आजादी के 70 साल बाद भी गांवों में नहीं पहुंची बुनियादी सुविधाएं

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/08/01 03:50

रामगढ़ (जैसलमेर)। नवसृजित ग्राम पंचायत नेतसी के अनुसूचित जनजाति के 170 परिवार आजादी के 70 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे है। कम शिक्षित होने के कारण इन्हें केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया गया। मजदूरी कर गुजर बसर कर रहे इन परिवारों की सुध लेने न तो कोई जनप्रतिनिधि आते हैं और न ही जिला प्रशासन। कभी कभार कोई जनप्रतिनिधि इनके पास पहुंच भी जाते है तो महज आश्वासन देकर लौट जाते है। जनप्रतिनिधि विपक्ष के हो तो सरकार नहीं होने का राग अलाप कर चले जाते हैं। यहां सभी घर छप्परपोश व कच्चे बने हुए है फिर भी इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला। इन्हें अगर किसी सरकारी योजना का लाभ मिला भी है तो वो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।

दलित सरपंच फिर नहीं मिली सुविधाएं
ग्राम पंचायत रामगढ़ से अलग होकर नई पंचायत बनी नेतसी के सरपंच पद के लिए अनुसूचित जनजाति के लिए सीट आरक्षित हो गई। जिस पर दलित महिला पप्पू देवी को सरपंच बनने का सौभाग्य मिला। अपनी जाति का सरपंच बनने पर इन परिवारों को मूलभूत सुविधाएं मिलने की उम्मीद जगी लेकिन साढ़े तीन साल बीतने के बाद भी हालात वहीं के वहीं है। सूत्रों से मिला जानकारी के अनुसार सरपंच केवल कागजों पर या चैक पर हस्ताक्षर करती है। बाकि ग्राम पंचायत के सभी कार्य किसी रसूखदार की देखरेख में हो रहे है। सरकार ने एससी की सीट आरक्षित कर सरपंच तो बना दिया लेकिन रसूखदारों के आगे दबे ये दलित अपने स्तर पर सरपंचाई भी नहीं कर पा रहे है। 

खुले में शौच जाने को मजबूर
दलित सरपंच बनने के बाद भी स्थानीय वाशिंदे बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे है। ग्राम पंचायत नेतसी में स्थित एकलपार व दबलापार के 170 दलित परिवार आज भी खुले में शौच करने जाने को मजबूर है। सरपंच के अलावा केवल मात्र एक अन्य घर में शौचालय बना हुआ है। यहां स्वच्छ भारत अभियान की खुले आम धज्जियां उड़ रही है जबकि जिला प्रशासन ने जैसलमेर जिले को ओडीएफ घोषित कर रखा है। ग्रामीणों का कहना है कि, "पूर्व पंचायतों की तरह वर्तमान पंचायत भी उनकी सुध नहीं ले रही है। पूर्व पंचायतों की तरह वर्तमान पंचायत द्वारा भी केवल रसूखदारों के यहां शौचालय बनवाए गए।"

पीने के पानी के लिए करते है मशक्कत
नेतसी पंचायत के इन उपेक्षित परिवारों को पीने के पानी के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। कहने को यहां चार जीएलआर बनी हुई और इन्हें पाइप लाइन से भी जोड़ा गया है लेकिन अनियमित जलापूर्ति के कारण एकलपार व दबलापर के वाशिंदों को पीने के पानी के लिए भटकते देखा जा सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि, "केन्द्र सरकार की दीनदयान उपाध्याय योजना के तहत बिजली तो आई लेकिन सड़क जैसी सुविधाओं से आज भी महरूम है। स्कूल की दूरी अधिक होने के कारण 50 से अधिक बालक शिक्षा से वंचित हैं। ग्राम पंचायत ने तो यहां न तो शौचालय बनवाए, न पेयजल हेतु सार्वजनिक टांके और न ही इंटरलॉकिंग सड़कें।" उपेक्षा के शिकार ये परिवार इस आधुनिक युग में आदिवासियों की तरह जीने को मजबूर है।

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

संबंधित ख़बरे

Most Related Stories

Stories You May be Interested in