विधानसभा में आज आरक्षण विधेयक समेत 8 विधेयक पारित, 4 विनियोग विधेयक भी हुए पास

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/02/13 09:11

जयपुर। राज्य विधानसभा ने बुधवार को महिलाओं के लिए लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीट आरक्षित करने के लिए शासकीय संकल्प को ध्वनिमत से पारित कर दिया। साथ ही अति पिछड़े वर्गों को संविधान की नवीं अनुसूची में सम्मिलित करवाने के लिए शासकीय संकल्प भी पारित किया।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ममता भूपेश ने संकल्प सदन में प्रस्तुत करते हुए कहा कि महिलाओं के लिए लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीट आरक्षित करने केि लिए राजस्थान सरकार द्वारा लिये गये निर्णय का संज्ञान लेते हुये यह सदन केन्द्र सरकार से आग्रह करता है कि महिलाओं के लिए लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीट आरक्षित करने के लिए अतिशीघ्र महिला आरक्षण बिल पारित किया जाए।

ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला ने संकल्प सदन में प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रदेश के अति पिछडे़ वर्गों अर्थात् बंजारा/बालदिया/लबाना, गाडिया लोहार/गाडोलिया, गुर्जर/गुजर, राइका/रैबारी/देबासी और गडरिया/गाडरी/गायरी के शैक्षिक और सामाजिक रूप से अत्यधिक पिछड़े होने को दृष्टिगत रखते हुए ‘राजस्थान पिछड़ा वर्ग अधिनियम, 2017’ एवं ‘राजस्थान पिछड़ा वर्ग विधेयक, 2019’ को संविधान के अनुच्छेद-31 (ख) के अंतर्गत संविधान की 9वीं अनुसूची में सम्मिलित करवाने एवं संविधान में यथोचित संशोधन के लिए यह सदन भारत सरकार से आग्रह करता है।

सदन में आज डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय और हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय विधेयक 2019 ध्वनिमत से पारित किए गए। उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया। विधेयक पर हुई बहस पर जबाव देते हुए उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने और शिक्षा की गुणवत्ता को बनाये रखना सरकार की प्राथमिकता है। इसी को ध्यान मेें रखते हुए यह विधेयक लाया गया है। 

भाटी ने बताया कि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 5 करोड़ रुपए का शुरूआती प्रावधान किया गया है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के माध्यम से शोध कार्याेंं का संचालन, समान शैक्षणिक कैलेण्डर, विधि शिक्षा में एकरूपता, विधि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्यों की पूर्ति हो सकेगी। इस विश्वविद्यालय की स्थापना से विधिक चेतना के नये दौर की शुरूआत होगी तथा स्वरोजगार तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि शुरूआत में शैक्षणिक व अशैक्षणिक पदों को संविदा या प्रतिनियुक्ति से भरा जाएगा। राज्य में 15 राजकीय तथा 66 निजी विधि महाविद्यालय है, जिनमें 30 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और इन सभी महाविद्यालयों को एक ही विश्वविद्यालय से संबद्धता मिले, ऐसे प्रयास किये जायेंगे। 

राज्य विधानसभा ने बुधवार को हरिदेव जोशी पत्रकारिता विधेयक भी ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले उच्च शिक्षा मंत्री भवंर सिंह भाटी ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया। विधेयक पर हुई बहस का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारिता एवं जनसंचार में नवाचार तथा अपार संभावनाओं को देखते हुए इस विधेयक को लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के माध्यम से प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक तथा सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों में युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।

भाटी ने बताया कि 2012 में 7 राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई थी। इनमें हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर भी शामिल था। किसी भी राज्य द्वारा इतनी संख्या में वित्त पोषित विश्वविद्यालय खोलने का यह देश में पहला उदाहरण था। तत्कालीन सरकार द्वारा इसे क्रियाशील बनाने के लिए कुलपति की नियुक्ति तथा कुलसचिव के लिए राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी का पदस्थापन भी किया गया था। तत्कालीन सरकार द्वारा इस विश्वविद्यालय के लिए 9 शिक्षकों की भर्ती कर दी गई थी तथा दहमीकलां में 30 एकड़ जमीन के आवंटन  के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण के प्रस्ताव पर नगरीय विकास विभाग द्वारा स्वीकृति भी जारी कर दी गई थी । लेकिन राजनीतिक दुर्भावनावश पूर्ववर्ती सरकार द्वारा विश्वविद्यालय को बजट आवंटन बंद कर दिया तथा 2017 में इस विश्वविद्यालय को बंद भी कर दिया गया। उन्होंने कहा कि संभवतः यह पहला अवसर था जब किसी सरकार द्वारा राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालय को बंद कर दिया गया।  उन्होंने कहा कि यह विधेयक जनसंपर्क तथा पत्रकारिता को बढ़ावा देने में उपयोगी साबित होगा।

सदन में बुधवार को राजस्थान सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक भी ध्वनिमत से पारित कर दिया। सहकारिता मंत्री अंजना उदयलाल ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया। विधेयक पर हुई बहस का जवाब देते हुए सहकारिता मंत्री ने कहा कि विधेयक में संशोधन सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख, विधायक, सांसद सहित अन्य सबद्ध लोगों को ध्यान में रख कर बिना दुर्भावना के किये गये हैं। इससे राज्य में सहकारिता को मजबूती मिलेगी। इससे पहले सदन ने विधेयक के संबंध में परिनियत संकल्प को ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया।  साथ ही विधेयक को जनमत जानने के लिए परिचालित करने तथा प्रवर समिति को भेजने के संशोधन प्रस्ताव ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिए।

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