गौशाला में जरा सी चूक ने 62 गायों को सुलाया मौत की नींद

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/18 07:16

बीकानेर: जिले के श्री डूंगरगढ़ के दुलचासर गांव की गौशाला में जरा सी चूक ने 62 गायों को मौत की नींद सुला दिया. हालांकि डेढ़ सौ से अधिक गाय बीमार भी हुई लेकिन समय रहते उनका उपचार किए जाने से उनकी जान बच गई है लेकिन फिर भी सवाल उठता है कि आखिर चारे में ऐसा क्या था कि इतनी बड़ी संख्या में गाय काल का ग्रास बन गई. क्या श्री गौपाल गौ शाला प्रबंधन इसके लिए जिम्मेदार था.  

62 गायों की मौत हो गई और 150 से ज्यादा गायें अभी भी तडफ़ड़ा रही
जिले के दुलचासर गांव में श्रीगोपाल गौशाला विकास समिति द्वारा संचालित गौशाला में बीते चौबीस घंटों के दौरान एक के बाद एक 62 गायों की मौत हो गई और 150 से ज्यादा गायें अभी भी तडफ़ड़ा रही हैं. हालांकि गायों की मौत के असली कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है, प्रथम दृष्टया पता चला है कि गौशाला में सोमवार की डाले गये ज्वार के चारे में किटनाशक ग्रस्त था, यही चारा बिना धोए गायों को डाल दिया गया और इसके सेवन से 62 गायों की मौत हो गई. इस मामले में गौशाला प्रबंधन की लापरवाही भी सामने आई है.  बड़ी तादाद में गायों की मौत के इस मामले में गौशाला प्रबंधन की लापरवाही की बात भी कही जा रही है. मौके पर पहुंचे पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चारें के सैंपल जांच के लिये भिजवाये है. मृत गायों के शवों का पोस्टमार्टम करवा कर उन्हे विधिवत रूप से रोही में दफना दिया गया है. 

गायों की मौत के बाद अलर्ट मोड़ में आया प्रशासनिक तंत्र 
जानकारी के अनुसार बड़ी तादाद में गायों की मौत के बाद अलर्ट मोड़ में आये प्रशासनिक तंत्र की सूचना के बाद शासन प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी मंगलवार सुबह गौशाला पहुंच गये. एसपी प्रदीप मोहन शर्मा ने बताया कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजकुमार चौधरी को भी मौके पर भेजा गया है. 

मृतकों में गायों के साथ बछड़े भी शामिल 
इससे पहले वेटरनरी यूनिवर्सिटी से भी पशु चिकित्सकों की टीम पहले ही मौके पर पहुंच गई थी गौशाला में करीब 200 से ज्यादा गायें हैं, इसलिए चिकित्सक बाकी गायों की भी जांच कर रहे हैं कि उन्होंने तो यह चारा नहीं खाया. मृतकों में गायों के साथ बछड़े भी शामिल हैं. स्थानीय निवासियों ने भी घटना पर दुःख जताया है. साथ ही गौशाला प्रबंधन पर भी लापरवाही को लेकर सवाल उठाए है. 

....बीकानेर से लक्ष्मण राघव की रिपोर्ट

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