जानिए, आखिर अंतिम संस्कार में महिलाएं क्यों नहीं होती शामिल 

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/07/23 07:10

नई दिल्ली। वर्तमान समय में जहां महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। वे अपनी काबलियत के दम पर देश और दुनिया के विभिन्न शीर्ष पदों पर है। आज भी हिंदू धर्म में कई रीति रिवाज ऐसे भी है जिनमें बदलते समय के साथ कोई परिवर्तन नहीं आया है, लेकिन बदलते परिवेश के साथ-साथ इसमें भी बदलाव आए है। 

हिंदू धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार के दौरान महिलाओं के श्मशान घाट जाने पर प्रतिबंध था। इसको लेकर कई मिथ्क समाने आए है। लेकिन मान्यताओं के अनुसार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का दिल बेहद नाजुक होता है। यदि कोई महिला अंतिम संस्कार के दौरान श्मशान घाट पर रोने लगे या डर जाए, तो इससे मृतक की आत्मा को शांति नहीं मिलती। कहा यह जाता है कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया जटिल होती है, जिससे महिलाएं नहीं देख सकती है। वहीं एक मान्यता की मानें तो श्मशान घाट पर आत्माओं का वास होता है और ये आत्माएं महिलाओं को अपना शिकार पहले बनाती है।

वहीं अंतिम संस्कार के दौरान मृतक के पुत्र को शव के सिर पर डंडे से मारने के लिए कहा जाता है। ऐसा इसलिए किया जिससे की कोई तांत्रिक मरने वाले की आत्मा को अपने वश में ना कर ले। हिंदू धर्म में भगवान राम की मान्यता है। कहा जाता है कि अगर किसी ने भगवान राम के नाम का 3 बार जाप कर लिया जाए तो यह अन्य किसी भगवान के 1000 बार नाम जपने के बराबर है। इसलिए शव यात्रा के दौरान लोग ‘राम नाम सत्य है’ कहते हैं। मृतक के शरीर का कोई अस्तित्व नहीं रहता, उसकी आत्मा भगवान की शरण में चली जाती है और यही अंतिम सत्य है।

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