स्वाइन फ्लू के बाद अब स्क्रब टाइफस का खतरा ! राजस्थान में फिर एक्टिव मोड में मौसमी बीमारियां

Vikas Sharma Published Date 2019/08/24 09:36

जयपुर: मौत बनकर उभरे स्वाइन फ्लू के बाद अब स्क्रब टाइफस ने राजस्थान को जकड़ लिया है. बरसाती सीजन में स्वाइन फ्लू की गति जहां धीमी हुई है, वहीं दूसरी ओर डेंगू, मलेरिया के साथ ही स्क्रब टाइफस के मरीजों ने चिकित्सा विभाग की नींद उड़ा दी है. हालांकि, चिकित्सा विभाग का दावा है कि स्क्रब टाइफस की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग के साथ मिलकर काम किया जा रहा है. लेकिन जिस तरह ये बीमारियां आमजन पर कहर बरपा रही है,उससे खुद अफसरों की चिंता अब बढ़ने लगी है. 

रोकथाम के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रहा चिकित्सा विभाग: 
सूबे की जनता एकबार फिर मौसमी बीमारियों की चपेट में है. कहने को तो चिकित्सा विभाग इन बीमारियों की रोकथाम के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है, लेकिन हर साल ये मौसमी बीमारियां आमजन पर मौत बनकर कहर बरपा रही है. अगर पिछले चार सालों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो हर बार मौसमी बीमारियों को लेकर चिकित्सा विभाग के इंतजामात फेल साबित रहे है. इस साल की शुरूआत में 206 मौतों के साथ स्वाइन फ्लू ने जहां कहर मचाया, वहीं अब स्क्रब टाइफस के बढ़ते मामलों में चिकित्सा विभाग की विजिलेंस की पोल खोल कर रख दी है. राजस्थान में अब तक रिकॉर्ड तोड 500 मरीज स्क्रब टाइफस के चिन्हित किए जा चुके है, जिसमें से अकेले जयपुर में 200 के आसपास प्रकरण है. 

इस साल में मौसमी बीमारियों का कहर: 
- स्वाइन फ्लू ने बरपाया सर्वाधिक कहर, जनवरी से अब तक 5042 पॉजिटिव मरीज किए गए चिन्हित, 206 मौतें 
- डेंगू के डंक ने भी किया हैरान-परेशान, अब तक 507 केस पॉजिटिव चिन्हित, जयपुर के परकोटे में काफी केस आए सामने 
- स्क्रब टाइफस के 500 मरीज आ चुके है सामने, अकेले जयपुर में 200 से अधिक मरीज चिन्हित 
- मलेरिया से इस साल एक मौत, 782 केस आ चूके सामने 
- चिकनगुनिया के भी 12 मामले राजस्थान में किए गए रजिस्टर्ड 

स्क्रब टाइफस के एकाएक बढ़े मामलों को लेकर चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का तर्क ये है कि राजस्थान में निशुल्क जांच योजना के चलते सर्विलांस लेवल काफी मजबूत है. इसलिए अधिक केस सामने आ रहे है. लेकिन अन्दरखाने विभागीय अधिकारियों की चिंता बढ़ने लगी है. 

पायरेथ्रम का स्प्रे करने के निर्देश:
इन बढ़ रहे मामलों को देखते हुए पशुपालन विभाग के अधिकारियों को पायरेथ्रम का स्प्रे करने के निर्देश दिए हैं. यदि मौजूदा स्थिति पर गौर फरमाए तो जयपुर के अलावा,अलवर, उदयपुर, कोटा, झालावाड़, भरतपुर, अजमेर, करौली, टोंक, करौली, दौसा, सवाईमाधोपुर, सीकर, झुंझुनूं, बारां, झालावाड़, चित्तौड़गढ़ व राजसमंद आदि जिलों में सर्वाधिक केस सामने आ रहे है. 

प्रदेशभर में सामने आ रहे मामले चिंता बढ़ा रहे: 
मौसमी बीमारियां खासतौर पर स्वाइन फ्लू-डेंगू, स्क्रब टाइफस की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग भले ही दावे कर रहा हो, लेकिन राजधानी जयपुर समेत प्रदेशभर में सामने आ रहे मामले चिंता बढ़ा रहे है. हालांकि, सूबे के चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा पूरे मामले की मॉनटरिंग कर रहे है, साथ ही विभागीय अधिकारियों को निर्देश भी दिए है कि मौसमी बीमारियों की रोकथाम के हरसंभव प्रयास किए जाए. हर सप्ताह बैठक लेकर रिव्यू भी शुरू कर दिया गया है. ऐसे में अब देखना ये है कि विभाग मौसमी बीमारियों के प्रकोप पर लगाम कसने में कितना सफल हो पाता है.  

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