VIDEO: राजस्थान में लगातार लापता हो रहे बाघ, जिम्मेदार नींद में!

VIDEO: राजस्थान में लगातार लापता हो रहे बाघ, जिम्मेदार नींद में!

जयपुरः बाघों को लेकर जंगलत महकमा कितना गैर जिम्मेदार है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में गायब बाघों की संख्या का आंकड़ा करीब 4 दर्जन के नजदीक पहुंच गया है. रणथंभौर से लगातार बाग गायब हो रहे हैं और वन विभाग हाथ पर हाथ रख कर बैठा है. बाघों के गायब होने के परत दर परत दास्तां आज आपको फर्स्ट इंडिया न्यूज़ दिखाने जा रहा है.

10 सालों में 30 और महज़ 3-4 सालों में 16 टाइगर लापता हो गए. ताज़ा मामला टी 72 सुल्तान का है जो मण्डरायल रेंज से लापता है इससे पहले वो करौली कैलादेवी के घंटेश्वर से धौलपुर के सरमथुरा तक आता जाता रहता था. टी-72 सुलतान टी-24 उस्ताद का बेटा है, यह रणथंभौर के कुछ मशहूर टाइगर्स में से एक है. सुल्तान फ़रवरी 2021 को ट्रेस हुआ था और फ़िलहाल डेढ़ दो महीने से लापता है वहीं इसकी साथी टी-92 सुंदरी भी 1 से डेढ़ साल से लापता है. इधर 8 माह से मुकुन्दरा का एमटी-1 लापता है. टाइगर्स के लापता होने की फेहरिस्त लंबी होती जा रही आंकड़ा अब 50 छूने को है लेकिन लगता है वन विभाग इन बात को गंभीरता पुर्वक नहीं ले रहा है. मोनिटरिंग पूरी तरह से फेल हो चुकी है, एन्टी पोचिंग एन्ड सर्वेलांस सिस्टम में गड़बडियां पाई गईं हैं. एन्टी पोचिंग एंड सर्वेलांस घोटाले के बाद अब ड्रोन घोटाला सामने आया है. वन विभाग में कुछ भी सही नहीं चल रहा है अब यह कहना अतिश्योक्ति नहीं लगभग सच्चाई है. 

पहले 50 करोड़ का एंटी पोचिंग एन्ड सर्वेलांस सिस्टम नाकारा सिद्ध हुआ कई कैमरे और टॉवर बंद और खराब पाए गए तो अब 1 करोड़ से ऊपर के 5 ड्रोन नाकारा हो गए. जी हां 1 करोड़ से ज्यादा के केवल पांच ड्रोन दिल्ली की एक कम्पनी से मंगवाए गए जिसमें थर्मल कमरों से लैस इन ड्रोन की कीमत करोड़ों रुपए पार कर गई, वहीं DGCA के नियम के अनुसार रात को ड्रोन नहीं उड़ाये जा सकते तो थर्मल कैमरे वाले ड्रोन मंगवाए क्यों?  ये ड्रोन रणथंभौर, सरिस्का, झालाना, मुकुन्दरा और जवाई के लिए मंगवाए गए थे. जवाई में फिलहाल एक भी ड्रोन नहीं है, जवाई का ड्रोन झालाना मंगवा लिया गया है, एक टेक्निकल एक्सपर्ट नें नाम न बताने की शर्त पर बताया कि ड्रोन उड़ने लायक भी नहीं है. रणथंभौर और मुकुन्दरा का ड्रोन ख़राब है एक का तो विंग ही टूटा हुआ है. गौरतलब है बाबू लाल जाजू नें एन्टी पोचिंग एन्ड सर्वेलांस सिस्टम के फेल होने एवं इसमें हुए भ्रष्टाचार को लेकर ए.सी.बी. में शिकायत दर्ज करवाई है. यह ड्रोन अपने टास्क में भी फेल हो चुके हैं जिसमें एक बार इन्हें उदयपुर में पैंथर ढूंढने के काम में लिया गया तो एक बार नसीराबाद शोंकलिया में लेसर फ्लोरिकन को ढूंढने के काम में लिया गया दोनों ही मामलों में ड्रोन सही रिजल्ट नहीं दे पाए.

एक अधिकारी नें दबी ज़बान में बताया कि ये बहुत बड़ा मामला है जिसमें भ्रष्टाचार की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. लगातार वन्यजीव मर रहे हैं शिकार हो रहा है और पैंथर और टाइगर जैसे वन्यजीवों की स्तिथि दयनीय है लेकिन विभाग में भ्रष्ट तंत्र का ये हाल है कि वन्यजीव मरे तो मरे हमें तो अपनी जेबें भरने से मतलब है, फ़िलहाल एक मामले में एक डीएफओ स्तर का अधिकारी एसीबी के हत्ते चढ़ गया था. राजस्थान में मानद वन्यजीव प्रतिपालकों की नियुक्तियां नहीं हो रही हैं. सरिस्का को छोड़कर किसी भी टाइगर रिज़र्व की स्तिथि अच्छी नहीं है. नए टाइगर रिज़र्व की प्लानिंग ठंडे बस्ते में है रामगढ़ और कुंभलगढ़ को टाइगर रिज़र्व बनाया जाना प्रस्तावित है लेकिन फाइलें अटकी पड़ी है. दोनों को फिलहाल नेशनल पार्क का स्टेटस भी नहीं है. कुंभलगढ़ की नेशनल पार्क की फाइल भी अटकी पड़ी है. एनटीसीए के अधिकारियों को बुला कर नए प्रस्तावित टाइगर रिज़र्वस की विज़िट भी पेंडिंग है. चिंकारा की शामत आई पड़ी है तो स्मार्ट सिटी की लेबर मोरों को मार कर खा जाती है. नतीजा ढाक के तीन पात एक भी मामले में लिप्त आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है बस बाड़मेर में चिंकारा को गोली मारने के मामले में कुछ लोगों को पकड़ा जाता है, लेकिन राष्ट्रीय पक्षी मोर को मार कर उसका मांस खाने के मामले में कोई भी ठोस कार्यवाई करने के बजाय उलटा सूचना देने वाले को धमकाया जाता है, जीव रक्षा संस्था को बोला जाता है आप बीच में मत बोलो, इसपर जीव रक्षा संस्था का जवाब आता है कि राजस्थान में किसी भी जिले में यदि वन्यजीवों की हत्या होगी तो उनकी संस्था आवाज़ उठाएगी. वन्यजीव प्रेमियों के बीच फूट डालने के प्रयास किये जा रहे हैं, मामलों को दबाया जा रहा है. लेकिन मीडिया के माध्यम से रोज़ नए नए कारनामे उजागर हो रहे हैं. मुकुन्दरा से पहले कई कैमरा ट्रैप भी गायब हुए थे जिस मामले को भी दबा दिया गया था. कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें बाड़े में बंद, टाइगर टी 104 को और एक पुराने वीडियो में एमटी-3 को परेशान किया जा रहा है. वहीं रणथंभौर में टाइगर पर फ़िल्म बनाने वाली कंपनी नें टाइगर पर फ़िल्म बनाने के प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ा दी. मुकुन्दरा की तबाही की रिपोर्ट यानी दक कमेटी की रिपोर्ट भी अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है. कुल मिला के यह कहा जा सकता है, वन विभाग कुछ भी सही नहीं चल रहा है. वन मंत्री एक भी मामले पर बोलने को तैयार नहीं है. अब देखना ये होगा की संवेदनशील कही जाने वाली राज सरकार इन मामलों को लेकर क्या एक्शन लेती है.
फर्स्ट इंडिया के लिए निर्मल तिवारी की रिपोर्ट

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