VIDEO: राजस्थान के राजनीतिक संकट में एक गंभीर मोड़, अब आर-पार के मूड में सचिन पायलट!

VIDEO: राजस्थान के राजनीतिक संकट में एक गंभीर मोड़, अब आर-पार के मूड में सचिन पायलट!

जयपुर: राजस्थान के राजनीतिक संकट में एक गंभीर मोड़ सामने आया गया! अब आर-पार के मूड में सचिन पायलट नजर आ रहे हैं! अब पायलट के सब्र का बांध टूटने लगा. पिछले 11 महीनों से पायलट और उनके समर्थक विधायक इंतजार करते-करते अब थक गए हैं. अजय माकन द्वारा बार-बार दिए गए आश्वासनों का भी कोई मतलब नहीं रहा. हालात की गंभीरता को देखते हुए शायद कमलनाथ ने भी मध्यस्थता करने से इनकार किया. अब पिछले एक सप्ताह के दौरान पायलट ने आलाकमान को दो टूक 'मैसेज' दिया. सोनिया-राहुल-प्रियंका को दो टूक मैसेज दिया. अब और इंतजार नहीं कर सकने का मैसेज दिया. इस पर आलाकमान की तरफ से पायलट को एक और आश्वासन मिला. अगले 10-15 दिनों में पंजाब संकट के समाधान के बाद राजस्थान का मामला 'टेक अप' करने का आश्वासन दिया. इस पर पायलट ने भी सिद्धांतत: सहमति जताई, लेकिन इसके साथ ही आलाकमान को दो टूक मैसेज भी दिया. यदि इस बार भी  आश्वासन नहीं पूरा हुआ, तो फिर वे अपना फैसला लेने के लिए स्वतंत्र होंगे. पायलट के इस CLEAR STAND के बाद अब आलाकमान पशोपेश में हैं. 

आलाकमान और गहलोत के बीच पायलट कैम्प के लोगों को मंत्री बनाने पर सहमति ना हो पाने पर क्या सचमुच पायलट और उनके समर्थक छोड़ देंगे कांग्रेस ? क्योंकि इधर इस बार गहलोत ने भी एक FIRM STAND ले लिया है. आलाकमान और गहलोत के बीच 'संवाद' की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अब पायलट कैम्प के चार-पांच लोगों के मंत्री बनने की संभावनाएं बहुत क्षीण है. क्योंकि जयपुर में गहलोत कैम्प अपना आकलन कर चुका है. केवल पायलट कैम्प के लोगों को मंत्री बनाने पर 102 समर्थक विधायकों में बगावत हो सकती है और ऐसी स्थिति में सरकार के अस्तित्व को चुनौती मिल सकती है. इसलिए अब आलाकमान और गहलोत के सामने मोटे तौर पर दो ही विकल्प है? या तो फिलहाल टाल दें मंत्रिमंडल विस्तार का सारा काम ? या फिर पायलट कैम्प के चार-पांच मंत्री बनाकर खोल दें दूसरे कांग्रेसी विधायकों की बगावत और सरकार गिरने का रास्ता ? शायद इतना बड़ा रिस्क उठाने की स्थिति में आज सोनिया-राहुल-प्रियंका भी नहीं है. अब ऐसे हालात में आखिर कैसे होगा राजस्थान के मौजूदा संकट का हल ? 

इस सारे प्रकरण पर आलाकमान से जुड़े एक सूत्र ने  एक गंभीर टिप्पणी की. कहा-'राजस्थान का संकट सचमुच पंजाब के संकट से भी ज्यादा बड़ा है, क्योंकि जयपुर में गहलोत का स्टैंड है चंडीगढ़ में कैप्टन अमरिंदर सिंह के स्टैंड से भी ज्यादा कड़ा है. अब इन सारे हालात में उठता है एक अहम सवाल ? यदि पायलट और उनके समर्थकों ने एक-दो महीने बाद छोड़ दी कांग्रेस ? तो फिर आखिर कहां जाएंगे ये लोग? अलबत्ता मौजूदा हालात में पायलट के भाजपा ज्वॉइन करने की संभावना बहुत कम है, लेकिन भाजपा के अलावा पायलट और उनके समर्थकों के सामने कोई दूसरा बड़ा विकल्प भी नहीं है. 

उधर अमित शाह के यहां पायलट के लिए काफी समय से 'रेड कारपेट' बिछा है. अब इस बारे में खुद पायलट को ही फैसला करना है. क्या पायलट अपने दो पुराने मित्रों ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद की तरह पकड़ेंगे भाजपा की राह ?  या फिर एक स्वतंत्र पार्टी या तीसरे मोर्चे का करेंगे गठन?  अलबत्ता तीसरे मोर्चे के गठन की प्रक्रिया बहुत लंबी है, तो फिर ऐसे में पार्टी छोड़ने की स्थिति में आखिर तत्काल कहां जाएंगे पायलट और उनके समर्थक ? ऐसे में पायलट कैम्प से जुड़े एक सूत्र ने संकेत देते हुए कहा कि मौजूदा अपमान और उपेक्षा सहने के बजाय अपना एक अलग स्वतंत्र गुट बनाना ज्यादा बेहतर होगा और अगले विधानसभा चुनाव में 15-20 सीटें जीतकर 'किंगमेकर' की भूमिका में रहना ज्यादा उचित होगा, लेकिन इन सारी संभावनाओं के बावजूद पायलट कैम्प के लिए कांग्रेस छोड़ने का फैसला करना बेहद कठिन होगा. इसलिए अब अगले तीन-चार हफ्तों का इंतजार करिए.

...वरिष्ठ पत्रकार योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

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