकित्सा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करने के साथ देश प्रदेश को चिंता में डाल दिया है. आज पूरे मामले की जांच करने के लिए भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा के निर्देश पर सांसद जसकौर मीणा के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय महिला सांसदों का दल कोटा पहुंचा तो वह भी पीड़ित परिवार से मिलकर और अस्पताल का निरीक्षण करके आश्चर्यचकित रह गया.  

पीड़ित परिवार ने सुनाई अपनी दर्दभरी दास्तां:
कोटा संभाग का जेके लॉन मातृ एवं शिशु चिकित्सालय इस दिनों प्रदेश में ही देश में बच्चों की लगातार हो रही मौतों के कारण सवालों के घेरे में आ गया है. नौ दिन से प्रशासनिक स्तर के साथ कई जांच दल अस्पताल का निरीक्षण करके व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दे गए लेकिन आज तक हालात जस के तस बने हुए है. बच्चे की मौत के बाद कितनी पीड़ा होती है इसका दर्द जानने के लिए भाजपा द्वारा गठित महिला सांसदों का तीन सदस्यीय दल आज कोटा पहुंचा और पीड़ित परिवारों को ढस बंधाने के बाद पूरे मामले के संबंध में जानकारी ली तो अस्पताल में किस तरह का व्यवहार मरीजों और तीमारदारों के साथ किया जाता है इसकी पोल खुल गई. बच्चे की मौत के बाद शोक में डूबी मां पदमा के अस्पताल में चिकित्सकों और स्टॉफ के लापरवाही रवैये की कहानी जब महिला सांसदों और जनप्रतिनिधियों ने सुनी तो वह आश्चर्यचकित रह गए. बच्चों की जान बचाने के लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा गुहार लगाने के वह पल सुनाते हुए पूरे परिवार की आंखों से आंसू निकल आए. जनप्रतिनिधियों ने इस मामले को लेकर विधानसभा में राज्य सरकार को घेरने की बात कहते हुए कहा कि इस पूरे मामले पर राजनीति होने की जगह यह मंथन होना चाहिए कि संयुक्त प्रयास करके देश भी भावी पीढ़ी तो किस तरह से बचाया जाए.  

अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भी कई सवाल खड़े किए:
सांसद जसकौर मीणा, कांता करदम और लॉकेट चटर्जी ने जब अस्पताल का निरीक्षण किया तो एक पलंग पर दो से तीन बच्चों को देखकर वह नाराज हुई. इसके साथ ही अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भी कई सवाल उन्होने खड़े किए. सफाई व्यवस्था के साथ बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए अस्पताल में कोई व्यवस्था उन्हे नजर नही आई जिसको देखते हुए उन्होने अस्पताल प्रबंधन के लापरवाह होने के आरोप जड़ा. दल का मानना था कि नौ दिन से इस मामले को लेकर हर व्यक्ति चितिंत है लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा कोई सुधार का काम नही किया गया. हर जगह गंदगी का आलम है और इस लापरवार रवैये को देखते हुए तो चिकित्सा मंत्री और मुख्यमंत्री को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल का निरीक्षण करना चाहिए. वही सासंद लॉकेट चटर्जी ने तो इस मामले पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कई आरोप जड़े.

सांसदों ने अस्पताल प्रबंधन को फेल करार दिया:
भाजपा विधायक संदीप शर्मा, चंद्रकांता मेघवाल, प्रदेश मंत्री छगन माहुर ने भी अस्पतालों की अव्यवस्थाओं के बारे में बताया. सांसदों ने विजिट करके व्यवस्थाओं के मामले में अस्पताल प्रबंधन को फेल करार दिया है. दिल्ली लौटकर यह दल यह रिपोर्ट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पेश करेंगा और उसके बाद अभी तक कागजों और आश्वासनों के बीच झूल रही लचर चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या प्रयास होते हैं यह देखने वाली बात होगी. 

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