VIDEO: भाजपा, भारत वाहिनी के बाद अब कांग्रेस के हुए घनश्याम तिवाड़ी, जानिए पूरा सफर 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/03/27 05:59

जयपुर। चुनाव हारने के बाद सियासी पारी समाप्त हो जाये ऐसा समझना मुनासिब नहीं, दिग्गजों का चुनावी पराजय का इतिहास रहा है। उनमें से ही घनश्याम तिवाड़ी भी एक हैं। सांगानेर से चुनाव हारने के बाद घनश्याम तिवाड़ी भी नया ठौर ढूंढ रहे थे, अब उन्होंने राह चुनी है कांग्रेस। उनकी विचारधारा कांग्रेसी नहीं है, लेकिन विपरित विचारों वाली कांग्रेस में जाने का ही विकल्प उनके पास था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से उनके निकट के सम्बंध ने उन्हें कांग्रेस के करीब ला दिया। खास रिपोर्ट:

वसुंधरा राजे के शासन काल में पूरे पांच सालों तक बीजेपी के विधायक होने के बावजूद घनश्याम तिवाड़ी ने विपक्षी विधायक का रवैया अख्तियार करके रखा था। उनके तेवर तो कांग्रेस से भी तीखे थे। वे कांग्रेस से भी ज्यादा तल्ख वसुंधरा राजे के प्रति नजर आये। बाद में उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व को भी कोसने में गुरेज नहीं किया। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा से ओतप्रोत रहे तिवाड़ी का अपनी ही पार्टी में अलग थलग हो जाना वाकई हैरत भरा रहा। किसी भी बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने उनकी खैरो-खबर लेना भी मुनासिब नहीं समझा। आखिरकार घनश्याम तिवाड़ी ने बीजेपी को त्याग कर भारत वाहिनी नाम दल का गठन कर लिया। नई पार्टी के बैनर तले बांसुरी के सिम्बल पर चुनाव लड़ा, लेकिन जहां उन्हें सर्वाधिक विश्वास था उसी सांगानेर में उन्हें मात खानी पड़ी। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय दल के महत्व का अहसास हुआ। लिहाजा उन्होंने राहुल गांधी के सामने कांग्रेस पार्टी को ज्वाइन कर लिया। 

कांग्रेस में उनका सफर कैसे तय हुआ आपको बताते हैं: 

—अशोक गहलोत से उनके पारिवारिक सम्बंध रहे
—इन्हीं सम्बंधो ने उनकी कांग्रेस में राह को आसां कर दिया
—गहलोत के साथ उनकी बैठकों का दौर चला था
—मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार तिवाड़ी बधाई देने पहुंचे थे
—किसान कर्ज माफी और अन्य फैसलों पर उन्होंने सार्वजनिक रुप से गहलोत को बधाई दी
—कुछ माह पहले उनकी कांग्रेस में आने को लेकर बात चली
—अशोक गहलोत से उनकी दो दौर की प्रारंभिक चर्चा हुई
—पीसीसी नेतृत्व की तिवाड़ी को लेकर अविनाश पांडे से हुई चर्चा
—इसके बाद तिवाड़ी ने सचिन पायलट से मुलाकात की
—कांग्रेस आलाकमान को तिवाड़ी को लेकर बताया गया 
—बिना शर्त तिवाड़ी के कांग्रेस आगमन पर हुई बातचीत
—आखिरकार बीजेपी के ब्राह्मण वोटों में सेंध लगाने के लिये तिवाड़ी पर खेला दांव
—सवर्णो को आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग तिवाड़ी ने विधानसभा में उठाई थी। 

घनश्याम तिवाड़ी के लिये कांग्रेस में जाना आसान नहीं कहा सकता है, क्योंकि इसी संगठन के खिलाफ उन्होंने वैचारिक लड़ाई लड़ी थी। इमरजेंसी के समय वे जेल तक गये थे, लेकिन पिछले पांच साल उनके  सियासी जीवन में इस तरह के रहे, जिससे पहले उन्हें कभी दो चार नहीं होना पड़ा। भले ही वो चौमूं से एक बार रिकार्ड वोटों से चुनाव हारे हो, फिर उनकी नई नवेली भारत वाहिनी को जनता का समर्थन नहीं मिला और अपने सियासी जीवन में उन नेताओं से चुनाव हार गये जो उन्हें देखकर राजनीतिक जीवन में आगे बढ़े। बीजेपी के टिकट पर अशोक लाहोटी को तिवाड़ी को हराना इतिहास रचने के समान था। वहीं पुष्पेन्द्र भारद्वाज का अपने पहले चुनाव में तिवाड़ी से अधिक वोट लेना उनके खुद के लिये सपने के समान। अब उन्हें कमबैक करना था, उम्मीदों की किरण नजर आई कांग्रेस पार्टी में। पॉलिटिकल कमबैक में तिवाड़ी की मदद की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने और कांग्रेस में तिवाड़ी के रुप में नवीन ब्राह्मण राजनीति का सूत्रपात कर दिया। जयपुर से लोकसभा टिकट के वो दावेदार हो सकते है, ऐसा नहीं होने पर तिवाड़ी को राज्यसभा में जाने का मौका मिलेगा। 

...संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट  

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