जयपुर VIDEO: राज्य में खरीफ फसलों की 90 प्रतिशत बुवाई हुई पूरी, अब किसानों को यूरिया की दरकार, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: राज्य में खरीफ फसलों की 90 प्रतिशत बुवाई हुई पूरी, अब किसानों को यूरिया की दरकार, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: खरीफ फसलों की बुवाई जोरों पर है. प्रदेश में ज्यादातर जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य अब पूरा हो गया है. कृषि विभाग के आंकड़ों में प्रदेश में 90 फीसदी बुवाई पूरी हो चुकी है. अब किसानों को यूरिया की दरकार है. हालांकि कृषि विभाग ज्यादातर मांग वाले जिलों में यूरिया की आपूर्ति करने में जुटा हुआ है. 

राजस्थान में खरीफ फसलों में सबसे ज्यादा बाजरा की बुवाई होती है और इस वर्ष अब तक 40 लाख हैक्टेयर से ज्यादा रकबे में बाजरा की बुवाई की जा चुकी है. कृषि विभाग ने खरीफ फसलों की कुल क्षेत्र में बुवाई का जो लक्ष्य रखा था, उसके मुकाबले विभाग अब तक 90 फीसदी लक्ष्य हासिल कर चुका है. पूर्वी राजस्थान में जहां ज्यादातर जिलों में बुवाई पूरी हो चुकी है. वहीं पश्चिम राजस्थान के कुछ हिस्सों में बुवाई होना बाकी है. केवल अरण्डी की बुवाई कुछ जिलों में बकाया चल रही है, अन्यथा पूरे राजस्थान में सोयाबीन, मूंग, मोंठ, ज्वार, मक्का, उड़द आदि फसलों की बुवाई हो चुकी है. इस बीच जिन जिलों में फसलों में निराई का काम पूरा हो चुका है, वहां पर बारिश होने के साथ ही यूरिया की डिमांड बढ़ती जा रही है. हालांकि इन दिनों राजस्थान में फसलों में निराई करने के बजाय किसानों द्वारा खरपतवारनाशी रसायनों का उपयोग भी बढ़ा है. ऐसे में कृषि विभाग किसानों की जरूरतों के मुताबिक सभी जिलों में कीटनाशी और खरपतवारनाशी रसायन उपलब्ध करा रहा है. 

फसलों की बुवाई की यह है स्थिति

- करीब 44 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में की जा रही बाजरा की बुवाई

- करीब 24 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में मूंग की बुवाई की जा रही

- 25 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में हो रही ग्वार बुवाई

- सोयाबीन की 11 लाख हैक्टेयर, मोठ की 10 लाख हैक्टेयर में बुवाई

- मक्का 9 लाख हैक्टेयर, ज्वार की 6 लाख हैक्टेयर में बुवाई

- उड़द की बुवाई करीब 5.50 लाख हैक्टेयर में हो रही

- खरीफ में 164.17 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल में बुवाई का है लक्ष्य

- प्रदेश में अब तक करीब 149 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल में हुई बुवाई

दरअसल राजस्थान में खरीफ फसलों की बुवाई 19 जून से ही शुरू हो गई थी. पूर्वी राजस्थान के जयपुर, भरतपुर, दौसा, अलवर, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर आदि जिलों में बाजरा, ज्वार व अन्य फसलों की बुवाई जून माह के अंतिम सप्ताह तक पूरी हो गई थी. ऐसे में इन फसलों में अब यूरिया की डिमांड बढ़ रही है. इसे देखते हुए कृषि विभाग किसानों की जरूरत के मुताबिक यूरिया उपलब्ध करा रहा है. हालांकि राज्य में डीएपी सरप्लस है. अब खरीफ फसल की बची हुई डीएपी को रबी सीजन की फसलों में उपयोग में लिया जाएगा.

कितना फर्टिलाइजर चाहिए, कितना है उपलब्ध ?

- राज्य में डीएपी सरप्लस है, यानी जरूरत से ज्यादा उपलब्ध

- अभी 1.13 लाख मीट्रिक टन काम नहीं आया, स्टॉक में बचा हुआ

- खरीफ फसलों में 8 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत है

- अब तक राज्य को करीब पौने 6 लाख मीट्रिक टन यूरिया मिल चुका

- 15 अगस्त तक पूरा 8 लाख मीट्रिक टन यूरिया मिल जाएगा

- हालांकि अभी भी किसानों के लिए 2.70 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध

जुलाई माह में पूरे प्रदेश में बारिश की स्थिति अच्छी रही है, इसलिए इस बार अभी तक अन्नदाता के चेहरे खिले हुए हैं. मानसून का यह सीजन लगातार बने रहने से खरीफ फसलों का उत्पादन अच्छा रहने की उम्मीद है. ऐसे में कृषि विभाग भी लगातार किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रयासरत है. उम्मीद की जानी चाहिए कि खरीफ फसलों में डीएपी और यूरिया की यह पर्याप्त उपलब्धता रबी सीजन की फसलों के दौरान भी बनी रहेगी.

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