बॉलीवुड में बदलते ट्रेंड के चलते बढ़ी अश्लीलता - रणजीत

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/05/20 11:18

जोधपुर: पहले के समय के बॉलीवुड और अब के समय के बॉलीवुड के ट्रेंड की बात करे तो काफी कुछ बदलाव देखने को मिला है, हालांकि में दूसरो की तो क्या खुद की तक फिल्में नहीं देख पाता, मगर हां शूटिंग होती है या फिर कहीं से सुनता हूं तो लगता है कि पहले के समय जो अभिनेता अभिनय करते थे चाहे वह कहानियों में हीरो,विलन या फिर सौतेली मां होती थी तो एक पारिवारिक फिल्म हुआ करती थी मगर अब वैसा बिल्कुल नही है. अब फिल्मों में गाली गलोच जैसे अश्लीलता ज्यादा हो गई है,यह कहना है बॉलीवुड के उस महान अभिनेता रणजीत का जिन्होंने 500 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर बॉलीवुड में ही नही बल्कि लोगों के दिलों में भी एक अनोखी छाप छोड़ी है. 

एक निजी शादी समारोह में शिरकत करने के लिए जोधपुर आए फिल्म अभिनेता रणजीत ने फर्स्ट इंडिया से खास बातचीत करते हुए कहा कि राजनीति में जाना एक मजाक नही है. इसके लिए एक व्यक्ति को काफी कुछ समझौते करने पड़ते है. मुझे भी कई बार राजनीति में आने के इशारे मिले थे मगर राजनीति का खेल हर आदमी नहीं खेल सकता है. उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में काफी ट्रेंड बदल चुका है. हमारे समय में फिल्मों की स्क्रिप्ट नहीं होती थी लेकिन जहां भी शूट करते थे तब भी शूटिंग जल्दी हो जाती तो प्रोड्यूसर लोग फोन पर ही गाना रिकॉर्ड करवा देते.

पहले के जमाने में फिल्मों में फैमिली ड्रामा होता था
उन्होंने कहा कि पहले के समय फिल्मों की कहानी वहीं होती थी जो फैमिली ड्रामा होते थे. पहले जब सेट पर जाते थे तो हंसी मजाक होती थी जितने भी सेट पर जो काम करने वाले होते थे वह एक फैमिली की तरह बन जाते थे लेकिन आजकल के जमाने में केवल बैलेंस शीट से मतलब होता है. इसलिए आजकल चार-पांच दिन फिल्म चलती है और उतर जाती है लेकिन उन दिनों में सिल्वर जुबली गोल्डन जुबली जैसे 100 से अधिक दिन तक फिल्म लगती थी. मैंने अपनी लाइफ में 500 से अधिक फिल्में मैं काम किया है लेकिन मुश्किल से 5 फिल्म देखी होगी. खुद के राजनीति में जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि राजनीति एक मजाक नहीं है राजनीतिक में बहुत कुछ समझौते करने पड़ते है। 

राजनीति का खेल हर आदमी का खेल नहीं 
अभिनेता रणजीत ने कहा कि जाने माने फिल्म अभिनेता और राजनीति में बरसो तक अनी सेवाएं देने वाले जब सुनील दत्त जिंदा थे तब उन्होंने मुझे बहुत प्यार और सम्मन दिया. यहां तक की उन्होंने मुझे एक दो बार राजनीति में आने के लिए इशारे भी दिऐ और कहा तुमने इतना काम किया है अब आपको देश के लिए भी काम करना चाहिए, लेकिन मैंने यही कहा कि जब मैरी घर पर भी नहीं चलती तो बाहर क्या चलेगी. इसलिए राजनीति का खेल हर आदमी का खेल नहीं है. एक वोट डालने वाला जब अपना वोट डालकर नेता चुनता है तो अपना हक समझता है कि किसी तरह की परेशानी जनता को होती है तो  नेता को चाहिए कि उससे मिले और उसकी समस्या का समाधान करे,लेकिन आजकल के नेता इलेक्शन के बाद मिलते ही कहां है. 

....शिवप्रकाश पुरोहित फर्स्ट इंडिया न्यूज जोधपुर

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