जाने भारत की रहस्यमयी नदियों के बारे में 

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/07/30 17:42

नई दिल्ली। भारत के आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास में प्राचीनकाल से ही नदियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सिन्धु और गंगा नदियों की घाटियों में ही विश्व की प्राचीन सभ्यताओं- सिन्धु घाटी तथा आर्य सभ्यता की शुरुआत हुई। वर्मान समय में भी देश की सर्वाधिक जनसंख्या और कृषि का केंद्र नदी घाटी क्षेत्रों में ही पाया जाता है। हमारे देश में कई ऐसी नदियां है जिनमें डूबकी लगाने मात्र से ही पाप धूल जाते है। भारत में सबसे बड़ी और सबसे पवित्र गंगा नदी को माना जाता है। पुराणों के अनुसार गंगा का पृथ्वी पर आगमन स्वर्ग से हुआ है। वहीं यमुना और सरस्वती नदी के बारे में कथा है कि एक श्राप के कारण इनको देवलोक से पृथ्वी पर नदी के रुप में आना पड़ा।  लेकिन देश में कुछ नदियां और झीलें ऐसी भी है जिनकी कहानी अजब-गजब है। कथाओं के अनुसार इन नदियों की उत्पत्ति आंसुओं और मूत्र से हुई है। आज हम आपको कुछ ऐसी ही नदियों और झीलों के बारे में बताने जा रहे है।

तमस या टोंस नदी: गढ़वाल, उत्तराखंड 
उत्तराखंड की लोककथाओं के अनुसार महाभारत काल में बभ्रुवाहन पाताल लोक का राजा था। बभ्रुवाहन कौरवों की तरफ से युद्ध में शामिल होना चाहता था, लेकिन श्रीकृष्ण ने उसे रोके रखा था। महाभारत ते युद्ध में जब-जब कौरवों की हार होती थी तब-तब बभ्रुवाहन रोता था। उसके रोने से टोंस नदी का निर्णा हो गया। इस नदीं के आंसूओं से निर्मित होने के कारण लोग टोंस नदी का पानी नहीं पीते है।

रावण पोखरा देवघर, झारखंड
कथाओं के अनुसार, एक बार रावण ने भगवान शिव से लंका चलने की जिद्द की, जिसे शिवजी ने मान लिया और उसके साथ शिवलिंग रूप में चल दिए। इसके साथ ही शिवजी ने रावण से कहा कि, "यदि लंका पहुंचने से पूर्व शिवलिंग को एक बार भूमि पर रख दोगे तो फिर उसे उठा नहीं सकोगे। अपने अहंकार में रावण शिवलिंग को लेकर चल दिया। इसे देखकर भगवान विष्णु ने गंगा से रावण के पेट में जाने के लिए कहा, जिससे रावण को लघुशंका आ गई। काफी देर तक लघुशंका रोकने का बाद भी जब रावण से नहीं रहा गया, तो उसने शिवलिंग को एक बालक को थमाकर लघुशंका करने चला गया। रावण जब लघुशंका कर के लौटा तो देखा बालक ने शिवलिंग भूमि पर रख दिया है। जिससे शिवलिंग उसी स्थान पर स्थापित हो गया और रावण शिवलिंग लंका नहीं ले जा सका। यही शिवलिंग आज बैजनाथ धाम के नाम से जाना जाता है और यहां एक तालाब है, जिसका निर्माण रावण के मूत्र से हुआ है। ऐसा माना जाता है कि इस तालाब को स्थानीय लोग रावण पोखर कहते हैं। लोग इस पोखर में ना तो स्नान करते हैं ना इसके जल से पूजा-पाठ करते है।

सरयू नदी: उत्तर प्रदेश 
आनंद रामायण के यात्रा कांड के अनुसार प्राचीन काल में शंकासुर दैत्य ने देवताओं से वेदों को चुराकर समुद्र में डाल दिया और स्वयं भी वहीं छिप गया। तब भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण कर शंकासुर का वध किया था और वेद ब्रह्मा को सौंप दिये। उस समय हर्ष के कारण भगवान विष्णु की आंखों से प्रेम के आंसू टपक गए और वह आंसू सरयू नदी कहलाया। भगवान विष्णु के आंसू से उत्पन्न होने के कारण सरयू को पवित्र नदी माना जाता है।

कटासराज सरोवर: पाकिस्तान
वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब में स्थित कटस राज मंदिर हिंदुओं के लिए एक तीर्थ स्थल माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवी सती ने आत्मदाह किया, तब भगवान शंकर की आंखों से दो बूंद आंसू टपक गए थे। एक बूंद आंसू से कटास सरोवर निर्मित हो गया जो अमृत कुण्ड के नाम से प्रसिद्ध है। दूसरा आंसू अजमेर में टपका, जहां पुष्कर तीर्थस्थल बना है।

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