जयपुर VIDEO: राजस्थान में बेकाबू डेंगू के पीछे की एक बड़ी लापरवाही आई सामने, देखिए ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

VIDEO: राजस्थान में बेकाबू डेंगू के पीछे की एक बड़ी लापरवाही आई सामने, देखिए ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

जयपुर: मरुधरा में डेंगू के नए वेरीएंट ने एसएमएस अस्पताल का पिछले सात सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. सालों बाद नवंबर माह में भी मौसमी बीमारियों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. हालात यह है कि डेंगू समेत मौसमी बीमारियों के मरीजों में सीविरियटी केसेस की संख्या ज्यादा है.हालांकि चिकित्सक इसके पीछे अलग अलग कारणों के साथ मरीजों की लापरवाही को भी बड़ा कारण मान रहे हैं.आखिर क्या है डेंगू की खौफनाक तस्वीर और आमजन की लापरवाही कैसे पड़ रही भारी. 

मानसून के विदा होने के साथ ही मौसमी बीमारियों का दौर शुरु होना और करीब एक माह बाद ही इस ट्रेंड में गिरावट आम बात है. लेकिन इस बार मौसमी बीमारियां और खासकर डेंगू ने नवम्बर में भी आंतक मचा रखा है.इस साल एक अरसे बाद नवंबर माह का एक सप्ताह गुजरने के बावजूद मौसमी बीमारियों कंट्रोल में नहीं आ रही है. राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के लगभग हर हिस्से में मौसमी बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं.प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल की बात की जाए तो नवंबर माह में ही डेंगू से 15 लोगों की मौत हो चुकी है.चिकित्सकों का इसके पीछे मानना है कि एक तो इस साल मानसून देरी से विदा हुआ. दूसरा डेंगू का नए वेरीएंट का असर ज्यादा है. और तीसरा मरीजों की लापरवाही. एसएमएस अस्पताल पहुंच रहे मरीजों से बात कर चिकित्सकों ने बताया कि एक ही घर में डेंगू से प्रभावित होने वाले मरीजों की संख्या ज्यादा है. दरअसल, एक मरीज को डेंगू होने के बाद इलाज तो लिया जा रहा है. लेकिन डेंगू मच्छर घर में ना पनपे और घर के अन्य सदस्यों को ना प्रभावित करे. इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

रोजाना दो लोगों की जान ले रहा डेंगू !:
-SMS में डेंगू की नवम्बर में मौतरूपी खौफनाक तस्वीर
-अकेले नवम्बर में एसएमएस में डेंगू से 15 लोगों की मौत
-एक नवम्बर को चार, दो नवम्बर को दो, तीन नवम्बर को एक
-चार नवम्बर को तीन,पांच नवम्बर को एक,छह नवम्बर को एक
-सात नवम्बर को तीन मरीजों की डेंगू के चलते हुई मौत
-पिछले अक्टूबर माह में 27 लोगों ने गंवाई डेंगू से जान
-लेकिन पिछले सात सालों में एक सप्ताह में नहीं इतने लोगों की मौत
-खुद चिकित्सक डेंगू के इस खौफनाक रूप से चिंतित

इस बार डेंगू से मरने वालों की संख्या ज्यादा होने को लेकर चिकित्सकों का कहना है कि आमजन में इलाज के प्रति लापरवाही एक बड़ा कारण है. सामान्यतः मरीज खुद अपनी मर्जी से दवाएं ले रहे हैं. और ज्यादा सिवियर होने के बाद ही अस्पताल पहुंच रहे हैं. चिकित्सकों का कहना है कि डेंगू से इस बार युवा ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. वहीं प्राइमरी डेंगू भी इस बार ज्यादा खतरनाक हो चुका है. देरी से और सही इलाज नहीं लेने के कारण लिविर फेल्योर के केसेस सबसे ज्यादा आए हैं. चिकित्सकों का कहना है कि इस बार डेंगू के वेरियंट में आए बदलाव का ही असर है कि प्लेटलेट्स की रिकवरी भी स्लो है.पहले जहां तीन से चार दिन में प्लेटेल्स रिकवरी मोड में आ जाती थी, उसमें अब सात से दस दिन लग रहे है.

राजस्थान में मौतरूपी डेंगू !:
-खौफनाक डेंगू की मौतों ने तोड़ा सात सालों का रिकॉर्ड
-प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल की तस्वीर
-अस्पताल में इस साल अभी तक 605 पॉजिटिव, 50 मौतें
-अकेले नवम्बर के तीन दिनों में हो चुकी 13 लोगों की डेंगू से मौत
-जबकि इससे पहले 2020 में 7 लोगों की मौत 207 पॉजिटिव
-अस्पताल में वर्ष 2019 में सामने आए 843 केस, 18 की मौत
-2018 में डेंगू के 869 मामले चिह्नित, चार लोगों ने गंवाई जान
-2017 में 302 पॉजिटिव केस, एक मरीज की डेंगू से हुई मौत
-2016 में 178 पॉजिटिव केस, एक मरीज की डेंगू से हुई मौत
-2015 में 412 पॉजिटिव केस, चार मरीजों ने डेंगू से गंवाई जान

प्रदेशभर में बेकाबू डेंगू ने आमजन के साथ ही चिकित्सकों की चिंता भी बढ़ा दी है.उनका कहना है कि मरीज ट्रीटमेंट पर ध्यान दे रहे है,लेकिन बीमारी के कारणों को अनदेखा कर रहे है. इसी वजह से एक घर में एक माह में तीन से चार केस डेंगू पॉजिटिव आ रहे है. बीमारी से बचने के लिए चिकित्सकों ने राय दी है कि अगर किसी भी घर में एक भी मरीज डेंगू का सामने आए तो तुरंत घर में साफ सफाई करनी चाहिए ताकि कोई और सदस्य शिकार ना हो पाए. उम्मीद ये है कि आमजन भी इस मामले में गंभीरता बरतेंगे ताकि जिस तरह कोरोना पर हमने जीत हासिल की, उसी तरह डेंगू का भी खात्मा किया जा सके.

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