हनुमान जी की एक ऐसी मूर्ति जहां चिमटा मारने से देते हैं दर्शन

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/19 02:44

चित्रकूट: रामनगरी चित्रकूट से लगभग 25 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण पर स्थित शरभंग आश्रम है. यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है लेकिन दस्यु प्रभावित क्षेत्र होने के कारण कम लोग यहां पहुंच पाते हैं. इस आश्रम में त्रेतायुग की हनुमान जी की मूर्ति है,जो अहिरावण नामक राक्षक को अपने पैरों के नीचे दबाए हुए हैं. वहां के पुजारी प0 फूलचन्द्र पयासी ने बताया कि यहां पर साक्षात हनुमान विराजमान हैं, और चिमटा मारने से खड़े हो जाते हैं. 

शरभंग ऋषि को दिए थे दर्शन
उन्होंने बताया कि वनवास काल के दौरान जब श्री राम शरभंग ऋषि को दर्शन देने हेतु यहां आए थे तब हनुमान जी को द्वारपाल के रूप में स्थापित किया था. अद्भुत-अकल्पनीय यह हनुमान जी की मूर्ति से राजा सुहावल प्रभावित होकर यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया, और जीर्ण हो चुका त्रेतायुग के मंदिर से नये मंदिर में हनुमान जी को स्थापित करा दिया. 

चोरों को किया था अंधा
वहां के पुजारी ने बताया कि एक बार पुराने हनुमान जी के मंदिर से उनके स्वर्ण के मुकुट व गहनों को चोरों ने चुरा लिया तब हनुमान जी के भक्त संत ने हनुमान जी को तीन चिमटा मारा और कहा कि आपके रहते हुए चोरी हो गयी, तब हनुमान ने उन चोरों को अंधा करके पुनः वापस बुलाया और चोरों ने चुराए हुए माल को वापस कर दिया. पुजारी ने बताया कि आज भी हनुमान जी के सच्चे सेवक चिमटा मारकर प्रत्यक्ष दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. 

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