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राजस्थान में प्राणवायु 'ऑक्सीजन' का एडवांस प्लान ! कोरोना में बढ़ी डिमाण्ड पर राज्य सरकार अलर्ट

जयपुर: प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामलों के साथ ही एकाएक बढ़ी प्राणवायु ऑक्सीजन की जरूरत के प्रति राज्य सरकार अलर्ट मोड पर है. भविष्य की जरूरत और कोरोना महामारी को देखते हुए प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पताल और सोसायटी से जुडे़ कॉलेजों के अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन के लिए अलग-अलग तरह के ऑक्सीजन प्लांट लगाने की कवायद शुरू हो गई है. आइए आपको बताते है राजस्थान में कोरोना महामारी के बीच ऑक्सीजन का क्या है गणित और सरकार की कैसी है तैयारी....

गंभीर रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही: 
प्रदेश में हर दिन बढ़ते कोरोना मरीजों के बीच अब चिंता की बात ये है कि इसमें गंभीर रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. सरकारी आंकड़ों को देखते हो अगस्त की तुलना में सितम्बर में ऐसे मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी. नतीजन, ऑक्सीजन की डिमांड भी एकाएक बढ़ गई है. अब हालात ये हो गए है कि न केवल निजी अस्पतालों को बल्कि सरकार और चिकित्सा विभाग को भी ऑक्सीजन की पूर्ति के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है. हालांकि सरकार का दावा है कि अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन सिलेंडर्स की व्यवस्था है, लेकिन आगामी दिनों में बढ़ती दिक्कतों को देखते हुए गहलोत सरकार ने एडवांस प्लान पर काम शुरू कर दिया है. इसके लिए बकायदा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 65 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति जारी की है. जिसमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट और सोसायटी से जुडे़ कॉलेजों के अस्पतालों में जनरेशन प्लांट लगाए जाने है.  

(आखिर सरकार के एडवांस प्लान के पीछे की वजह क्या ?)

- राजस्थान में हर रोज 12000 ऑक्सीजन सिलेंडर्स की आपूर्ति किया जाना संभव है.

- जून माह तक इन 12000 ऑक्सीजन सिलेंडर्स में से 4200 सिलेंडर्स अस्पतालों में और शेष इंडस्ट्री में जा रहे थे.

- लेकिन अगस्त माह में A सिम्टोमेटी मरीजों में भी सांस की दिक्कतों के सामने आने लगे मामले.

- जैसे ही इस तरह के मरीजों की तादात अस्पताल में बढ़ी तो एकाएक ऑक्सीजन की डिमाण्ड में भी हुआ इजाफा.

- जुलाई माह में अस्पतालों की डिमांड बढ़कर 5500 और अगस्त-सितम्बर में यह बढ़कर 8000 तक पहुंच गई है.

- विभागीय अधिकारियों की माने तो मरीजों की हर दिन की बढ़ती संख्या को देखते हुए अक्टूबर के अंत तक यह डिमांड बढ़कर लगभग 12000 तक पहुंच जाएगी.

- ऐसे में अलर्ट मोड पर आई सरकार ने निजी ऑक्सीजन प्लांट के अधिग्रहण के साथ ही नए प्लांट लगाने की दिशा में भी काम शुरू कर दिया है.

(सरकार की ये है जिलों से लेकर मेडिकल कॉलेजों के लिए तैयारी):-

- वैसे तो सेन्ट्रलाइज्ड ऑक्सीजन सिस्टम विकसित करने के लिए सरकार पहले ही विचार बना रही थी. 

- लेकिन कोरोना महामारी के दौरान अगस्त सितम्बर में एकाएक ऑक्सीजन बैड की जरूरत बढ़ी तो इस दिशा में तेजी से काम शुरू किया गया है. 

- जिला अस्पतालों में जहां सेन्ट्रलाइज्ड पाइप लाइन डालने का काम किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर 14 कॉलेजों के लिए भी 65 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए है. 

- इस राशि से सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में 20 केएल क्षमता के लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट और सोसायटी से जुडे़ कॉलेजों के अस्पतालों में जनरेशन प्लांट लगाए जाने है. 

- जयपुर में चार, जोधपुर बीकानेर में 2-2 लगेंगे लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट, जबकि शेष मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में एक-एक लगेगा प्लांट. 

सरकार की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऑक्सीजन प्लांट को लगाने के लिए फर्मों को फीक्स टाइम दिया गया है. चिकित्सा शिक्षा सचिव वैभव गालरिया का कहना है कि पांच जगहों पर प्लांट इसी माह लगा दिए जाएंगे,जबकि शेष बची जगहों पर अक्टूबर माह तक ऑक्सीजन प्लांट लगेंगे. इसके बाद काफी हद तक ऑक्सीजन की दिक्कतों को दूर किया जा सकेगा.  

एसएमएस अस्पताल होगा ऑक्सीजन सिलेण्डर फ्री !

- प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल को लेकर सरकार का एक्शन प्लान

- एसएमएस अस्पताल में लगाए जाएंगे 20-20 KL क्षमता के दो लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट

- 20KL क्षमता के एक प्लांट से सामान्य परिस्थिति में एक हजार बैड को सप्लाई हो सकती है

- आमदिनों में एसएमएस में दो हजार से आसपास बैड पर मरीज होते है भर्ती

- ऐसे में दोनों प्लांट से काफी हद तक ऑक्सीजन की सप्लाई की डिमाण्ड होगी पूरी

- इसके साथ ही दो ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट हाल ही में हो चुके है अस्पताल में शुरू

- खुद चिकित्सा शिक्षा सचिव का दावा, जब अस्पताल में दोनों लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट हो जाएंगे शुरू

- तो काफी हद तक छोटे सिलेण्डर से ऑक्सीजन की निर्भरता होगी खत्म

- सिर्फ विशेष परिस्थिति के लिए ही मंगवाए जाएंगे ऑक्सीजन के छोटे सिलेण्डर

सरकार का दावा है कि अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन सिलेंडर्स की व्यवस्था है और आने वाले दिनों में बढ़ती डिमांड को देखते हुए हर तरह के विकल्प तैयार किए जा रहे हैं. हालांकि ऑक्सीजन प्लांट के लिए अक्टूबर अंत तक की डेडलाइन भी निर्धारित की गई है. लेकिन यदि इस टाइम लाइन के प्रति गंभीरता नहीं रखी गई तो हालात बिगडने में देरी नहीं लगेगी. क्योंकि जिस गति से गंभीर रोगियों की संख्या बढ़ रही है, उस हिसाब से अक्टूबर अंत या नवम्बर माह में सरकार के लिए बड़ी चुनौती देखी जा रही है. ऐसे में उम्मीद ये है कि सरकार की मंशा के अनुरूप फील्ड में काम होगा ताकि जरूरतमंद मरीजों का प्राणवायु ऑक्सीजन के लिए दर दर भटकना नहीं पड़े.  

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VIDEO: फ्लाइट्स में अब लौटने लगी रौनक ! नवरात्रि की शुरुआत में एयरपोर्ट पर बढ़ा यात्रीभार

जयपुर: जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर अब यात्रियों की रौनक पहले की तरह लौटने लगी है. पिछले 7 दिनों में जयपुर एयरपोर्ट पर औसत यात्रीभार में बढ़ोतरी देखी गई है. एक तरफ जहां फ्लाइट्स की संख्या बढ़ी है, वहीं साथ में यात्रीभार भी बढ़ रहा है. खास बात यह है कि सबसे ज्यादा रौनक नवरात्रि के बीते दो दिन में रही है. किन शहरों के लिए है ज्यादा यात्रीभार, कितने यात्री रोज कर रहे आवागमन. देखिए फर्स्ट इंडिया की ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

जयपुर एयरपोर्ट से रोज 28 फ्लाइट्स का हो रहा डिपार्चर:
कोरोना काल में 25 मई से फ्लाइट्स का संचालन शुरू हुआ था और अब 5 माह में पहली बार ऐसा लगने लगा है जैसे हवाई यात्रा की रौनक वापस लौट रही हो. अब जयपुर एयरपोर्ट से रोजाना संचालित होने वाली फ्लाइट्स की कुल संख्या में बढ़ोतरी दिख रही है. दरअसल सितंबर माह तक कोरोना पीक पर था और इस वजह से यात्रियों में फ्लाइट्स में सफर करने को लेकर डर देखा जा रहा था. अब कोरोना के एक्टिव केसेज की संख्या में लगातार कमी देखी जा रही है. साथ ही देशभर में नए केसेज मिलने की दर भी गिरी है. इस तरह अब हवाई यात्रियों के लिए थोड़ी राहत मिली है. इसके साथ ही देश में अब त्यौहारी सीजन शुरू हो चुका है. नवरात्रि के इस पर्व के साथ ही लोगों की व्यस्तता बढ़ रही है. जयपुर सहित पूरे प्रदेश में पर्यटन सीजन भी धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में यात्रीभार में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. आपको बता दें कि इससे पहले सितंबर माह में जयपुर एयरपोर्ट से रोज औसतन 26 फ्लाइट्स का संचालन हो रहा था और इस माह अब राेज औसतन 28 फ्लाइट संचालित हो रही हैं. सितंबर के मुकाबले औसत यात्रियों की संख्या भी 4350 से बढ़कर 4850 तक जा पहुंची है. जयपुर एयरपोर्ट से पिछले सप्ताह में कुल 382 फ्लाइट्स का आवागमन हुआ है, जिनके जरिए कुल 33933 यात्रियों ने यात्रा की है.

पिछला सप्ताह कैसा रहा जयपुर एयरपोर्ट पर ?
दिनांक : आगमन : प्रस्थान : कुल यात्री : कुल फ्लाइट
12 अक्टूबर : 2171 यात्री : 2567 यात्री : 4738 यात्री : 56 फ्लाइट
13 अक्टूबर : 1973 यात्री : 2116 यात्री : 4089 यात्री : 56 फ्लाइट
14 अक्टूबर : 2286 यात्री : 1979 यात्री : 4265 यात्री : 46 फ्लाइट
15 अक्टूबर : 2565 यात्री : 2618 यात्री : 5183 यात्री : 58 फ्लाइट
16 अक्टूबर : 2344 यात्री : 2018 यात्री : 4362 यात्री : 50 फ्लाइट
17 अक्टूबर : 3142 यात्री : 2366 यात्री : 5508 यात्री : 60 फ्लाइट
18 अक्टूबर : 3602 यात्री : 2186 यात्री : 5788 यात्री : 56 फ्लाइट

मुम्बई और बेंगलूरु की फ्लाइट्स में यात्रीभार ज्यादा:
यहां यह जानना भी रोचक है कि जयपुर शहरवासी आखिर किन शहरों के लिए सबसे ज्यादा यात्रा करना पसंद कर रहे हैं. दरअसल मौजूदा समय में मुम्बई और कोलकाता सबसे ज्यादा डिमांड में हैं. दोनों ही शहरों के लिए रोज औसतन 5-5 फ्लाइट संचालित हो रही हैं. इसके अलावा बेंगलूरु, दिल्ली और हैदराबाद के लिए भी 4 से 5 फ्लाइट संचालित हो रही हैं. हालांकि सबसे ज्यादा यात्रीभार की बात करें तो मुम्बई और बेंगलूरु की फ्लाइट्स में यात्रीभार ज्यादा है. बड़े शहरों में सबसे कम फ्लाइट चेन्नई के लिए है, जहां के लिए मात्र 1 फ्लाइट ही चल रही है.

किस शहर के लिए रोज औसतन कितनी फ्लाइट ?
- मुम्बई, कोलकाता : रोज 5-5 फ्लाइट
- बेंगलूरु और दिल्ली : रोज 4 से 5 फ्लाइट
- हैदराबाद रोज 4 फ्लाइट
- पुणे, अहमदाबाद : 2-2 फ्लाइट

- इंडिगो 16 फ्लाइट का शेड्यूल : रोज औसतन 13-14 फ्लाइट चल रहीं
- एयर इंडिया 5 फ्लाइट का शेड्यूल : रोज औसतन 2 या 3 फ्लाइट चल रहीं
- स्पाइसजेट का 6 फ्लाइट का शेड्यूल, सभी चल रहीं
- एयर एशिया 5 का शेड्यूल : 2 से 3 चल रहीं
- गो एयर 3 फ्लाइट का शेड्यूल, सभी चल रहीं

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अब प्रदेश में पर्यटन सीजन शुरू हो चुका है और नवंबर माह में यह काफी अच्छा होगा. साथ ही दिवाली के मौके पर भी यात्रीभार में एक साथ बढ़ोतरी होगी. इस बीच 26 अक्टूबर से जयपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स का विंटर शेड्यूल लागू होगा. इसमें 4 से 6 नई फ्लाइट शुरू होने की संभावना है. कुलमिलाकर नवंबर माह के पहले सप्ताह से हवाई यात्रा की रौनक जगमग होने के आसार हैं.

...काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

प्रदेश में अब मिलावटखोरों की खैर नहीं, सीएम गहलोत ने आज उठाया बड़ा कदम, 26 अक्टूबर से चलेगा शुद्ध के लिए युद्ध अभियान

प्रदेश में अब मिलावटखोरों की खैर नहीं, सीएम गहलोत ने आज उठाया बड़ा कदम, 26 अक्टूबर से चलेगा शुद्ध के लिए युद्ध अभियान

जयपुर: प्रदेश में अब मिलावटखोरों की खैर नहीं रहेगी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज अपने आवास पर शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक में प्रदेश में 26 अक्टूबर से ’शुद्ध के लिये युद्ध’ अभियान चलाने का एलान कर दिया. अब पूरे प्रदेश में मिलावटखोरो की धरपकड़ होगी. सीएम गहलोत ने कहा है कि राजस्थान मिलावटखोरी से मुक्ति की दिशा में अलग पहचान बनाएगा.

प्रदेश में अब मिलावटखोरों की खैर नहीं:
-सीएम गहलोत ने आज उठाया बड़ा कदम
-26 अक्टूबर से चलेगा ’शुद्ध के लिये युद्ध’ अभियान
-दूध, दूध से बने पदार्थों, मिठाइयों, मसालों, घी, तेल में मिलावट बर्दाश्त नहीं
-खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई
-सभी जिलों में कलेक्टर के निर्देशन में अभियान चलेगा
-चिकित्सा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, गृह विभाग को जिम्मेदारी
-जिला कलेक्टरों को तुरन्त परिपत्र भेजने के निर्देश दिए
-दूध, घी, तेल, मिठाइयों, मसालों, ड्राई फ्रूट्स में मिलावट पर फोकस
 
शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चलाने का फैसला:
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चलाने का फैसला किया है. गहलोत ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे प्रदेश में मिलावटखोरी के खिलाफ 26 अक्टूबर से शुद्ध के लिये युद्ध अभियान चलाया जाए, जो त्यौहारी सीजन के दौरान नवंबर माह के अन्त तक चलेगा. राज्य-स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों का ग्रुप बनाकर अभियान का संचालन किया जाएगा. अभियान का फोकस दूध, घी, तेल, मिठाइयों, मसालों, ड्राई फ्रूट्स आदि खाद्य पदार्थों में मिलावट के साथ-साथ खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता तथा पैकेजिंग में मिस-ब्रांडिंग पर रहेगा. संदिग्ध पदार्थों के सैंपल की गुणवत्ता की लैब में तुरन्त जांच करवाकर मिलावटी सामान तैयार करने वाले तथा ऐसे पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. आवश्यकता होने पर एफआईआर भी दर्ज होगी.

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मिलावटखोरों पर कसा जाएगा पूरा शिकंजा:
इस बार मिलावटखोरों पर पूरा शिकंजा कसा जाएगा और सख्त कार्रवाई के लिए यदि आवश्यक हो तो कानून में समुचित संशोधन भी किया जाएगा. इतना ही नहीं सरकार ने संगठित मिलावटखोरों की जानकारी देने पर उचित इनाम देने का भी फैसला किया है और इनके नाम गुप्त रखे जाएंगे.  मुख्यमंत्री ने शुद्ध के लिये युद्ध अभियान की योजना बनाने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला-स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति बनाने के निर्देश दिए. यह समिति अभियान का क्रियान्वयन और माॅनिटरिंग भी करेगी. समिति में जिला पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), जिला रसद अधिकारी, वाणिज्यकर अधिकारी तथा डेयरी विभाग का प्रबंधक निदेशक या अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. समिति के निर्देशन में कलक्टर द्वारा नामित उप खण्ड अधिकारी अथवा विकास अधिकारी, तहसीलदार अथवा नायब तहसीलदार के नेतृत्व में एक कार्रवाई दल गठित होगा, जो मिलावटखोरों के खिलाफ मौके पर जाकर कार्रवाई करेगा. इस दल में खाद्य सुरक्षा निरीक्षक, बाट एवं मापतोल विभाग, पुलिस तथा डेयरी के अधिकारी भी रहेंगे. राज्य-स्तर पर अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित माॅनिटरिंग के लिए वरिष्ठ अधिकारियों का एक उप समूह गठित किया जाए. इस समूह में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा गृह विभागों के प्रमुख शासन सचिव एवं खाद्य एवं आपूर्ति, पशुपालन तथा डेयरी विभागों के शासन सचिव सहित अन्य अधिकारी शामिल होंगे.

26 अक्टूबर से चलेगा 'शुद्ध के लिये युद्ध' अभियान:
-जिला समिति बनाएगी अभियान की योजना
-समिति क्रियान्वयन और माॅनिटरिंग भी करेगी
-कलेक्टर की अध्यक्षता में जिलों में बनेगी कमेटी
-समिति में जिला पुलिस अधीक्षक, सीएमएचओ,
-जिला रसद अधिकारी, वाणिज्यकर अधिकारी तथा
-डेयरी विभाग का प्रबंधक निदेशक शामिल होंगे
-सैंपल की लैब में तुरन्त जांच करवाई जाएगी
-पुलिस एफआईआर दर्ज कर आपराधिक दण्डात्मक कार्रवाई होगी
-मिलावटखोरों की जानकारी देने पर उचित इनाम दिया जाएगा
-राज्य-स्तर पर अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कमेटी बनेगी

मुख्यमंत्री साफ कहा है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन इस अभियान की सफलता के लिए यह जरूरी है कि आम लोग भी जागरूक हों और शुद्ध के लिये युद्ध अभियान में सरकार का साथ दें.

जयपुर DCP ईस्ट राहुल जैन को मिली सफलता, 3 शातिर बदमाशों को नाकाबन्दी में दबोचा

 जयपुर DCP ईस्ट राहुल जैन को मिली सफलता, 3 शातिर बदमाशों को नाकाबन्दी में दबोचा

जयपुर: राजधानी जयपुर में बदमाशों को हथियार सप्लाई करने वाली गैंग के तीन बदमाशों को सोमवार को नाकाबंदी करके आदर्श नगर थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिए. पकड़े गए तीनों बदमाश अंकुर शर्मा, संजय कुमार व अभिषेक जैन अलवर स्थित बानसूर के रहने वाले है. पुलिस ने तीनों के कब्जे से दो पिस्टल, कारतूस व लग्जरी कार बरामद कर ली. अब पुलिस टीमें आरोपियों से हथियार खरीदने और जयपुर में सप्लाई करने के संबंध में पूछताछ कर रही है.

डीसीपी ईस्ट राहुल जैन बताया कि शहर में शनिवार को लूट की हुई दो घटनाएं और त्यौहारी सीजन के कारण जिले के मुख्य जगहों पर दिन के समय नाकाबंदी करवाई जा रही थी. जिसमें आदर्श नगर थाना पुलिस ने पिंक स्कवायर मॉल के पास नाकाबंदी लगाई थी. इस दौरान बाहर से आई लग्जरी कार को रुकवाकर चैक किया तो कार सवार तीनों युवक एक-दूसरे की तरफ देखने लगे. इस पर पुलिस टीम को शक हुआ तो तीनों को नीचे उतारकर चैक किया तो चालक अंकुर व आगे वाली शीट बैठे युवक के पास दो पिस्टल व पीछे बैठे युवक की जेब में कारतूस रखे मिल गए. उसके बाद टीम ने तीनों को पकड़कर थाने ले आई.

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- जहां पर पूछताछ में सामने आया कि तीनों बदमाश किसी अन्य गैंग के जरिए दिल्ली व यूपी से हथियार लेकर जयपुर और आस-पास के इलाके में बदमाशों को सप्लाई करते है. लग्जरी कार में चलते है. ताकि कहीं पर पुलिस को शक नही हो. अब आरोपियों से हथियार खरीदने वाली गैंग और जयपुर सप्लाई लेने वाले बदमाशों की बारे में पूछताछ की जा रही है.

- पूछताछ में ये भी बताया कि हथियार व कारतूस के तीनों अलग-अलग हिस्सों में करके के शर्ट के अंदर दबाकर बैठते है. ताकि नाकाबंदी के दौरान अगर कार पुलिस चैक करती है पकड़े नही जाए.

...फर्स्ट इंडिया के लिए सत्यनारायण शर्मा की रिपोर्ट

VIDEO: अफ्रीकी चीते बनेंगे राजस्थान की शान! दक्षिण अ​फ्रीका और नामीबिया से चीते लाने की तैयारी, केन्द्र सरकार की अनुमति मिलने का इंतजार

जयपुर: प्रदेश के जंगलात में चीते छलांग भरेंगे ऐसी उम्मीद जगी है. सभी के जेहन में एक ही सवाल है.क्या 70 साल बाद अब चीता बन सकता है राजस्थान की शान? वन विभाग के स्तर पर अफ्रीका से चीता लाने की योजना पर काफी काम हो चुका है. जल्द ही केंद्र की अनुमति मिलने के बाद एअरलिफ्ट कर चीता राजस्थान में लाया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब भारत में अफ्रीकी चीता बसाने की  तैयारियों नें ज़ोर पकड़ लिया है. 1948 के आसपास चीता खत्म हो गए थे जिसका मुख्य कारण शिकार एवं हैबिटैट लॉस था. अब अफ्रीकी चीता को भारत में बसाने की हरी झंडी मिल चुकी है जिसमें राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं गुजरात के कुछ हिस्से सम्मलित हो सकते हैं वहीं नामीबिया व साउथ अफ्रीका से चीता को एयर लिफ्ट करके लाने की योजना है.

चीता सबसे तेज़ दौड़ने वाले वन्य प्राणियों में से एक:
आपको बता दें कि चीता सबसे तेज़ दौड़ने वाले वन्य प्राणियों में से एक है, यहां चीता के नेचुरल प्रे बेस में केवल काला हिरण और चिंकारा है, इसके साथ ही चीता कुछ छोटे जानवरों का भी शिकार करता है. राजस्थान में शाहगढ़ सहित कई अन्य जगहों पर भी चीता बसाने की चर्चा है. चीता को यदि भारत में बसाना है तो चिंकारा, काला हरिण से भरपूर लंबे ग्रासलैंड चाहिए होते हैं. जानकारी यहाँ तक है कि कुछ भारतीय रिसर्चर अफ्रीकी देशों में जाकर कुछ चीतों को चिन्हित भी कर चुके हैं, एवं कागज़ी कार्रवाई होते ही इन्हें एयर लिफ्ट कर लाना है बस.  भारत में फ़िलहाल बड़ी बिल्लियों में बाघ, एशियाटिक लायन, तेंदुआ मौजूद हैं.

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चीता यहां से 70 साल पहले हो चुका है विलुप्त:
चीता यहां से 70 साल पहले विलुप्त हो चुका है, लेकिन चीता नाम वास्तव में भारतीय नाम ही है, चीता का शाब्दिक अर्थ है चित्ती यानी अंग्रेजी भाषा में स्पॉट, उन काले धब्बों को के कारण ही इस प्रजाति नाम चीता पड़ा और कोलोनियल पीरियड में यह नाम सब जगह फैल गया. हालांकि राजस्थान में तेंदुए को आज भी चीते के नाम से पुकारा जाता है, हालांकि तेंदुए और चीते में काफी फर्क है. भारत में पाया जाने वाला चीता एशियाटिक चीता था,  अफ्रीकी चीते को लाने से पहले ईरान से बात की गई जहां एशियाटिक चीते की प्रजाति अभी तक बची हुई है.

भारत में मिलने वाली तीन में से दो प्रजातियां बाघ और तेंदुए:
लेकिन ईरान के मना करने के बाद अफ्रीकी चीते को भारत में लाने के प्रयास शुरू किए गए मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गया, लेकिन अब न्यायालय की हरी झंडी के बाद भारत में चीता लाने की प्रक्रिया लगभग शुरू हो चुकी है. बड़ी बिल्लियों में राजस्थान में फ़िलहाल भारत में मिलने वाली तीन में से दो प्रजातियां बाघ और तेंदुए हैं. यदि यहां चीते को लाया जाता है तो राजस्थान में 70 साल के बाद ये राजस्थान की शान बन सकता है. राजस्थान के अलावा, मध्यप्रदेश के पालपुर कूनो, और नौरादेही सहित गुजरात में भी चीते को बसाने के कुछ स्थान उपयुक्त माने गए हैं. अब देखना ये होगा कि राजस्थान के अधिकारी इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर कैसे उतार पाते हैं.

सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा पेश कर मांगा 7 दिन का समय, फीस तय करने के लिए कमेटी गठन की भी दी कोर्ट को जानकारी

सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा पेश कर मांगा 7 दिन का समय, फीस तय करने के लिए कमेटी गठन की भी दी कोर्ट को जानकारी

जयपुर: निजी स्कूलो द्वारा फीस वसूली से जुड़े मामले पर राजस्थान हाईकोर्ट में कल सुनवाई होगी.मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस सतीश शर्मा की खण्डपीठ इस मामले पर सुनवाई करेगी.सुनवाई से पूर्व राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश महर्षि ने हाईकोर्ट में शपथपत्र पेश किया गया है.सरकार ने शपथ पत्र दाखिल करते हुए निजी स्कूलों की फीस तय करने के लिए कमेटी बनाने की जानकारी देते हुए 7 दिन की मोहलत मांगी है. सरकार ने अपने जवाब में कहा कि सरकार ने मामले में फीस निर्णय के लिए कमेटी गठन कर उससे सात दिन में रिपोर्ट मांगी है.इसलिए कमेटी द्वारा रिपोर्ट आने तक सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जाये.

हाईकोर्ट में कल होगी मामले पर सुनवाई:
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में 14 अक्टूबर को अदालत ने राज्य सरकार को शपथपत्र पेश करने के आदेश दिये थे.जिसमें निजी स्कूल कोरोनकाल और उसके बाद कितनी फीस और किस तरह से ले सकते हैं इस पर सरकार ने क्या कार्य योजना बनाई है.इसकी जानकारी 19 अक्टूबर को शपथपत्र के जरिए कोर्ट में पेश करने के आदेश दिये थे.इस आदेश की पालना में सरकार ने जवाब पेश किया है.कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के लिए 20 अक्टूबर की तारीख की थी. राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश महर्षि ने डीईओ लीगल का सोमवार को शपथ पत्र पेश किया. इस शपथ पत्र में कहा कि सरकार ने एक कमेटी का गठन 16 अक्टूबर को कर दिया है. इस कमेटी से सात दिन में रिपोर्ट मांगी गई है. राज्य सरकार ने कहा कि यह तय है कि 1 नवंबर से पहले स्कूल नहीं खुल रहे हैं ऐसे में किसी भी पक्ष को एक सप्ताह का समय दिए जाने से परेशानी नहीं होगी.

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यह है कमेटी में: 
राज्य सरकार ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है. संयुक्त शासन सचिव,शिक्षा, वरिष्ठ संयुक्त विधि परामर्शी, उप शासन सचिव प्रारंभिक शिक्षा को इस कमेटी में सदस्य बनाया गया है.

यह है पूरा मामला:
राज्य सरकार ने कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए अपने 2 अलग-अलग सर्कुलर के जरिए फीस स्थगन के आदेश जारी किए थे. जिसे निजी स्कूलों द्वारा हाई कोर्ट की एकलपीठ में चुनौती दी गई. एकलपीठ ने 7 सितम्बर को निजी स्कूलों को 70 फीसदी ट्यूशन फीस चार्ज करने की छूट दे दी. जिसे सरकार व अन्यम ने खंडपीठ में चुनौती दी है.

गुर्जर आरक्षण आंदोलन मामला: गुर्जर नेता मुकदमा दर्ज होने पर जता रहे नाराजगी, जिला कलेक्टर को सौंपा राज्यपाल के नाम ज्ञापन

गुर्जर आरक्षण आंदोलन मामला: गुर्जर नेता मुकदमा दर्ज होने पर जता रहे नाराजगी, जिला कलेक्टर को सौंपा राज्यपाल के नाम ज्ञापन

भरतपुर: आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जर महापंचायत आयोजित करने पर गुर्जर समाज के नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद अब गुर्जर नेता नाराजगी जताने लगे हैं. गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी बैसला के पुत्र विजय सिंह बैंसला व गुर्जर नेता भूरा भगत सहित कई गुर्जर समाज के नेताओं ने जिला कलेक्टर नथमल डिडेल को आज राज्यपाल के नाम ज्ञापन देकर समान अपराध समान न्याय व समान दंड के तहत समान कानून की पालना कराने की मांग की है.

गुर्जर नेता विजय सिंह बैंसला ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी देने भरतपुर आये थे, लेकिन ऐसा नहीं करने पर प्रशासन से मांग की है कि गत 17 अक्टूबर को बयाना के अड्डा गांव में गुर्जर समाज की महापंचायत के बाद मुकदमा दर्ज कर प्रशासन में जिस तरह सराहनीय कार्य किया है वैसे ही राज्य के मुख्यमंत्री, पीसीसी अध्यक्ष और प्रभारी महासचिव के भी ख़िलाफ़ भी एफआईआर दर्ज की जाए क्यों कि इन नेताओं ने भी खुले मंचों से धरना एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए थे.

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बैंसला ने कहा जिस तरह गुर्जर नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, वैसे ही इन नेताओं के खिलाफ भी एफ आई आर दर्ज की जाए. उल्लेखनीय है कि बयाना के अड्डा पीलूपुरा गांव में पिछले दिनों आयोजित हुई गुर्जर महापंचायत के बाद गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला उनके पुत्र सहित लगभग 32 लोगों के खिलाफ महामारी एक्ट के तहत नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है. साथ ही ढाई से तीन हजार अन्य लोगों को भी इस मुकदमे में शामिल किया गया है. सरकार द्वारा गुर्जर नेताओं की खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बाद गुर्जर नेताओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए एक बार फिर से सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए दीपक लवानिया की रिपोर्ट

कोटा उत्तर और दक्षिण नगर निगम के लिए हुए नामांकन दाखिल, प्रत्याशियों ने जीत को लेकर किए दावे

कोटा उत्तर और दक्षिण नगर निगम के लिए हुए नामांकन दाखिल, प्रत्याशियों ने जीत को लेकर किए दावे

कोटा: प्रदेश के कोटा जिले में आज नगर निगम चुनाव को लेकर कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण नगर निगम के लिए नामाकंन दाखिल हुए. कोटा कलेक्ट्रेट के सहित शहर में करीब 15 स्थानों पर नामाकंन दाखिल हुए. कोटा दक्षिण के 80 वार्डों के लिए तो वहीं कोटा उत्तर के 70 वार्डों के लिये बीजेपी और कांग्रेस सहित अन्य दलों और निर्देलीयों ने नामाकंन पत्र भरे. 

दोपहर 3 बजे तक सभी 15 स्थानों पर बीजेपी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सहित अन्य दलों और निर्दलीयों के मिलाकर 632 उम्मीदवारों ने 706 नामांकन भरे. इनमें कोटा उत्तर में 275 उम्मीदवारों ने 291 नामांकन भरे जबकि कोटा दक्षिण में 357 उम्मीदवारों ने 415 नामांकन भरे.

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कोरोना के कारण शहर के अलग अलग सरकारी भवनों में नामाकंन दाखिल कराने की व्यवस्था की गई थी. अब कल यानि 20 अक्टूबर को नामाकंन पत्रों की संवीक्षा होगी और 22 अक्टूबर तक प्रत्याशी अपनी इच्छा से नामांकन वापस ले सकते है. कोटा में आज दिनभर नामांकन दाखिल कराने के लिये बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों के प्रत्याशियों के साथ निर्दलीयों ने चुनावी मैदान में कूदने के लिये ताल ठोकी. वहीं नामाकंन दाखिल कराने आए प्रत्याशियों ने जीत को लेकर अपने अपने दावे और वादे किए.

नकली शराब पीने से तीन लोगों की मौत

नकली शराब पीने से तीन लोगों की मौत

पलक्कड़:  केरल के पलक्कड़ जिले के निकट कांजीकोड़ में आदिवासी कॉलोनी में कथित रूप से नकली शराब पीने से तीन लोगों की मौत हो गई और तीन महिलाओं सहित नौ अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी है. पुलिस ने कहा कि कॉलोनी के निवासी अय्यप्पन और रमन की कल मौत हो गई थी और उन्हें दफनाया जा चुका है. दोनों की आयु 52 वर्ष से अधिक है.

जांच अधिकारी ने  बताया कि आज सुबह कॉलोनी के निवासियों को सीवन (37) नाम का एक व्यक्ति अपने घर के बाहर मृत मिला है, जिसके बाद उन्होंने हमें इसकी जानकारी दी है. हम तीन प्राथमिकियां दर्ज कर रहे हैं. पुलिस ने कहा कि तीन महिलाओं समेत नौ लोगों का यहां जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है. सभी ने कल शराब पी थी. अब वह शराब ही थी या कुछ और कहा नहीं जा सकता है. 

पलक्कड़ के एसपीजी शिव विक्रम ने मीडिया से कहा कि हमें यह नहीं पता कि उन्होंने जिस चीज का सेवन किया वह शराब थी या नहीं. जिंदा बचे लोगों ने बताया कि वह सफेद रंग का कोई पदार्थ था, जिसकी सुगंध फिनाइल जैसी थी.  हम सभी कोणों से मामले की जांच कर रहे हैं. पुलिस मौत के कारणों की पुष्टि के लिये पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने की प्रतीक्षा कर रही है. उन्होंने संदेह जताया कि शराब के साथ सैनिटाइजर मिलाया गया होगा. पुलिस ने कहा कि इस घटना में जान गंवाने वाले दो लोगों के शवों को कब्रों से बाहर निकाला जाएगा. (सोर्स-भाषा)

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