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प्रदेश के किसानों के लिए अच्छी खबर, 3.50 लाख डिफॉल्टर किसानों को भी मिलेगा फसली ऋण

प्रदेश के किसानों के लिए अच्छी खबर, 3.50 लाख डिफॉल्टर किसानों को भी मिलेगा फसली ऋण

जयपुर: फसली ऋण से जुड़े करीब 3.50 लाख अवधिपार ऋणी किसानों को भी फसली ऋण प्रदान किया जाएगा. सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ऋण माफी के अपात्र इन किसानों को भी अब शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसली ऋण मिल सकेगा. आंजना ने बताया कि ऐसे सभी किसान जो ऋण माफी में अपात्र थे और उन्होंने समय पर अपना फसली ऋण चुका दिया था. उन्हें अब भी फसली ऋण दिया जा रहा है. लेकिन कई किसान ऐसे थे जो ऋण माफी में अपात्र थे तथा उन्होंने अपना फसली ऋण देरी से चुकाया था वे अवधिपार श्रेणी में आए थे. ऐसे किसानों को भी अब फसली ऋण मिल सकेगा.

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मूल राशि के बराबर पुनः फसली ऋण ले सकेंगे: 
सहकारिता मंत्री ने बताया कि जिन किसानों ने अभी तक अपना फसली ऋण नहीं चुकाया है तथा जो अवधिपार हो चुके है. ऐसे किसान अब अवधिपार मूल राशि एवं ब्याज चुकाकर पात्रता की स्थिति में मूल राशि के बराबर पुनः फसली ऋण ले सकेंगे. उन्होंने बताया कि ऐसे किसानों के हित में राज्य सरकार के शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसली ऋण का लाभ देने के उदेद्श्य से यह निर्णय लिया गया है.

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इस वर्ष लगभग 3 लाख नए किसानों को भी फसली ऋण दिया जा रहा:
आंजना ने बताया कि 16 अप्रेल से प्रारम्भ हुए खरीफ सीजन के फसली ऋण में अब तक 23 लाख 79 हजार किसानों को 7 हजार 321 करोड़ रूपये का फसली ऋण का वितरण किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि इस वर्ष लगभग 3 लाख नए किसानों को भी फसली ऋण दिया जा रहा है. खरीफ सीजन में फसली ऋण 31 अगस्त तक वितरित होगा. 


 

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पुलिस स्मृति दिवस के मौक पर PM मोदी ने किया पुलिस बल का आभार व्यक्त

पुलिस स्मृति दिवस के मौक पर PM मोदी ने किया पुलिस बल का आभार व्यक्त

नई दिल्ली: पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक भावुक भाषण देकर पुलिस के जवानों की हौसला आफजाई की. पीएन नरेन्द्र मोदी ने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए शहीद हुए पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि पुलिसकर्मी हमेशा बिना किसी हिचक के अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं.

मोदी ने कहा कि भयावह अपराधों को सुलझाने से लेकर कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा आपदा प्रबंधन में मदद करने से लेकर कोविड-19 से निपटने तक, पुलिसकर्मियों ने बिना किसी हिचक के अपना सर्वश्रेष्ठ दिया है. जिसके लिए सारा देश नतमस्तक  है. 

भाषण में उन्होंने कहा कि हमें नागरिकों की सहायता के लिए उनके परिश्रम और उनकी तत्परता पर गर्व है. प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि पुलिस स्मृति दिवस’ भारत में हमारे पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों को आभार व्यक्त करने का दिन है. कर्तव्यपालन के दौरान शहीद हुए सभी पुलिस कर्मियों को हम श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. उनके बलिदान और सेवाओं को हमेशा याद किया जाएगा.  (सोर्स-भाषा)

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सिरोही: परिवहन विभाग में ACB की बड़ी कार्रवाई, मंडार चेकपोस्ट पर छापेमारी में मिले 1 लाख 85 हजार नकद

सिरोही: जिले के मंडार चेकपोस्ट पर ACB की बड़ी कार्रवाई हुई है. ACB ने चेकपोस्ट पर अलसुबह सर्च अभियान चलाकर औचक निरीक्षण किया. इस दौरान चैकपोस्ट पर कार्यरत अधिकारियों से ACB की टीम को 1 लाख 85 हजार नकद रुपए मिले हैं. अब इस राशि का चालान बुक से मिलान किया जा रहा है. ACB को अंदेशा है कि ट्रक चालकों से चेकपोस्ट पर अवैध वसूली हो रही थी. 

परिवहन विभाग में ACB की कार्रवाई से हड़कंप: 
दिवाली से पहले परिवहन विभाग में ACB की कार्रवाई से हड़कंप मच गया है. जल्द ही कुछ और बॉर्डर चेकपोस्ट पर ACB की रेड हो सकती है. बता दें कि DIG विष्णुकांत के निर्देश पर इस कार्रवाई को ACB ASP नारायण सिंह राजपुरोहित ने अंजाम दिया है. 

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मंगलवार को भी हुई थी एसीबी की बड़ी कार्रवाई: 
इससे पहले मंगलवार को भी कोटा एसीबी की टीम ने कार्रवाई करते हुए भारत सरकार के यूआईडीएआई (UIDAI) भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के नई दिल्ली स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में कार्यरत सहायक महानिदेशक पंकज गोयल को 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय से रंगे हाथों गिरफ्तार किया. बताया जा रहा है राजस्थान के एसीबी के इतिहास की ये पहली बड़ी कार्रवाई है, जिसमे एसीबी ने दिल्ली जाकर किसी बड़े अफसर को रंगे हाथो ट्रेप किया है. ये कार्रवाई एसीबी के डीजी बीएल सोनी और एडीजी दिनेश एम् एन के निर्देश पर कोटा एसीबी के एडिशनल एसपी ठाकुर चंद्रशील कुमार ने दिल्ली जाकर इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया है. 

इस शताब्दी अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण भागीदार होगा भारत: रक्षा मंत्री मार्क एस्पर

 इस शताब्दी अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण भागीदार होगा भारत: रक्षा मंत्री मार्क एस्पर

एरी, पेन्सिलवेनिया: भारत और अमेरिका के बीच अगले महीने 2+2 मंत्री स्तरीय होने वाली बातचीत से पहले अमेरिका के रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने मंगलवार को कहा कि भारत इस शताब्दी में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण भागीदार होगा. एस्पर ने वाशिंगटन में कहा कि वह और विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ अगले हफ्ते अपने भारतीय समकक्षों क्रमश: राजनाथ सिंह तथा एस. जयशंकर के साथ 2+2 बैठक के लिये नई दिल्ली जायेंगे.

गौरतलब है कि इस 2+2 बैठक की तारीखों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. अटलांटिक काउंसिल थिंक टैंक की ओर से आयोजित एक वेबीनार में पूछे गये सवाल के जवाब में एस्पर ने कहा कि विदेश मंत्री पोम्पिओ और मैं वहां अगले हफ्ते जायेंगे. यह भारत के साथ हमारी दूसरी जबकि दोनों देशों के बीच तीसरी 2+2 बैठक होगी. यह बेहद महत्वपूर्ण है और मेरा मानना है कि भारत निश्चित रूप से इस शताब्दी में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हमारे लिये एक बेहद महत्वपूर्ण सहयोगी साबित होगा. वे देश की राजनीतिक नीतियों की तारीफ करते भी नजर आए. 

अन्य एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, बहुत सक्षम देश है, जहां के लोग बेहद प्रतिभावान हैं. हिमालय में वे रोज चीन की आक्रामकता का सामना कर रहे हैं, खास तौर से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर. आगे एस्पर ने कहा कि इसलिये उस क्षेत्र के कई अन्य देशों की तरह मैंने भी उनसे  बात की है. मैंने मंगोलिया, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, थाईलैंड और पलाउ तक की यात्रा की है. वे भी चीन जो कर रहा है उसको पहचान जाएंगे. (सोर्स-भाषा)

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ट्रेन और हवाई सफर के किराए में कम होता जा रहा अंतर, रेलवे जयपुर-पुणे का 4240 रुपए ले रहा तो हवाई यात्रा का भाड़ा 3800 रुपए

ट्रेन और हवाई सफर के किराए में कम होता जा रहा अंतर, रेलवे जयपुर-पुणे का 4240 रुपए ले रहा तो हवाई यात्रा का भाड़ा 3800 रुपए

जयपुर: कोरोना से जंग लड़ने के साथ-साथ अब धीरे-धीरे जन जीवन पटरी पर लौटने लगा है. लंबे समय से कम यात्रीभार से जूझ रहे परिवहन के साधनों यानी हवाई जहाज और ट्रेनों में अब भीड़ देखने को मिल रही है. लेकिन दोनों साधनों में अंतर यह है कि अब रेल यात्रा अधिक समय लेने वाली होते हुए मंहगी भी साबित हो रही है. 

रेलवे यातायात अब पटरी पर लौट रहा है, लेकिन इस बार यात्रियों के फायदे की बजाय खुद के फायदे के साथ. ऐसा इसलिए क्योंकि इस समय हवाई और रेल सफर के किराए के बीच का अंतर अब काफी कम हो गया है. तो वहीं खुद रेलवे एक ही रूट पर संचालित हो रही दो ट्रेनों में अलग-अलग किराया वसूल रहा है. जो इस बात को सत्यापित करता है. जयपुर से कई शहरों के लिए ट्रेन और हवाई मार्ग में लगने वाले किराए में तो ज्यादा अंतर नहीं है. लेकिन इस दूरी को तय करने वाले समय में जमीन-आसमान का अंतर है. जयपुर से पुणे के बीच ट्रेन से 23 घंटे लग रहे हैं. इस दूरी के लिए रेलवे फर्स्ट एसी में 4240 रुपए, सैकंड एसी में 2675, थर्ड एसी में 1945 और स्लीपर में 765 रुपए किराया वसूल रहा है. तो वहीं हवाई मार्ग से इस दूरी को तय करने में महज 1.30 घंटे का समय लग रहा है. जिसके लिए यात्रियों से 3800 से 4000 रुपए किराया लिया जा रहा है.

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जयपुर से ट्रेन का किराया और लगने वाला समय -
कहां से कहां/ किराया (रुपए में)/ यात्रा समय
- जयपुर-मुंबई सेंट्रल/ 2415/ 20 घंटे
- जयपुर-बांद्रा टर्मिनस/ 2100/ 17 घंटे
- जयपुर-कोलकाता (सियालदाह)/ 2885/ 25 घंटे
- जयपुर-कोलकाता/ 2465/ 27 घंटे
- जयपुर-पुणे/ 4240-2675/ 23 घंटे
- जयपुर-चंडीगढ़/ 2550-1645/ 11 घंटे
- जयपुर-हैदराबाद/ 3225/ 33 घंटे
- जयपुर-हैदराबाद (काचीगुड़ा)/ 2885/ 25 घंटे
- जयपुर-बैंगलुरू/ 5460-3200/ 41 घंटे
- जयपुर- अहमदाबाद/ 2420-1715/ 12 घंटे
- जयपुर- अहमदाबाद/ 1415/ 12 घंटे
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24 अक्टूबर को हवाई किराया और लगने वाला समय- 
कहां से कहां/ किराया(रुपए में)/ यात्रा समय
- मुंबई-जयपुर/ 3481/ 1.25 घंटे
- बेंगलुरु-जयपुर/ 5100/ 2.10 घंटे
- कोलकाता-जयपुर/ 4551/ 1.50 घंटे
- हैदराबाद-जयपुर/ 4197/ 1.45 घंटे
- पुणे-जयपुर/ 3811/ 1.35 घंटे
- अहमदाबाद-जयपुर/ 3755/ 50 मिनट
- चेन्नई-जयपुर/ 7096/ 2.10 घंटे

एयरलाइंस कंपनियों में आपस में किराए को लेकर जबरदस्त प्रतिद्वंदिता होती है. लेकिन अब यह सिर्फ एयरलाइंस के बीच की लड़ाई तक सीमित नहीं है. बल्कि अब एयरलाइंस रेलवे को अपना बड़ा प्रतिद्वंदी मान रहीं हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि जिन शहरों के लिए जयपुर से ट्रेन संचालित हो रहीं हैं, वहां का हवाई किराया ज्यादा नहीं है. जैसे फिलहाल जयपुर से चेन्नई के लिए कोई ट्रेन कनेक्टविटी नहीं है. इसलिए एयरलाइंस ने भी इस दूरी का किराया 7 से 8 हजार के बीच किया हुआ है. जबकि जिन रूटों पर ट्रेन उपलब्ध हैं, उन रूट्स का हवाई किराया ट्रेन के किराए से महज 15-30 फीसदी ही अधिक है.

- काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

फर्जी मुठभेड़ के मामला: CRPF सहायक कमांडेंट के खिलाफ उत्पीड़क कार्रवाई पर रोक

फर्जी मुठभेड़ के मामला: CRPF सहायक कमांडेंट के खिलाफ उत्पीड़क कार्रवाई पर रोक

रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को वर्ष 2011 में हुई कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में आरोपी सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट के खिलाफ फिलहाल किसी भी उत्पीड़क कार्रवाई पर रोक लगा दी है. ऐसा उनके बेदाग करियर और प्रधानमंत्री की सेवा में जीवन के 10 साल देने के कारण बताया जा रहा है. मगर इसकी कोई पुष्टि नहीं की गई है. 

न्यायमूर्ति आनंद सेन की पीठ ने वर्ष 2011 के पश्चिमी सिंहभूम जिले के छोटा नगरा थाना क्षेत्र में कथित तौर पर नक्सलियों के साथ हुई एक मुठभेड़ की घटना से जुड़े इस मामले में सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट शंभू कुमार विश्वास के खिलाफ किसी भी उत्पीड़क कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. 

अदालत में इस कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में आरोपी बनाये गये सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट की याचिका पर सुनवाई हुई. शंभू कुमार विश्वास की ओर से पेश हुए अधिवक्ता बिनोद कुमार सिंह अदालत से कहा कि सहायक कमांडेंट शंभू का पूरा करियर बेदाग रहा है और उन्होंने प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात एसपीजी में भी दस वर्ष की सेवा दी है. फिलहाल मामला कहां जाकर क्या रुख लेगा इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता है. (सोर्स-भाषा)

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VIDEO: मौजूदा लैंड यूज चेंज रूल्स में होंगे अब व्यापक बदलाव, नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने दी हरी झंडी

जयपुर: बड़ी जद्दोजहद के बाद तैयार किए गए शहरों के मास्टरप्लान में दर्शाए लैंड यूज में बेतरतीब व बेवजह बदलाव नहीं हो और शहरवासियों की जरूरत के मुताबिक विभिन्न गतिविधियां की अनुमति दी जा सके,इन्हें ध्यान रखते हुए लैंड यूज चेंज रूल्स में व्यापक पैमाने पर बदलाव किए जाएंगे. क्या होंगे ये बदलाव और इनका क्या होगा असर जानने के लिए देखें फर्स्ट इंडिया न्यूज की ये खास रिपोर्ट-

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अक्सर कहते रहे हैं कि बड़ी मेहनत से शहरों के मास्टरप्लान तैयार किए जाते हैं. लेकिन बार-बार लैंड यूज चेंज करके इन्हें बिगाड़ा जाता है. अशोक गहलोत सरकार के पिछले कार्यकाल में मुख्यमंत्री की इसी मंशा के अनुरूप टाउन एंड कंट्री प्लानिंग बिल लाने की कवायद भी शुरू की गई थी. लेकिन यह कवायद तब पूरी नहीं हो पाई. इसके बाद 12 जनवरी 2017 को गुलाब कोठारी प्रकरण में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण दिए कि बहुत आवश्यक होने पर ही केवल जनहित में ही मास्टरप्लान में दर्शाए लैंड यूज में बदलाव किया जाए. ऐसे में लैंड यूज प्रक्रिया को सख्त बनाने और साथ के साथ आम शहरवासी की रोजमर्रा की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मौजूदा लैंड यूज रूल्स में बदलाव प्रस्तावित किए हैं. इन बदलावों पर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल अपनी हरी झंडी दे चुके हैं. आपको सबसे पहले बताते हैं कि लैंड यूज रूल्स में प्रस्तावित नए बदलावों में किस प्रकार लैंड यूज चेंज की प्रक्रिया को पहले से सख्त किया गया है.

लैंड यूज चेंज की सख्त प्रक्रिया:

- लैंड यूज चेंज के लिए अब प्रशासनिक शुल्क देना होगा जो 10 रुपए प्रति वर्गमीटर के अनुसार न्यूनतम 5 हजार रुपए और अधिकतम 5 लाख रुपए होगा.

- लैंड यूज चेंज के लिए निर्धारित राशि का दस प्रतिशत और देना होगा.

- निकाय में पदस्थापित वरिष्ठतम नगर नियोजक संबंधित स्थानीय समिति का सदस्य सचिव होगा.

- वर्तमान में नगरपालिकाओं,न्यास और प्राधिकण स्तर की स्थानीय समिति को 3 हजार वर्गमीटर से 6 हजार वर्गमीटर तक आकार की भूमि के लैंड यूज के अधिकार हैं.

- प्रस्तावित बदलाव के अनुसार जिन शहरों में मास्टरप्लान लागू नहीं हैं वहां निकाय की योजना व अनुमोदित अन्य योजना में स्थानीय समितियां 500 से लेकर 4000 वर्गमीटर तक की भूमि का ही लैंड यूज चेंज कर सकेंगी.

- जिन शहरों में मास्टरप्लान लागू हैं वहां कृषि भूमि से मास्टरप्लान के अनुसार लैंड यूज चेंज के आवेदन पर राज्य स्तरीय समिति ही विचार करेगी.

- कृषि भूमि से अकृषि उपयोग के प्रकरणों में कंट्रोल गाइडलाइन्स के अनुसार लैड यूज या एक्टिविटी चाहने पर स्थानीय समितियां 500 से लेकर 4000 वर्गमीटर तक की भूमि का ही लैंड यूज चेंज कर सकेंगी. 

- कृषि भूमि से अकृषि उपयोग के प्रकरणों में मास्टरप्लान या जोनल प्लान या लैंड यूज कंट्रोल गाइडलाइन्स से भिन्न लैंड यूज या एक्टिविटी चाहने पर केवल राज्य स्तरीय समिति की फैसला कर सकेगी.

- पट्टे शुदा भूखण्ड का मास्टरप्लान के अनुसार लैंड यूज चाहे जाने पर स्थानीय समितियां 500 से लेकर 4000 वर्गमीटर तक की भूमि का ही लैंड यूज चेंज कर सकेंगी.  

- पट्टेशुदा  भूखण्ड का मास्टरप्लान या लैंड यूज कंट्रोल गाइडलाइन्स से भिन्न लैंड यूज या एक्टिविटी के आवदेन पर केवल राज्य स्तरीय लैंड यूज चेंज कमेटी ही विचार कर सकेगी. 

- पूर्व मास्टरप्लान में कोई भूमि पेरिफेरल कंट्रोल बेल्ट में थी और उसके अनुसार तब पर्मिसिबल एक्टिविटी के अनुसार पट्टा जारी किया गया है. 

- अब ऐसे प्रकरण में मौजूदा मास्टरप्लान से भिन्न लैंड यूज चाहा गया है तो ऐसे प्रकरणों में केवल राज्य स्तरीय समिति ही विचार कर सकेगी. 

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वर्तमान में लागू लैंड यूज चेंज रूल्स वर्ष 2010 में जारी किए गए थे. इन रूल्स में बदलाव कर पहली बार कैटिगिरी वाइज प्रकरणों के अनुसार स्थानीय समितियों को लैंड यूज चेंज के अधिकार दिया जाना प्रस्तावित है. संवेदनशील व महत्वपूर्ण मामलों में लैंड यूज चेंज पर केवल राज्य स्तरीय समिति ही विचार करेगी. इन रूल्स में लैंड यूज कंट्रोल गाइडलाइन्स भी जोड़े जाना प्रस्तावित है. ताकि स्थानीय निवासियों की जरूरत के अनुसार क्षेत्र में आवश्यक एक्टिविटीज की अनुमति दी जा सके और बार-बार मास्टरप्लान में लैंड यूज चेंज करना नहीं पड़े. आपको बताते हैं किस लैंड यूज में कौन-कौनसी एक्टिविटीज की अनुमति दी जा सकेगी.

लैंड यूज कंट्रोल गाइडलान्स में पर्मिसिबल एक्टविटीज: 

- आवासीय लैंड यूज में डे केयर सेंटर,नर्सरी,स्कूल,डिस्पेंसरी,ओल्ड एज होम,धर्मशाला,हॉस्टल,कन्वेनियंट या इनफॉर्मल शॉप्स, रेस्तरां,लेबोरेट्री,लाईब्रेरी,क्लब, हाउसहोल्ड या सर्विस इंडस्ट्री व एमएसएमई इंडस्ट्रीज व पेट्रोल पम्प संचालित हो सकेंगे. 

- व्यावसायिक लैंड यूज में होटल,मैरिज गार्डन,बैंक,वर्कशॉप,गैस बुकिंग एंड ड्रिस्ट्रीब्यूशन सेंटर,सिनेमाघर,मल्टीप्लैक्स,हॉस्पिटल,ट्रक व बस टर्मिनल आदि संचालित किए जा सकेंगे.

- संस्थानिक लैंड यूज में उद्योग, एग्रोबेस इडस्ट्रीज, गैस गोदाम सहित सभी आवश्यक गतिविधियों के संचालन की अनुमति मिल सकेगी. 

लैंड यूज कंट्रोल गाइडलाइन्स में पर्मिसिबल एक्टिविटी में कुछ एक्टिविटीज की अनुमति देने पर स्थानीय समितियां तो कुछ के लिए राज्य स्तरीय समिति अधिकृत होगी. इन एक्टिविटीज के संचालन के लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई और अन्य तकनीकी मापदंड भी लैंड यूज कंट्राेल गाइडलाइन्स में शामिल किए हैं. लैंड यूज चेंज रूल्स में प्रस्तावित इन बदलावों का खाका मंजूरी के लिए नगरीय विकास विभाग ने विधि विभाग को भेज दिया है. विधि विभाग की मंजूरी के बाद नगरीय विकास विभाग की ओर से इस बारे में जल्द अधिसूचना जारी की जाएगी.

दो पक्षों के खूनी संघर्ष मामले में 23 साल बाद न्याय, 6 को ताउम्र कैद, अन्य 6 को सात साल की सजा

दो पक्षों के खूनी संघर्ष मामले में 23 साल बाद न्याय, 6 को ताउम्र कैद, अन्य 6 को सात साल की सजा

मथुरा: उत्तर प्रदेश में 23 साल पुराने खूनी संघर्ष मामले में अदालत ने अपना निर्णय सुना दिया है. अदालत ने जिले के गोहरी गांव में दो पक्षों में हुए संघर्ष के दौरान तीन लोगों की हत्या के जुर्म में छह अभियुक्तों को उम्र कैद की सजा सुनाई है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजय कुमार यादव ने दूसरे पक्ष के भी छह लोगों को हत्या की कोशिश के जुर्म में सात-सात साल के कठोर कारावास का दंड दिया है.

सहायक सरकारी अधिवक्ता मदन मोहन पांडे ने बताया कि छाता थाना क्षेत्र के गोहरी गांव में दो पक्षों में हुए संघर्ष में एक पक्ष के तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी जबकि दोनों पक्षों के कई लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे.उन्होंने बताया कि अदालत ने सभी दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है और जुर्मना अदा नहीं करने पर उनकी सजा की अवधि बढ़ जाएगी.

अभियोजन के वकील ने बताया कि मामले में किशोर आरोपी को एक अन्य अदालत ने बरी कर दिया था. उन्होंने बताया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान तीन अन्य आरोपियों की मौत हो गई. देर से ही सही मगर पीड़ित परिवार को न्याय जरुर मिला. (सोर्स-भाषा)

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केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए पंजाब की तर्ज पर ही राजस्थान सरकार भी लाएगी तीन नए बिल

जयपुर: केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए पंजाब की तर्ज पर ही राजस्थान सरकार भी तीन नए बिल विधानसभा में पारित कराएगी. राज्य सरकार इसके लिए नवंबर के पहले सत्र में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएंगे. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता मे मंगलवार रात को मुख्यमंत्री आवास पर हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया.

सीएम ने पंजाब की तर्ज पर ही राजस्थान में फैसला लेने की बात कही: 
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व राहुल गांधी ने कांग्रेस शासित राज्य सरकारों को निर्देश दिए थे कि वे अपने राज्य में केंद्र के कानूनों को बायपास करने के लिए विधानसभा को सत्र बुलाकर प्रस्ताव पास करे. राजस्थान सरकार इस मामले में पंजाब सरकार के कदम का इंतजार कर रही थी. 12 अक्टूबर को भी इस मामले में गहलोत मंत्री परिषद की बैठक हुई थी, लेकिन तब कोई फैसला नहीं हो सका. मंगलवार को पंजाब सरकार ने विधानसभा के विशेष सत्र में केंद्र के कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास कर दिया. साथ ही तीन नए बिल विधानसभा से पारित करा दिए. इसकी सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तुरंत मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई और पंजाब की तर्ज पर ही राजस्थान में फैसला लेने की बात कही. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया था, जिसके तहत सरकार ने तीन नए कानून पास किए हैं जिसमें केंद्र से अलग बातें शामिल की गई हैं.

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किसान को MSP से नीचे फसल देने पर मजबूर किया जाता: 
प्रस्ताव में इस बात को शामिल किया गया है कि अगर किसान को MSP से नीचे फसल देने पर मजबूर किया जाता है, तो ऐसा करने वाले को तीन साल तक की जेल हो सकती है. साथ ही अगर किसी कंपनी या व्यक्ति द्वारा किसानों पर जमीन, फसल को लेकर दबाव बनाया जाता है तो भी जुर्माना और जेल का प्रस्ताव लाया गया है. केंद्रीय कानून में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट में किसानों और कंपनियों के बीच विवाद होने पर केवल एसडीएम तक ही केस लड़े जाने का प्रावधान किया हुआ है, जबकि इसके प्रभाव को कम करने के लिए पंजाब सरकार ने अपने एक्ट में प्रावधान किया है कि सिविल कोर्ट में किसान जा सकेंगे. केंद्रीय कानून में कहा गया है कि खरीदी जाने वाली फसल के बारे में कोई भी लिमिट नहीं होगी और न ही यह कहां भंडारण की गई है इसके बारे में बताने की जरूरत है. इस प्रभाव को कम करने के लिए पंजाब सरकार ने अपने बिल में कहा है कि खरीदी जाने वाली फसल की सीमा राज्य सरकार द्वारा तय की जाएगी और इसे कहां स्टोर किया गया है यह भी बताना होगा. अब इसी तरह के संशोधन राजस्थान में किए जाएंगे.

अन्नदाता किसानों के पक्ष में मजबूती से खड़ी:
सीएम गहलोत ने कहा है कि सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी के नेतृत्व में हमारे अन्नदाता किसानों के पक्ष में मजबूती से खड़ी है और हमारी पार्टी किसान विरोधी कानून जो एनडीए सरकार ने बनाए हैं, का विरोध करती रहेगी. पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इन कानूनों के विरुद्ध बिल पारित किये हैं. राजस्थान भी शीघ्र ही ऐसा ही करेगा. इससे पहले मुख्यमंत्री गहलोत ने पंजाब के मंत्री मनप्रीत सिंह बादल से फोन पर बात करके पंजाब के नए कानून की कॉपी मांगी. मंत्रिपरिषद की बैठक में मुहर लग गई है कि राज्य के कानून में बदलाव किए जाए. अब पंजाब की तर्ज पर ही राजस्थान में कृषि विभाग के अधिकारी व विधि विभाग अगले दो तीन दिन में ड्राफ्ट तैयार करेगा.