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दुर्गा अष्टमी के मौके पर शक्तिपीठों पर नजर आ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़

दुर्गा अष्टमी के मौके पर शक्तिपीठों पर नजर आ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़

प्रतापगढ़: दुर्गा अष्टमी के मौके पर आज प्रतापगढ़ जिले के विभिन्न शक्तिपीठों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नजर आ रही है. यहां दिनभर हवन और पूजन के कार्यक्रम आयोजित होंगे. कई शक्तिपीठों पर श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई है. वहीं सुरक्षा के लिहाज से भी पुलिस की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.

ढोल नगाड़ों के साथ दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु:
प्रतापगढ़ शहर में भी विभिन्न शक्तिपीठों पर धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं. प्रतापगढ़ में आज दुर्गा अष्टमी के मौके पर समीपवर्ती अंबा माता शक्ति पीठ पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का ताता लगा हुआ है. 5 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर श्रद्धालु शक्ति पीठ पर पहुंच रहे हैं और माता का आशीर्वाद ले रहे हैं. नंगे पांव जा रहे श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए रास्ते में विभिन्न संगठनों की ओर से जलपान की व्यवस्था की गई है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु ढोल नगाड़ों के साथ नाचते गाते माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. अंबा माता मंदिर के बाहर दर्शनों के लिए भक्तों की लंबी लंबी कतारें लगी हुई है. मार्ग में जलपान के साथ लोगों को मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए आयुर्वेदिक काढ़ा भी पिलाया जा रहा है. श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए पुलिस की ओर से भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं.  

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भरतपुर: कोरोना के खौफ ने परंपरागत पर्व गुरु पूर्णिमा का रंग पूरी तरह से फीका कर दिया है और हालात यह हो गए है कि आज जहां विभिन्न मंदिरों में धार्मिक आयोजन होने थे वहां सन्नाटा पसरा हुआ नजर आ रहा है. भरतपुर के पड़ोसी उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन में आयोजित होने वाला मुड़िया पूनो मेला भी रद्द कर दिया गया है और आज तक के इतिहास मैं ऐसा पहली बार हो रहा है कि गुरु पूर्णिमा पर लगाई जाने वाली 7 कोस परिक्रमा मार्ग आज वीरान नजर आ रहा है.

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पूंछरी के लौठा गांव में छाई वीरानी:
गुरु पूर्णिमा के मौके पर गोवर्धन की परिक्रमा देने के लिए देश के दूरदराज इलाकों से करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते थे, लेकिन कोरोना के खौफ के चलते परिक्रमा को स्थगित करना पड़ा है. गोवर्धन महाराज की परिक्रमा का लगभग डेढ़ किलोमीटर का हिस्सा राजस्थान में भी आता है और डीग तहसील के पूंछरी का लौठा गांव में भी आज वीरानी छाई हुई है.

विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हुए रद्द:
श्रद्धालु गोवर्धन परिक्रमा देने तक नहीं पहुंचे इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और जगह-जगह पुलिस बैरिकेड लगाकर श्रद्धालुओं को वापस भेज रही है. गुरु पूर्णिमा के मौके पर पूरा ब्रज मंडल गिर्राज महाराज की जयकरों से गुंजायमान रहता था लेकिन कोरोना ने अन्य त्योहारों की तरह गुरु पूर्णिमा पर्व का भी मजा किरकिरा कर दिया है. भरतपुर शहर में गुरु पूर्णिमा के मौके पर नगर परिक्रमा का हर साल आयोजन होता था लेकिन आज नगर परिक्रमा भी रद्द कर दी गई है. भरतपुर शहर की सर्कुलर रोड पर जहां हजारों लोगों की भीड़ और सैकड़ों की संख्या में भंडारे आयोजित होते थे वह भी कही नजर नहीं आ रहे हैं.

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जयपुर: देशभर में आज गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है. शिष्य अपने गुरुओं की पूजा अर्चना करके श्रद्धा प्रकट कर रहे है. लेकिन कोरोना संकट की वजह से देशभर में गुरु पूर्णिमा पर कोई बडा आयोजन नहीं होगा. गुरुओं के आश्रम में भी बडे आयोजन पर रोक है. आपको बता दें कि गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. इस दिन गुरु पूजा का विधान है. गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के शुरू में आती है. 

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इस दिन हुआ था महर्षि वेदव्यास का जन्म:
इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं. ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं. न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी. इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं. जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है. इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म भी हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. इस दिन से ऋतु परिवर्तन भी होता है. इस दिन शिष्य द्वारा गुरु की उपासना का विशेष महत्व भी है.

ऐसे करें गुरु की पूजा...

-सबसे पहले आप गुरु को उच्च आसन पर बैठाये.

-इसके बाद आप गुरु के चरण साफ जल से धुलाएं और फिर चरण को साफ करें. 

-फिर आप गुरुजी के चरणों में पीले या सफेद पुष्प अर्पित कीजिए. 

- इसके बाद गुरुजी को श्वेत या पीले वस्त्र देने चाहिए. 

- यथाशक्ति फल, मिष्ठान्न दक्षिणा अर्पित कीजिए. 

- आप गुरु से अपना दायित्व स्वीकार करने की प्रार्थना कीजिए.

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मानसून की सटीक भविष्यवाणी के लिए आज जंतर-मंतर पर होगा वायु परीक्षण

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जयपुर: मानसून की सटीक भविष्यवाणी के लिए आज जंतर मंतर वेधशाला पर वायु परीक्षण किया जाएगा. आषाढ़ी पूर्णिमा के अवसर पर जंतर मंतर के सम्राट यंत्र पर आज ज्योतिष से और दैवज्ञ जुटेंगे. सूर्यास्त काल में ध्वज पूजन के साथ वायु परीक्षण की प्रक्रिया शुरू होगी. कोरोना महामारी के चलते इस बार महज पांच ज्योतिष वह दैवज्ञ ही वायु परीक्षण की विधिवत प्रक्रिया संपन्न कराएंगे.

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वायु के दाब और दिशा के अनुसार मानसून की भविष्यवाणी:  
दरअसल, वायु धारिणी आषाढ़ी पूर्णिमा पर हर वर्ष जंतर मंतर पर वायु परीक्षण किया जाता है. जिसमें सम्राट यंत्र पर ध्वज पूजन के बाद वायु के दाब और दिशा के अनुसार मानसून की भविष्यवाणी की जाती है. इस वर्ष मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार मानसून अच्छा रहेगा. यदि आज ज्योतिष वायु परीक्षण के बाद मानसून को लेकर सकारात्मक भविष्यवाणी करते हैं तो मौसम विभाग की भविष्यवाणी पर भी मुहर लग जाएगी.

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पितृ पक्ष के समापन के 1 महीने बाद आएगी नवरात्र, 165 साल बाद बना संयोग

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जयपुर: हर साल पितृ पक्ष के समापन के अगले दिन से नवरात्रि का आरंभ हो जाता है जो कि इस साल नहीं होगा. आश्विन मास में मलमास लगना और एक महीने के अंतर पर दुर्गा पूजा आरंभ होना ऐसा संयोग करीब 165 साल बाद लगने जा रहा. इसके चलते नवरात्रि 1 महीने विलंब से शुरू होंगे. 

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इस बार चातुर्मास पांच महीने का: 
लीप वर्ष होने के कारण इस बार चातुर्मास जो हमेशा चार महीने का होता है, इस बार पांच महीने का होगा. चातुर्मास लगने से विवाह, मुंडन, कर्ण छेदन जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे. इस काल में पूजन पाठ, व्रत उपवास और साधना का विशेष महत्व होता है. इस दौरान देव सो जाते हैं. देवउठनी एकादशी के बाद ही देव जागृत होते हैं.

इस साल 17 सितंबर 2020 को श्राद्ध खत्म होंगे:
इस साल 17 सितंबर 2020 को श्राद्ध खत्म होंगे. इसके अगले दिन अधिकमास शुरू हो जाएगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा. इसके बाद 17 अक्तूबर को प्रतिपदा तिथि यानि के प्रथम नवरात्र होगा और 25 अक्तूबर को नवमी तिथि तक नवरात्र रहेंगे. जिसके साथ ही चातुर्मास समाप्त होंगे. इसके बाद ही शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन आदि शुरू होंगे. 

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अंतर हर तीन वर्ष में लगभग एक माह के बराबर: 
एक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, जबकि एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है. दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है. ये अंतर हर तीन वर्ष में लगभग एक माह के बराबर हो जाता है. इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त आता है, जिसे अतिरिक्त होने की वजह से अधिकमास का नाम दिया गया है. 


 

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जयपुर: आज देवशयनी एकादशी है. इसी एकादशी के साथ चातुर्मास का महीना भी आरंभ हो जाएगा. हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक इन चार महीनों में सभी तरह के शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है. इसे भगवान विष्णु का शयन काल माना जाता है. पुराणों के अनुसार इस दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए क्षीरसागर में शयन करते हैं. इस तिथि को पद्मनाभा, विष्णुशयन भी कहा जाता है. हालांकि इस बार चातुर्मास 4 महीने की जगह पांच महीने का है. यानी 1 जुलाई से शुरू होकर यह समय 25 नवंबर तक चलेगा, इसके बाद 26 नवंबर से मांगलिक कार्यों की शुरुआत की जा सकेगी.

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शिव करेंगे संसार का संचालन: 
मान्यता है कि इस अवधि में श्रीहरि, पाताल के राजा बलि के यहां चार मास निवास करते हैं. इस अवधि में भगवान शिव पृथ्वीलोक पर आते हैं और चार मास तक संसार की गतिविधियों का संचालन करते हैं. भगवान शिव गृहस्थ होते हुए भी संन्यासी हैं. अत: उनके राज में विवाह आदि कार्य वर्जित होते हैं. देवशयनी एकादशी का व्रत करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनके सभी पापों का नाश होता है लेकिन इस दिन और भी कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है. आइए जानते हैं इस दिन कौन से काम नहीं करने चाहिए.

- एकादशी के दिन चावल नहीं खाना चाहिए, इसे खाने से व्यक्ति का मन चंचल होता है और प्रभु भक्ति में मन नहीं लगता है. 

- देवशयन की अविधि में पत्तल पर भोजन करें.

- वाक-सिद्धि प्राप्त करने के लिए इस अवधि में मीठे पदार्थों का त्याग करें.

- आरोग्य की प्राप्ति के लिए इस अवधि में तली हुई वस्तुओं का त्याग करें.

- एकादशी को बिस्तर पर नहीं, जमीन पर सोना चाहिए. मांस और नशीली वस्तुओं का सेवन भूलकर ना करें. स्नान के बाद ही कुछ ग्रहण करें.

- एकादशी के दिन झूठ नहीं बोलें, इससे पाप लगता है. एकादशी के दिन भूलकर भी क्रोध नहीं करें.

- एकादशी के दिन किसी पेड़-पत्ती की फूल-पत्ती तोड़ना वर्जित है.

- एकादशी के दिन पान खाना भी वर्जित माना गया है. 

- संतान की उन्नति के लिए देवशयन की अवधि में दूध एवं दूध से बनी वस्तुओं का त्याग करें.

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राजस्थान में इन शर्तों पर मिली ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक स्थल खोलने की अनुमति

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जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लॉकडाउन के कारण बंद किए गए ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे धार्मिक एवं उपासना स्थलों, जिनमें सीमित संख्या में श्रद्धालु आते हैं, को 1 जुलाई से खोले जाने की छूट दी है. इन धर्मस्थलों पर सोशल डिस्टेंसिंग सहित कोरोना से बचाव के सभी सुरक्षात्मक उपायों की पालना करना अनिवार्य होगा. मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों से राजस्थान आने वाले व्यक्तियों के लिए 14 दिन के होम क्वारेंटाइन की अनिवार्यता को हटाने के निर्देश भी दिए हैं.  

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जीवन की सुरक्षा राज्य सरकार के लिए सर्वोपरि: 
गहलोत ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर कोरोना संक्रमण की स्थिति की समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण बंद हुए धार्मिक स्थलों को खोलने के लिए जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में गठित की गई कमेटियों के सुझावों के आधार पर शहरों में सभी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े धार्मिक स्थलों को फिलहाल नहीं खोला जाए. उन्होंने कहा कि जीवन की सुरक्षा राज्य सरकार के लिए सर्वोपरि है. इसलिए जनहित में अभी ऐसा किया जाना आवश्यक है. 

सीमित संख्या में लोग उपासना कर सकेंगे:
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में केवल उन्हीं धार्मिक स्थलों को खोलने की अनुमति होगी जहां सामान्य दिनों में प्रतिदिन 50 या इससे कम लोग आते हैं. इन स्थलों पर एक समय में सीमित संख्या में लोग उपासना, दर्शन अथवा अन्य धार्मिक कार्यों के लिए मौजूद रह सकेंगे. इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजेशन और मास्क पहनने आदि हेल्थ प्रोटोकॉल सहित भारत सरकार की ओर से धार्मिक स्थलों के लिए जारी एसओपी की पालना सुनिश्चित की जाए. 

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14 दिन की होम क्वारेंटाइन अवधि की अनिवार्यता को हटाया:
गहलोत ने कहा कि दूसरे राज्यों से प्रदेश में आने वाले व्यक्तियों के लिए 14 दिन की होम क्वारेंटाइन अवधि की अनिवार्यता को हटा दिया गया है. लेकिन ऐसे लोग स्वेच्छा से अपनी आवाजाही को सीमित रखें तथा संक्रमण से बचाव के सभी सुरक्षात्मक उपाय अपनाएं एवं लक्षण होने पर अविलम्ब जांच करवाकर चिकित्सकीय परामर्श लें.  

पुरी में निकली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, बिना श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकाली गई रथ यात्रा 

पुरी में निकली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, बिना श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकाली गई रथ यात्रा 

नई दिल्ली: कोरोना संकट के बीच मंगलवार को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली गई. सुप्रीम कोर्ट की सोशल डिस्टेंसिंग सहित तमाम गाइडलाइन्स के बीच भगवान जगन्नाथ रथयात्रा निकाली गई. पुरी में बिना श्रद्धालुओं की मौजूदगी में रथ यात्रा निकाली गई. भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ अपनी मौसी के घर जाते हैं. गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है. यहां भगवान 7 दिनों तक आराम करते हैं. इसके बाद वापसी की यात्रा शुरु होती है. ओडिशा में पुरी के अलावा भी कई जगहों पर ऐसी यात्राएं आयोजित की जाती हैं.

अहमदाबाद में नहीं निकली रथयात्रा:
अहमदाबाद में मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली गई. आपको बता दें कि गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के बाद अहमदाबाद में रथ यात्रा नहीं निकल रही. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए भक्तों को मंदिर परिसर में ही दर्शन की अनुमति है. सुबह मंगला आरती के बाद गुजरात के सीएम विजय रुपाणी ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए और परंपरा के मुताबिक सोने के झाड़ू से सफाई की.

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पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं:
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के पावन-पुनीत मौके पर आप सभी को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं. मेरी कामना है कि श्रद्धा और भक्ति से भरी यह यात्रा देशवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि, सौभाग्य और आरोग्य लेकर आए. जय जगन्नाथ.

पुरी में सख्त पाबंदी, लगाया कर्फ्यू
आज भी हर वर्ष की तरह पुरी में रथयात्रा निकलेगी, लेकिन इस बार नजारा अलग ही होगा. क्योंकि रथयात्रा में भक्त शामिल नहीं होंगे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सोमवार रात 9 बजे से ही पुरी में कर्फ्यू लगा दिया गया है, जो बुधवार दोपहर 2 बजे तक जारी रहेगा, इस दौरान किसी को घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं है.

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जैसलमेर: कोरोना महामारी के चलते जहां प्रदेश के सभी मंदिरों में लॉकडाउन का पहरा है और भक्तों को मंदिरों के खुलने का बेसब्री से इंतजार है. कोरोना संक्रमण की गति को देखते हुए प्रशासन ने धर्म स्थल प्रमुखों द्वारा देवालय खोले जाने की राय को सरकार के अवलोकनार्थ भेज दिया है. सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक धर्मस्थल खोले जाएंगे. जिले में 22 मार्च से मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च श्रद्धालुओं के लिए बंद हैं.

भक्तों बिना सुनसान दिखाई दिया मंदिर:
इस संबंध में पिछले दिनों सीएम अशोक गहलोत ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए धर्म स्थल प्रमुखों से राय मांगी थी, जिसमें जिला कलेक्टर को अधिकार दिए गए थे. इसी तरह जैसलमेर का गजेटेड हनुमान मंदिर तीन महीने से भक्तों बिना सुनसान दिखाई दे रहा है. तीन महीने से भक्तों ने हनुमान जी के दर्शन नहीं किए है. इसको लेकर फर्स्ट इंडिया आज मंगलवार को भगवान् हनुमान के दर्शन करवा रहा है. हिन्दुस्तान का यह पहला हनुमान मंदिर है जिसमें बिराजित हनुमान जी महाराज गजेटेड़ यानि राजपत्रित हैं.

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भक्तों की गजेटेड़ हनुमान पर अटूट आस्था:
हनुमान भक्तों की गजेटेड़ हनुमान पर अटूट आस्था है. भक्तों का मानना है कि हनुमानजी हर किसी की मुराद जरूर पूरी करते हैं. चूंकि बिजली विभाग के परिसर में हैं अतः इन हनुमानजी को भक्तगण करंट बालाजी के नाम से भी पुकारते हैं. इन भक्तों की पक्की मान्यता है कि जो भी भक्त हनुमान दादा के दरबार में आ जाता हैए हनुमानजी उनकी सारी मनोकामनाएं करंट की मानिंद पूर्ण करते हैं. आमतौर पर रोजगार और प्रमोषन के लिये लोग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाते और कार्यालय के उच्चाधिकारियों की मान मनोव्वल करते है.

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फर्स्ट इंडिया आज करवा रहा है गजेटेड हनुमान के दर्शन:
लेकिन जैसलमेर के गजेटेड हनुमान जी की शरण में अगर कोई एक बार आ गया तो उसके कहीं भी चक्कर लगाने की आवष्यकता नहीं रहती. सरकारी नौकरी प्राप्त करने के इच्छुक बेरोजगार हो या फिर सरकारी कार्यालय में प्रमोशन की इच्छा रखने वाले कर्मचारी.. अपनी नौकरी और प्रमोशन का पहला आवेदन गजेटेड हनुमान जी के सामने रखते है.और बाकायदा ये गजेटेड हनुमान जी इनके आवेदनों का निस्तारण भी करते है, यही कारण है कि यहां पर प्रसाद के साथ साथ नौकरी और प्रमोशन की अर्जियां भी बडी संख्या में आती है. जिस तरह सरकारी कार्यालय में गजेटेड अधिकारी कृपा की आवष्यकता नीचे के कर्मचारियों को रहती है ठीक उसी प्रकार इस गजेटेड हनुमान की जी कृपा की आवश्यकता अधिकारियों, कर्मचारियों और बेरोजगारों को रहती है. आज फर्स्ट इंडिया अपने दर्शको को गजेटेड हनुमान जी ख़ास दर्शन करवा रहा है. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए सुर्यवीरसिंह तंवर की रिपोर्ट

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