रामदेवरा में 40वें भांग सम्मेलन का हुआ आयोजन, बीकानेर के भगवानदास कल्ला ने गटकी 5 लीटर भांग

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/09/09 03:08

रामदेवरा(जैसलमेर): हरि में हरि बसे, भूरि में भगवान...जिस घर विजया ना घुटे वह घर भूत समान.... रंग रहे, रूप रहे, काया रहे सचेत, पीने वाला चिरंजीव रहे, मूंजी मरे अचेत. कुछ ऐसी ही पंक्तियों हर...हर... हर... महादेव के जयघोष के साथ घड़ी में जैसे ही 12 बजकर 56 मिनट हुए भांग प्रेमियों ने सवा क्विंटल भांग (विजया) पलक झपकते ही हलक के नीचे उतार दी. जी हां..... हम बात कर रहे है 40वें अखिल भारतीय भांग स्नेह मिलन समारोह की जो रामदेवरा धर्मशाला में आयोजित किया गया.  यहां देश भर से आए तीन सौ से अधिक भांग प्रेमियों ने भाग लिया तथा भांग घोटकर प्रसादी ग्रहण की. 

भोले शंकर के जयघोष के साथ भांग प्रेमियों ने भांग ग्रहण की: 
सुबह 10 बजते ही देशभर से आए भांग प्रेमी यहां एकत्र होने लगे. भांग स्नेह मिलन समारोह में राजस्थान के सहित, मुम्बई, दिल्ली, चैन्नई, बंगलुरू, कोलकाता आदि से बड़ी संख्या में आए भांग प्रेमियों ने भाग लिया. सबसे पहले भगवान शंकर को भांग का प्रसाद चढ़ाया. उसके बाद हर-हर महादेव व जय भोले शंकर के जयघोष के साथ भांग प्रेमियों ने भांग ग्रहण की. बीकानेर के भगवानदास कल्ला ने सर्वाधिक पांच लीटर भांग गटकी. आपसी प्रेम व सौहार्द को बढ़ाने के लिए भांग स्नेह मिलन का आयोजन किया जाता है, पूर्व के वर्षों में यहां भांग पीने की प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती थी.  

21 विशेषज्ञ ने तैयारी की दूध, बादाम, पिस्ता केशर में घुटी भांग:
21 किलो भांग, 101 किलो दूध, 11 किलो बादाम, 15 किलो मिश्री, 11 किलो पिस्ता, सहित अन्य सामग्री का मिश्रण कर इसे उबाला जाता है तथा पांच से सात घंटे की मशक्कत कर उसका घोल तैयार किया जाता है. इस दौरान पूरी भांग 130 लीटर बनी लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में तैयार हुई शिवबूटी को हलक के नीचे उतारने में मात्र 15 मिनट ही लगे. 

भगवानदास कल्ला ने पी 5 लीटर भांग: 
करीब 5 लीटर विजया पीने के बाद भगवानदास कल्ला ने बताया कि यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है. अभी उनकी उम्र 66 साल है और करीब 54 साल से वे जत्थे के साथ रामदेवरा आ रहे हैं. यहां 1980 से पूर्व तक भांग प्रतियोगिता आयोजित होती थी, लेकिन यह परंपरा बाद सम्मेलन में तब्दील हो गई. अधिकांश बार प्रतियोगिता में बीकानेर ही अव्वल रहता था. विजया प्रेमी कल्ला भी कई साल तक प्रतियोगिता के सिरमौर रहे. 

क्या है 12:56 का मतलब: 
शिवभक्तों का मानना है कि संमुद्र मंथन के बाद भगवान शिव ने जब जहर का प्याला पीया तो उस वक्त 12:56 का वक्त था. शिवजी ने जहर पीया, मगर अमृत का काम किया. बस शिव भक्त भी इसी समय विजया यानि भांग पीने का कार्यक्रम आयोजित करते रहे है. इनका मानना है कि इस वक्त शिव बूटी अमृत का काम करती है. 

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