सात साल से लोहे की बेडियों में जकड़ी लालचंद की जिंदगी

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/02/07 11:31

सरदारशहर(चूरू)। कुछ तस्वीरें मानवता के ऊपर सवालिया निशान खड़े कर देती है। ऐसे ही लोहे की बेडियों से जकड़ी हुई एक जिंदगी हर आने जाने वाले को निहारती हुई उसकी आंखे मानो यही कहती है कि मुझे भी इन बेडियों से मुक्त दिलाओं। जब उसकी आंख से आंख मिलती है  तो मानो कलेजा कांप पड़ता है। यह दर्द भरी कहानी है  सरदारशहर  से 33 किलोमीटर दूर गांव शिमला के लालचंद जाट की। आज से तकरीबन 12 साल पहले लालचंद अपने गांव से सुबह हंसी खुशी शहर गया था किसी काम से , लेकिन उस समय लालचंद को क्या पता था  जब वह फिर से शाम को अपने गांव आयेगा तो उसकी जिंदगी दोजक बन जाएगी । जहां आज हम अपने पालतू जानवरों की भी स्वतंत्रता का पूरा ख्याल रखते हैं वहीं लालचंद की जिंदगी एक पेड़ के इर्द-गिर्द ही सिमट कर रह गई है लालचंद की सुबह जहां होती है वहीं उसकी शाम हो जाती है।

ग्रामीणों ने बताया कि लालचंद 12 साल पहले सरदारशहर किसी काम से गया था यहां से जब वापस घर आया तो कुछ देर बाद अजीब अजीब हरकतें करने लगा और बाद में लालचन्द की ये हरकते बढ़ती गयी और धीरे-धीरे लालचंद मानसिक रोगी बन गया । हालात बेकाबू हुए तो घर वालों ने बीकानेर और जयपुर के बड़े-बड़े अस्पतालों में लालचंद का इलाज करवाया । लाखों रुपए खर्चा करने के बाद भी लालचंद की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ । लालचंद किसी को हानि ना पहुंचा दें इसलिए  लालचंद के परिवार ने थक हारकर लालचंद को 7 सालों से बेड़ियों से बांध रखा है। लालचंद के परिजनों का कहना है कि मानसिक रोगी होने की वजह से उसे घर में साकल से बांध रखा है वैसे तो लालचन्द चुप चाप बैठा रहता है पर लालचंद को बीच बीच में ऐसे सरारे उठते हैं जिसे वह पागलों की तरह हरकतें करने लगता है लोगों के घरों में पत्थर मारने लगता है लालचंद पिछले 7 सालों से अब अपने घर में ही सांकल से बंधा रहता है घरवालों ने बताया कि लालचंद की पेंशन शुरू करवाने के लिए काफी प्रयास किए लेकिन आज तक इसकी पेंशन शुरू नहीं हो सकी है। स्थिति यह है लालचंद सर्दी गर्मी बारिश के मौसम में भी बाहर ही सोता है लालचन्द को जिस पेड़ से बाँधा गया है उसके पास ही शोचालय भी बना दिया है और पास ही उसके लिए एक छोटी सी झोपडी बना दी गयी है सांकल से खोलने पर वह कभी भी कोई बड़ी हरकत करने लग जाता है । लेकिन हैरानी की बात यह है कि ऐसा क्या  हुआ 12 साल पहले उस दिन जिसके चलते लालचंद की यह दशा हो गई।

परिवार में कोई नहीं है कमाने वाला
लालचंद के परिवार की मजबूरी यह है कि उनके परिवार में कोई भी कमाने वाला नहीं है बड़ी मुश्किल से लालचंद के बुजुर्ग पिता और मां दूसरों के घरों में मजदूरी करके घर के सदस्यों का पालन पोषण करते हैं लालचंद की मां ने कहा कि पहले तो शुरू शुरू में लालचंद का जयपुर बीकानेर में इलाज करवाया। इस दौरान उनकी जमीन व  गहने   बिक गये लेकिन अब दो वक्त की रोटी का भी जुगाड़ बड़ी मुश्किल से होता है ऐसे में लालचंद का इलाज कराने में परिवार सक्षम नहीं है इस दुख से लालचंद के बड़े भाई की भी मानसिक स्थिति खराब हो गई है।  
हमारे संवाददाता  ने जब लालचंद से बात करनी चाहि तो लालचंद अजीब अजीब बातें करने लगा जब पूछा गया कि वह खुलना चाहता है तो उसने कहा हां ,लालचंद ने कहा कि वह खेत जाना चाहता है लालचंद की इन्हीं हरकतों की वजह से लालचंद का बड़ा भाई भी मानसिक रूप से परेशान हो चुका है और बहकी बहकी बाते करता है, सरकार निशुल्क इलाज कराने के बड़े-बड़े दावे करती है पर लालचंद की सुनने वाला कोई नहीं है लालचंद के घर वालों ने बताया की वर्तमान में घर की हालात बहुत खराब है और वह लालचंद का इलाज नहीं करवा सकते उनके पास बस का किराया तक नहीं है।

ग्रामीण बताया कि लालचंद की यह दशा देखकर हमारा भी दिल रोता है ग्रामीणों ने कई बार लालचंद की मदद करने की कोशिश की लेकिन इलाज में खर्चा अधिक होने की वजह से लालचंद का इलाज संभव नहीं हो पाया । ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार लालचंद की मदद को आगे आए तो लालचंद को बेड़ियां से मुक्ति मिल सकती है ।

लालचंद की मुरझाई आंखें हर आने-जाने वाले व्यक्ति को इस नजर से देखती है कि शायद कोई मुझे इन बेड़ियों से मुक्त दिला देगा । लालचंद के साथ साथ परिवार  और गांववासी भी लालचंद को बेडियो से मुक्त होते हुए देखना चाहते है । ग्रामीणों का कहना है कि लालचंद का इलाज हो जाता है और उसकी बेडिया हट जाती है तो गांव में होली और दिवाली दोनों एक साथ मनाई जाएगी। परिवार को और ग्रामीणों को अब भी आशा है शायद लालचंद फिर से अपने खेतों में जा पाएगा और गांव की गलियों में घूम पाएगा और  परिवार का सहारा बनेगा।
लालचंद की बेड़ियों से जकड़ी जिंदगी मानो आज मानवता को चुनौती दे रही है अब देखना यह है कि लालचंद को बेडियो से मुक्ति मिलती है या नहीं । या फिर मानवता यूं ही शर्मसार होती रहेगी।

...गजेंद्र सिंह फर्स्ट इंडिया न्यूज सरदारशहर

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