VIDEO: मुख्यमंत्री गहलोत का ऐतिहासिक फैसला, अस्मत मांगने वाला पुलिस अधिकारी कैलाश बोहरा बर्खास्त

VIDEO: मुख्यमंत्री गहलोत का ऐतिहासिक फैसला, अस्मत मांगने वाला पुलिस अधिकारी कैलाश बोहरा बर्खास्त

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संवेदनशील फैसला करते हुए देश मे बड़ी नजीर पेश की है. मुख्यमंत्री गहलोत ने रिश्वत के बदले अस्मत मांगने वाले पुलिस अधिकारी कैलाश बोहरा को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त करने का फैसला किया है. विपक्ष द्वारा आज विधानसभा के अंदर व बाहर हंगामा करने के बाद यह कदम उठाया. संसदीय कार्यमंत्री शांन्ति धारीवाल ने आज सदन में सरकार के तरफ से बयान जारी करके दागी पुलिस अफसर की बर्खास्तगी का फैसला सुनाया. सीएम गहलोत के इस फैसले की विपक्ष ने भी सराहना की है.

कैलाश बोहरा का मामला विधानसभा में गूंजा:

रिश्वत के बदले अस्मत मांगने वाले पुलिस अधिकारी कैलाश बोहरा का मामला आज विधानसभा में गूंजा. इस मामले को लेकर विपक्ष ने सदन के अंदर और बाहर सरकार के खिलाफ जमकर हमला बोला. इसके बाद सरकार ने अस्मतखोर बोहरा को सेवा से बर्खास्त कर दिया. संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने सदन में बताया कि जांच के बदले अस्मत मांगने पुलिस अधिकारी को तमाम कानूनी राय लेने के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. धारीवाल ने कहा कि यह रेयर ऑफ द रेयरेस्ट केस है और गिरफ्तारी के अगले ही दिन अधिकारी की बर्खास्तगी बताती है कि गहलोत सरकार कितनी संवेदनशील है.

उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने उठाया सदन में यह मामला:

इससे पहले शून्यकाल में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने सदन में यह मामला उठाते हुए कहा कि एक अधिकारी महिला से 10-10 हजार रुपए रिश्वत लेता है और फिर उसकी अस्मत मांगता है. खेडली की स्याही सूखी नहीं थी, एक बार फिर पुलिस पर इस तरह का मामला सामने आया है. अगर पुलिस में इस तरह के काम होंगे तो परिवादी कहां जाएगा. राठौड़ ने कहा कि कैलाश बोहरा बहुत ख्यातिनाम अधिकारी हैं. सीबीआई में इनकी जांच चल रही है, न्यायालय में मामला विचाराधीन है. ऐसे में उन्हें इस तरह का महत्वपूर्ण पद क्यों दिया गया. राठौड़ ने कहा कि जब तक थाने में सीसीटीवी कैमरे नहीं होंगे तब तक इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी. 

पक्ष और विपक्ष का सवाल नहीं:

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा यह पक्ष और विपक्ष का सवाल नहीं है. जिस प्रकार की घटना घटी है और थाने में घटी है. सदन में चर्चा होने के बाद भी इस पर कोई एक्शन नहीं होगा तो आपको और हमको जनता माफ नहीं करेगी. मंत्री की ओर से इस पर सदन को आश्वासन मिलना चाहिए. विपक्ष की मांग पर स्पीकर ने संसदीय कार्यमंत्री की तरफ इशारा किया. मगर धारीवाल ने कहा कि आपने जवाब देने से मना कर रखा है. इसके बाद अध्यक्ष ने व्यवस्था देते हुए कहा कि इस मामले में सरकार की ओर से 2 घंटे बाद सदन में जवाब दिया जाएगा.

शांति धारीवाल ने कहा कि यह घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण:

निर्धारित समय के अनुसार मामले में जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि यह घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, जो केवल पुलिस पर ही नहीं सरकार और पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करती है. खेड़ली में भी जिस तरह से गत दिनों घटना हुई वह भी एक शर्मसार थी. धारीवाल ने कहा कि जहां तक जयपुर में हुई पुलिस अधिकारी की इस घटना के मामले में बताना चाह रहा हूं महिला ने तीन एफ आई आर दर्ज करवाई थी, उनकी जांच पुलिस अधिकारी बोहरा की ओर से जांच की जा रही थी, पुलिस अधिकारी ने पहले जांच के बदले पैसे मांगे और फिर जांच के बदले अस्मत मांगी. अधिकारी को पहले तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था, लेकिन अब तमाम कानूनी राय लेने के बाद उसे सेवा से बर्खास्त किया गया है. इस पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि कुछ लोगों के कारण पुलिस की छवि खराब हो रही है ऐसे 10-15 लोग हैं जिनके कारण पूरी पुलिस पर अच्छे काम करने वाले लोगों पर भी सवालिया निशान खड़े होते हैं? ऐसे में सरकारी व्यवस्था करें कि जो भी दागी अफसर हो उसको भी फील्ड से हटाया जाए और भविष्य में इस तरह की घटना हो तो तुरंत उनके खिलाफ सरकार एक्शन ले. कटारिया के सवाल पर जब मंत्री जवाब नहीं दे पाए तो विपक्ष के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया. धारीवाल ने कहा कि कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं जिनके प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होते हैं ऐसे में उन्हें फील्ड से नहीं हटाया जा सकता सरकार आवश्यक कार्रवाई करेगी.

मुख्यमंत्री गहलोत ने पेश कर दिया देश में पहला उदाहरण:

सदन में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने सरकार से यह भी आश्वासन चाहा कि जो भी दागी अफसर है उनको फील्ड से हटाया जाए और साथ में इस बात की भी जांच की जाए की दागदार होने के बावजूद बोहरा को कैसे अहम पद पर पोस्टिंग दे दी गई. इस पर शांति धारीवाल ने कहा कि सरकार इस बात की जांच करा लेगी. पुलिस अधिकारी बोहरा को बर्खास्त करके मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देश में पहला उदाहरण पेश कर दिया है और साथ ही संकेत दे दिया है कि इस तरह की घटनाएं के लिए प्रदेश में कोई स्थान नहीं है.

...योगेश शर्मा के साथ नरेश शर्मा फर्स्ट इंडिया न्यूज जयपुर

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