शारदे छात्रावास में 42 छात्राओं के पास नहीं बिस्तर, 102 बालिकाएं और सिर्फ 60 बिस्तर

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/02/10 01:38

जैसलमेर। जिलास्तरीय अधिकारियों द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व सरकारी छात्रावासों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के बड़े बड़े दावे खोखले साबित हो रहे हैं। अधिकारियों की लापरवाही का आलम है कि नाचना कस्बे में स्थित शारदे छात्रावास में पिछले साल की तुलना में इस साल नामांकन तो बढ़ा दिया गया, लेकिन बढ़ी बालिकाओं के लिए संसाधनों की व्यवस्था नहीं की गई है। 

गौरतलब है कि पिछले साल शारदे छात्रावास में 60 बालिकाओं तक सुविधाएं उपलब्ध थीं। इस साल नामांकन बढ़ाने के लिए सरकार से 100 बालिकाओं के लिए स्वीकृति भी मिल गई। इसके बाद आधा शैक्षणिक सत्र व पूरी सर्दी निकलने के बाद भी बालिकाओं के लिए बिस्तर की व्यवस्था नहीं की गई है। जिससे इस भीषण सर्दी के मौसम में बालिकाओं को ठंड में ठिठुरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि शारदे छात्रावास में बजट होने के चलते छात्रावास प्रबंधन अपने स्तर से ही बिस्तरों की व्यवस्था कर सकता है, लेकिन उच्चाधिकारियों द्वारा जिला स्तर के बजट का उपयोग करने के चक्कर में शारदे छात्रावास को बिस्तरों की खरीद पर रोक लगाते हुए छात्रावास में आवश्यकता की वस्तुओं की मांग करने के निर्देश दिए। इसके बाद शारदे छात्रावास से जिला स्तरीय अधिकारियों को मांग पत्र भी भेजा गया। लेकिन अधिकारियों द्वारा पूरी सर्दी का मौसम निकल जाने के बाद भी टेंडर प्रक्रिया नहीं की गई है। बच्चियां सर्दी के मौसम में बिना बिस्तरों के ही छात्रावास में रहने को मजबूर है। 

समग्र शिक्षा अभियान में भ्रष्टाचार का खुलासा 
शारदे छात्रावास की एसएमसी से बिस्तर व अन्य विभिन्न सुविधाओं की खरीद नहीं करवाकर सीधे जिला स्तर से खरीद की जा रही है। प्रक्रिया से हटकर हो रही खरीद से समग्र शिक्षा अभियान में चल रहे भ्रष्टाचार का खेल भी उजागर हो गया है, लेकिन उसके बावजूद अधिकारियों द्वारा सर्दी के मौसम में ठिठुर रही बालिकाओं की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 

सच यह है कि धरातल पर अव्यवस्था हावी 
सरकारी छात्रावासों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व बेहतर व्यवस्थाओं के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर छात्रावास की सुविधाओं के लिए अधिकारी बिलकुल भी गंभीर नहीं है। शारदे छात्रावास में आधे शैक्षणिक सत्र बीतने के बावजूद छात्राओं को बिस्तर न मिलाना अव्यवस्थाओं की पराकाष्ठा है। 

सर्दी के मौसम निकलने के बाद ही मिलेंगे बिस्तर 
समग्र शिक्षा अभियान के तहत संचालित शारदे बालिका छात्रावासों में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं छात्रावास द्वारा अपने स्तर पर ही की जाती है। लेकिन स्थानीय स्टाफ द्वारा व्यवस्थाएं अधिकारियों पर छोड़ दी गई है। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा अब तक टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है। अब बच्चियों को बिस्तर कब तक उपलब्ध होंगे यह कहना मुश्किल है। अधिकारियों के अनुसार अब टेंडर प्रक्रिया शुरु कर सैंपल मंगवाएं गए है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में इतना समय लग जाएगा तब तक सर्दी का मौसम निकल जाएगा और उसके बाद ही बालिकाओं को बिस्तर मिल पाएंगे। लेकिन तब इस भीषण सर्दी के मौसम में बालिकाओं को सर्दी से बिना बिस्तर ही रहना पड़ेगा। 

नाचना कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय नाचना में रसोई गैस सिलेंडर खत्म होने तथा शारदे बालिका छात्रावास में अधिकारियों की लापरवाही के चलते बिस्तरों की व्यवस्था नहीं होने से बालिकाओं को हो रही परेशानी को फर्स्ट इंडिया ने प्रमुखता से उठाया था। इन दोनों खबरों के प्रकाशन के बाद प्रशासन हरकत में आया। वहीं शिक्षा विभाग के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी रामकृष्ण मीना ने केजीबीवी का दौरा किया। उन्होंने केजीबीवी की शिक्षिकाओं व पीईईओ को निर्देश दिए लेकिन उनका निरीक्षण भी मात्र खानापूर्ति ही रहा। 

नाचना के फर्स्ट इंडिया के संवाददाता ने छात्राओं से काम कराने के बारे में पूछा तो मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा बालिकाएं है, काम तो करना पड़ेगा। अगर वे आज घर पर होती तो काम नहीं करती क्या..। सरहदी जिले के शिक्षा विभाग के सबसे बड़े पद पर अासीन अधिकारी जब छात्रावास में रहकर पढ़ाई करने वाली बालिकाओं के बारे में यह सोचते है, तो शिक्षा विभाग की सभी योजनाओं की क्रियान्विति कितनी होगी। यह कहना मुश्किल है। जबकि सरकार व प्रशासन बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे को लेकर भरसक प्रयास कर रहे है। 

निरीक्षण में भी घपला 
शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा स्कूलों का निरीक्षण करने के नाम पर भी जबरदस्त घपला किया जा रहा है। एक तरफ अधिकारी हर महीने स्कूल निरीक्षण की रिपोर्ट तैयार करते है। वहीं दूसरी तरफ स्कूलों में व्याप्त अव्यवस्थाओं का कहीं भी जिक्र नहीं होता है। गौरतलब है कि गत 5 फरवरी को मुख्य ब्लाॅक शिक्षा अधिकारी जैसलमेर ने भी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का निरीक्षण किया। तब उन्होंने केजीबीवी में गैस सिलेंडर होने की जानकारी दी। जबकि केजीबीवी में 31 जनवरी को ही गैस सिलेंडर खत्म हो गया। यह रिपोर्ट नाचना पीईईओ जेठमल सिंह ने अपनी जांच रिपोर्ट में दी है। 

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