VIDEO: राज्यसभा चुनाव के बाद अब मंत्री परिषद में फेरबदल और विस्तार की अटकलें तेज, आसान नहीं सबको खुश करना

जयपुर: राज्यसभा चुनाव के बाद मंत्री परिषद फेरबदल और विस्तार की अटकलें तेज है.  चुनौती है क्षेत्रीय स्तर पर दिग्गजों की सियासत को बैलेंस करना है. निर्दलीय और बी एस पी से कांग्रेस में आये विधायकों को सम्मिलित करना, लिहाजा कार्य आसान नहीं है. बात जुलाई की हो रही. 

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मंत्रिपरषद फेरबदल और विस्तार का काम चुनौती पूर्ण:
बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के ऐसे कई दिग्गज चुनाव जीत गये जो मंत्री बनने की काबिलियत रखते थे लेकिन बन नहीं पाये. उम्मीद अब भी है और पार्टी को बहुमत भी प्राप्त है, लेकिन जिस तरह से राज्यसभा चुनाव में 13 निर्दलीय विधायकों का साथ मिला और बी एस पी से कांग्रेस में आये विधायक साथ आये मंत्रिपरषद फेरबदल और विस्तार का काम चुनौती पूर्ण हो गया है. ख्याल सबका रखना है और अब तो BTP भी खुलकर आ गई, इधर भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को देखना होगा. 

अभी भी कुछ जिलों से मंत्रीपरिषद में प्रतिनिधित्व ना के बराबर: 
लेकिन इन सबके बीच सबसे कठिन कार्य है क्षेत्रीय सि़यासत को बैलेंस करना, अभी भी कुछ जिलों से मंत्रीपरिषद में प्रतिनिधित्व ना के बराबर और कुछ में दिग्गजों ने चिंता कि लकीरें पैदा कर रखी है. यहां किस को बनाये और किस को हटाये ये आफत.  

---सीकर जिले की सियासी गणित बेहद पेचीदा है
- दीपेन्द्र सिंह शेखावत, राजेन्द्र पारीक
- परसराम मोरदिया जैसे दिग्गज विधायक तो बने लेकिन मंत्री नहीं बन पाये थे
- उनसे जूनियर गोविन्द डोटासरा ने मंत्री बनकर इतिहास रच दिया 
- जबकि दीपेन्द्र सिंह रह चुके है विधानसभा के अध्यक्ष 
- राजेन्द्र पारीक भी रह चुके पिछली गहलोत सरकार में मंत्री
- दलित लीडर मोरदिया रह चुके पीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष 
- उधर रेस में महादेव सिंह खंडेला भी एक बड़ा नाम 
- खंडेला जीते निर्दलीय लेकिन आस्था गहलोत के प्रति 
- खंडेला तो केन्द्र सरकार में मंत्री रह चुके  
- वहीं सीकर में जाट सियासत को भी बैलेंस रखना आवश्यक
- किसी भी एक दिग्गज को मंत्री बनाना और एक को छोड़ना दुरुह कार्य!

----करौली की राजनीति निराली 
- कांग्रेस से जीते रमेश मीना आज कैबिनेट मंत्री
- इनके तेवरों ने राज्यसभा चुनावों की सियासत हिला दी थी
- लेकिन लाखन मीना के कांग्रेस में आते ही बदल गई करौली की गणित
- सपोटरा विधायक रमेश मीना पहले से ही मंत्री 
- रमेश को माना जाता है पायलट कैम्प में, वे सीनियर लीडर है
- मीना वर्ग के रमेश की लोकप्रियता भी है
- उधर लाखन सिंह मीना इन दिनों गहलोत कैम्प में
- बसपा विधायक दल के नेता भी थे लाखन सिंह मीना
- लाखन की अगुवाई बसपा विधायक दल का हुआ कांग्रेस में विलय
- वहीं एक ही क्षेत्र से दो मीना मंत्री बनाये जाना शायद संभव नहीं! 
- पूर्वी राजस्थान के एक मंत्री की थ्योरी है -सियासत में सब संभव -

----झुंझुनूं जिले की सियासत की राह दुरुह 
- यहां से अभी तक कोई नहीं है गहलोत मंत्रीपरिषद
- कतार में शुमार सभी दिग्गज है 
- डॉ जितेन्द्र सिंह, बृजेन्द्र ओला, डॉ राजकुमार तीनों रह चुके मंत्री
- इनके समीकरण बिगड़ रहे राजेन्द्र सिंह गुढ़ा के कारण
- राजेन्द्र सिंह गुढ़ा को एडजस्ट करना जरुरी बताया जा रहा
- बसपा से कांग्रेस में आने वाले विधायकों के यह रहे थे मेंटर
- वहीं रीटा चौधरी ने भी उप चुनाव जीत दावा ठोक दिया है
- खांटी जाट पॉलिटिक्स के कारण झुंझुनूं को बैलेंस करना मुश्किल!
- खास बात पिछले गहलोत राज में यहां के 5 विधायकों में से तीन मंत्री थे

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कुछ और भी ऐसे जिले है जिन्होंने कांग्रेस की अंदरुनी सियासत का जायका बिगाड़ रखा है. यहां की सियासत को थाम कर उस पर दांव खेलना किसी से चुनौती कम नहीं है. आज इतना ही आगे भी हम कुछ और जिलों की सियासत से आपको रुबरु करायेंगे.

...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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