VIDEO: 3500 करोड़ की योजना, 17 साल... फिर भी पानी का हाहाकार

Madan Kalal Published Date 2019/06/14 06:21

जयपुर: 3500 करोड़ की योजना, 17 साल... फिर भी पानी का हाहाकार. यह पीड़ा भुगत रहे हैं गर्मी से दहक रहे चूरू के हजारों परिवार। जर्मनी के सहयोग से तैयार हुई सबसे बड़ी पेयजल परियोजना अफसरों की लापरवाही से दम तोड़ रही है. आपणी योजना का बेड़ा गर्क तब होना शुरू हो गया, जब इस बड़ी योजना का संचालन निजी कंपनियों को दिया गया. फर्स्ट इंडिया ने ग्राउंड जीरो पर जाकर जाने यहां के हालात...

भीषण पेयजल संकट:
चूरू इन दिनों भीषण पेयजल संकट से जूझ रहा है. आपणी योजना परियोजना को जिस मंसूबे के साथ शुरू किया गया था, वह उसमें सफल नहीं हो पा रही. योजना के दो चरणों मे लागू होने के बाद भी पीने के पानी के लिए जिले में हाहाकार मचा हुआ है। सादुलपुर, तारानगर, चूरू और सरदारशहर में पानी के लिए प्रदर्शन आम हो रहे हैं. 2002 में शुरू हुई योजना को 17 साल का समय हो गया. उस समय जो व्यवस्थाएं थी, उसे अब दुगुना करने की जरूरी है, लेकिन हालात बदतर होते चले गए.

फर्स्ट इंडिया टीम ने साडासर गांव में बने पम्प हाउस का निरीक्षण किया तो खामियों की पोल खुलती ही चली गई. पंप हाउस की जर्मनी से आयातित बड़ी-बड़ी मशीनें आज खराब पड़ी है. 41 लाख लीटर पानी स्टॉक के टाइम का पानी नापने की मशीन खराब है. मशीनों के बेहतर रखरखाव के लिए लगाए गए एयरकंडीशनर सभी खराब है. यहां बना निजी बिजली घर भी जुगाड़ से चल रहा है. बिजली केन्ट्रोलर खराब है. विशालकाय ट्रांसफार्मर मामूली ऑयल से चल रहे है. पानी को कीटाणुमुक्त करने के लिए ब्लीचिंग मिलाए हुए 10 वर्ष से ज्यादा का समय हो गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे में इस पानी को स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर नहीं माना जा सकता. ब्लीचिंग मिलाने की मशीनें 10 साल से पहले जवाब दे चुकी है, इलेक्ट्रॉनिक पानी वॉल खराब हो चुके है,  जो अब खुले ही रहते हैं.

पंप हाउस में खामियों का अंबार:
पानी सप्लाई की मोटर अब अमानक है, जो पहले थी खराब हो गई है. कम हॉर्स पावर को मोटरों से पानी सप्लाई का दिखावा हो रहा है. 6 बड़े पम्प लगे थे, अब 3 पूरे खराब है. बच्चे तीन पंप जैसे आखिरी दम तोड़ रहे हैं. करोड़ों रुपये की लागत से बने भवन के शौचालय कबाड़ रखने के काम आ रहे हैं. सरदारशहर खण्ड के अधिशाषी अभियंता गोविंद जांगिड़ बताते हैं कि पीने के पानी की वैकलपिक व्यवस्था टैंकरों द्वारा पानी पहुंचाकर की जा रही है. अवैध कनेक्शन हटाने का काम भी किया जा रहा है.

योजना का दूसरा चरण भी राम भरोसे:
सरकार ने योजना के द्वितीय चरण के तहत रतनगढ़-सुजानगढ़ वृहद पेयजल परियोजना 2013 में स्वीकृत कर कार्य शुरू किया था. 2016 में कार्य पूरा कर लोगों को मीठा पानी उपलब्ध कराना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. वर्तमान में योजना की हालत ये है कि रतनगढ-सुजानगढ़ के कुछ क्षेत्रों में योजना का कार्य अभी भी बाकी पड़ा है. कहीं टंकियों से पाइप लाइनों को नहीं जोड़ा गया, कहीं बिजली से कनेक्शन नहीं हो पाए हैं. 

... संवाददाता मदन कलाल की रिपोर्ट

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