राजस्थान में एक मंदिर ऐसा भी जहां सख्ती से होती है स्वच्छ भारत अभियान की पालना

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/22 09:50

उदयपुर: जिले की झाड़ोल तहसील में अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा केलेश्वर महादेव मन्दिर जहां के महन्त द्वारा श्रद्धालुओं को नियमों की काफी सख्ती से पालना करवाई जाती है. जिससे यहां आने वाले दर्शनार्थी सहित पर्यटक तक परिसर सहित आस पास के क्षेत्र में गन्दगी नही कर सकते. 

पहाड़ियों के बीच बसा है मंदिर: 
उदयपुर शहर से लगभग तीस किलोमीटर दूर झाड़ोल तहसील में अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा है. भगवान श्री केलेश्वर महादेव का मंदिर चारो तरफ हरी भरी पहाड़ियों के बीच बसे इस मंदिर के आस पास के क्षेत्र को देखते ही आंखों को सुकून मिलता है. झाड़ोल से लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर बसे मन्दिर के पीछे की ओर एक झरना बहता है जो कि लगभग सौ फीट से अधिक ऊंचाई से गिरता है. वही पास में ही छोटे छोटे एनीकट बने हुए है. झरने की वजह से इस परिसर का वातावरण सुरम्य हो जाता है. इस मन्दिर की मुख्य बात यह है की मन्दिर के महन्त श्री चेतननाथ ने पिछले चार सालों में इस मन्दिर को काफी विकसित किया है. यह मन्दिर क्षेत्र का पहला मंदिर होगा जहाँ आने वाले श्रद्धालु मंदिर परिसर ही नही बल्कि यहाँ से दो किलोमीटर के क्षेत्र में कचरा नही डाल सकते. इस मन्दिर में पिछले चार साल से रह रहे महंत श्री चेतन नाथ मूलतः दिल्ली से है. घने जंगल के बीच बसे इस मन्दिर में पिछले चार सालों से अकेले रह रहे है. इस परिसर में प्रवेश करने से पहले महंत श्रद्धालुओं को नियम पालन करने के लिए सख्त निर्देश देते है. 

मंदिर परिसर में नशा करना भी मना: 
इस मन्दिर में कोई श्रद्धालु कचरा नहीं कर सकता, न ही नशा आदि कर सकता है. यहां तक कि नशा करने के बाद व्यक्ति को इस मंदिर के आस पास भी फटकने नही दिया जाता. घने जंगल मे बसे होने के कारण यहाँ पेंथर सहित अन्य जंगली जानवर निवास करते है परंतु महंत के बनाये वातावरण के कारण ये किसी को नुकसान नही पहुंचाते. वहीं श्रद्धालुओं को भी सख्त निर्देश दे रखे है की वे जंगली जानवरों के साथ छेड़छाड़ न करे. इस परिसर में ऐसा वातावरण बना रखा है कि यहां पिकनिक मनाने आने वाले युवाओं के साथ अगर लड़कियां हो तो वे अपने आप को यहां सुरक्षित महसूस करती है, वहीं स्कूल से बंक करके आने वाले विद्यार्थियों को परिसर में प्रवेश ही नही करने दिया जाता. पास के झरना व एनीकट होने के कारण बारिश के दिनों में भीड़ रहती है उसके बावजूद यहाँ के नियमों को तोड़ने की किसी मे हिम्मत नही होती. शाम को छः बजे बाद झरने के पास जाने भी नही दिया जाता. महन्त चेतन नाथ ने पिछले चार वर्षों में मन्दिर परिसर में जन सहयोग से गार्डन विकसित किया वही पर्यटकों के बैठने के लिए जगह जगह बेंचे लगाई. तीन छोटे छोटे एनीकट बनवाये,वही परिसर में सैकड़ों पौधे भी रोपे. परिसर में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पेयजल हेतु आर ओ लगा रखा है वही ठहरने व खाना बनाने आदि की व्यवस्था भी कर रखी है.

पर्यटकों व श्रद्धालुओं की लगती है भीड़: 
हर वर्ष वैशाख, श्रावण माह सहित पूरे मानसून के दौरान यहाँ पर्यटकों व श्रद्धालुओ की भीड़ रहती है. मन्दिर में रोजाना कई यूथ पिकनिक मनाने आते है परन्तु महन्त श्री चेतन नाथ जी के नियमो को तोड़ने की आज दिन तक किसी ने हिम्मत नही की. वहीं आस-पास के ग्रामीण भी इसे एक मिसाल के रूप में अपनाते है. महन्त यहां आने वाले लोगो को ये नियम मन्दिर परिसर के साथ अपने जीवन मे अपनाने के लिए भी कहते है. इसीलिए यह पूरे क्षेत्र में इकलौता मंदिर होगा जहाँ पर स्वच्छ भारत अभियान की सख्ती से पालना होती है. 

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