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VIDEO: सीएस डीबी गुप्ता का एक साल पूरा, कैबिनेट और ब्यूरोक्रेसी में सेतु बनाने का किया काम 

VIDEO: सीएस डीबी गुप्ता का एक साल पूरा, कैबिनेट और ब्यूरोक्रेसी में सेतु बनाने का किया काम 

जयपुर। मुख्य सचिव डीबी गुप्ता को सीएस बने 1 वर्ष पूरा हो गया है। इस दौरान चाहे राजे सरकार हो या गहलोत सरकार सीएस इफेक्टिव गवर्नेंस के अपने मैंडेट पर खरे उतरे हैं। इस मौके पर सीएस ने कहा कि उन्होंने दो-दो चुनाव के दौरान विकास के काम में बाधा नहीं आने की मंशा को पूरा करने की कोशिश की है और कैबिनेट और ब्यूरोक्रेसी में सेतु बनाने का प्रयास किया है। अब वे आम जनता के लिए इफेक्टिव सर्विस डिलीवरी पर खास फोकस करेंगे। खास रिपोर्ट:

1 मई 2018 को प्रशासनिक मुखिया का पद संभालने के साथ ही मुख्य सचिव डीडी गुप्ता ने पॉजिटिव मंशा के साथ कई इफेक्टिव निर्णय किये।

ये हैं खास निर्णय:

मौजूदा गहलोत सरकार के इन निर्णयों में सीेएस की छाप:
1.
किसान ऋण माफी योजना-इसका पूरा प्रारूप सीएस की मॉनिटरिंग में बनाया गया। यहां तक कि माफी का आदेश भी डीबी गुप्ता के हस्ताक्षर से जारी किया गया। 
2. न्यायिक सेवा में आयु सीमा में छूट का अनुमोदन-35 से 40 वर्ष हुई आयु सीमा। 
3. निःशक्तजनों को 4 फीसदी आरक्षण को मंजूरी। 
4. जिला न्यायालयों में लिपिकवर्गीय स्थापन नियम 1986  में संशोधन करके दी बड़ी राहत-स्टेनो में नहीं मिल रहे कर्मी, अतः दी छूट
5. जिला कोर्ट लिपिकवर्गीय में 2 वर्ष परीक्षा न हुई तो मिलेगी अधिकतम आयु सीमा में छूट-अधिकतम आयु सीमा के 3 वर्ष तक अभ्यर्थी परीक्षा दे सकता है। अगले 3 वर्ष तक वह परीक्षा के लिए योग्य रहेगा।
6. राज. जिला न्यायालय लिपिकवर्गीय स्थापन नियम 1986  संशोधित करके दी छूट-कोर्ट आदेश से विभागीय परीक्षा नियम किया समाप्त, 2 से ज्यादा सन्तान होने पर इस संवर्ग में रुकता है प्रमोशन। 5 वर्ष तक रुकता था प्रमोशन अब 3 वर्ष में हो सकेंगे। 
7. नई आबकारी नीति को सर्क्यूलेशन के जरिये गहलोत कैबिनेट ने दी मंजूरी। 
8. राजकीय दस्तावेजों में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का लोगो हटाने का निर्णय। 
9. पब्लिक व सोशल अकाउंटिबिलिटी बिल के प्रारूप को करवाया तैयार-इस बिल के चलते अधिकारियों को काम रोकने और कार्रवाई न करने का बताना होगा कारण। तय समय में होगी कार्रवाई तय। 
10. नई वादकरण नीति को सर्क्यूलेशन के जरिये अनुमोदन। 

अपने 1 वर्ष के कार्यकाल के बारे में उन्होंने कहा कि यह मंशा थी कि डेवलपमेंट के कामों में गतिरोध ना आने दें और वही कोशिश की गई। स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए भी इन्हीं बातों का ध्यान रखा गया। मुख्य सचिव ने कहा कि रेगुलरली प्लानिंग की गई और उसमें यदि 2 विभागों में कॉर्डिनेशन की कमी देखी तो उसमें निर्णय किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरान हुए दो चुनावों में कानून व्यवस्था को लेकर कोई शिकायत नहीं आई।

अब ये रहेंगी चुनौतियां:
—आचार संहिता समाप्ति के बाद सरकारी मशीनरी को हरकत में लाते हुए सारे किए गए निर्णय को जमीनी धरातल पर लाने की अहम चुनौती है
—इसमें सबसे खास है कि जिन योजनाओं की उन्होंने बजट की स्वीकृति दी है उनकी जमीनी क्रियान्विति किस रूप में किया जाए। 
—ब्यूरोक्रेसी के तालमेल के साथ राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं को क्रियांवित करना
—इंफ्रास्ट्रक्चर के काम को मजबूती देना 
—वर्किंग एफिशिएंसी के साथ  फाइल डिस्पोजल
—रिफाइनरी प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाना
—मेट्रो के काम को तेजी से पूरा करवाना और दूसरे चरण का काम शुरू करवाना

गुप्ता ने कहा कि सरकार की नीतियों का लाभ त्वरित गति से जनता तक पहुंचे यही सीएस के काम का उद्देश्य है। इस काम में बाधा नहीं आए और ब्यूरोक्रेटिक कोआर्डिनेशन की कमी से रुकावट ना आए इसी आधार पर अहम काम किया। इस दौरान कैबिनेट और ब्यूरोक्रेसी में सेतु बनाने की भी कोशिश की। इफेक्टिव गवर्नेंस के मेंडेट पर आगे बढ़ने के लिए अब उन्हें अपने समन्वय के अपने कौशल को और आगे ले जाना होगा अपनी सौम्य छवि के चलते तालमेल के साथ काम करते हुए जनता तक सर्विस डिलीवरी इफेक्टिव बनाना पर उनका खास फोकस रहेगा।

... संवाददाता ऋतुराज शर्मा की रिपोर्ट

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