पर्यटन निगम और मेक माय ट्रिप के बीच चल रही सौदेबाजी में आया एक नया मोड़

Nirmal Tiwari Published Date 2019/05/19 05:45

जयपुर: पर्यटन निगम और मेक माय ट्रिप के बीच चल रही सौदेबाजी में एक नया मोड़ आ गया है. पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह द्वारा ढ़ाई करोड़ मुआवजा तय करने के बाद भी पर्यटन निगम के अधिकारी मामले को डेढ़ करोड़ में रफा-दफा करने की तैयारी कर रहे हैं.

पर्यटन निगम की होटलों को गर्त में पहुंचाने वाले मेक माय ट्रिप पर आखिर क्यों पर्यटन निगम के अफसर मेहरबान है..? चुनावी दौर में पर्यटन निगम के अफसरों की इस रहस्य में जल्दबाजी के पीछे मिलीभगत की बू आती है. थोड़ा पीछे मुड़कर देखें तो इस मामले को उजागर होने के बाद पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह के कहने पर ही एफ आई आर दर्ज करवाई गई थी. इसके बाद विश्वेंद्र सिंह ने कंपनी के मुलाजिमों से बात कर ढ़ाई करोड़ रुपए मुआवजा भी तय किया था लेकिन आचार संहिता का फायदा उठा पर्यटन निगम के अफसर अपने ही मंत्री की बात ना मानते हुए कंपनी पर ज्यादा ही मेहरबानी दिखाने लगे और डेढ़ करोड़ रुपए में ही न केवल f.i.r. वापस लेने को तैयार हैं. वरन कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने की जगह पर्यटन निगम की होटल की बुकिंग देने को भी तैयार है. 

पूरे मामले में एक तकनीकी पेच भी 
दरअसल इस पूरे मामले में एक तकनीकी पेच भी है. राज्य सरकार में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बाद जो सबसे ज्यादा अनुभवी मंत्री हैं वह विश्वेंद्र सिंह हैं. पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह तीन बार सांसद, तीन बार विधायक और एक बार जिला प्रमुख रह चुके हैं, लेकिन वर्तमान सरकार में उनके अनुभव को संभवत यथेष्ट स्थान नहीं मिला है. पहली बार ऐसा देखने को मिला है कि जिस मंत्री के पास पर्यटन विभाग हो उसे कला संस्कृति नहीं दिया गया. वर्तमान सरकार में कला एवं संस्कृति का जिम्मा डॉ बीडी कल्ला के पास है. विडंबना यह भी है कि पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह के पास पर्यटन निगम को महज सलाह देने का अधिकार है वह आदेश नहीं दे सकते. शायद यही कारण है कि पर्यटन निगम के अफसर इतने अनुभवी और सक्षम मंत्री की सलाह को दरकिनार कर मेक माय ट्रिप के साथ हाथ मिलाने की साजिश रच रहे हैं.

मेक माय ट्रिप के साथ सौदेबाजी को अंतिम रूप दिया जाएगा
 इस मामले में कल पर्यटन निगम में एक बैठक भी होगी जिसमें मेक माय ट्रिप के साथ सौदेबाजी को अंतिम रूप दिया जाएगा, लेकिन सवाल उठता है कि गहलोत सरकार के वरिष्ठतम सदस्यों में से एक विश्वेंद्र सिंह इन तमाम बंदिशों के बावजूद क्या गहलोत का मैंडेट पर्यटन निगम में भी लागू कर पाएंगे..? बहर हाल जो भी हो लेकिन इतना तय है की विश्वेंद्र सिंह एक सशक्त मंत्री और राजनेता के तौर पर अपनी पहचान रखते हैं वो इतनी आसानी से पर्यटन निगम के अफसरों को 'ब्लैक डील' करने नहीं देंगे।
 

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