VIDEO: निकाय चुनाव परिणाम के बाद अब मंत्रीपरिषद फेरबदल और विस्तार की संभावनाएं, ये विधायक बन सकते हैं मंत्री

VIDEO: निकाय चुनाव परिणाम के बाद अब मंत्रीपरिषद फेरबदल और विस्तार की संभावनाएं, ये विधायक बन सकते हैं मंत्री

जयपुर: निकाय चुनावों के परिणामों ने राजनीति में नये समीकरण बनाने का प्रयास किया है. छोटे सरकार के चुनावों में पहले ही कांग्रेस ने बाजी मार ली थी फिर निकाय प्रमुखों के चुनावों में भी विपक्षी दल पर सत्ताधारी दल की बढ़त देखने को मिली. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की रणनीति ,कांग्रेस संगठन की सक्रियता और EWS जैसे फैसलों के असर ने उन निकायों में भी प्रमुख बना लिये जहां पर बहुमत कांग्रेस का नहीं था. इन परिणामों के बाद सत्ताधारी दल कांग्रेस के अंदर भावी बदलाव देखने को मिल सकते है चाहे मंत्रीपरिषद हो या फिर कांग्रेस संगठन. उधर दो उपचुनाव के परिणामों से कुछ खास हासिल नहीं कर पाई बीजेपी को निकाय चुनावों ने बड़ा झटका दे दिया, पहले लिटमस टेस्ट को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया पास नहीं कर पाये, अभी पंचायत चुनावों की अग्निपरीक्षा भी उनके सामने है. जनता ने कड़ी से कड़ी जोड़ दी.      

अशोक गहलोत अब अपना पिटारा खोल सकते है: 
सियासत के जादूगर कहे जाने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अब अपना पिटारा खोल सकते है. निकाय चुनावों में मिली सफलता के बाद ऐसी उम्मीद की जा रही है. लिहाजा उम्मीद है मंत्रीपरिषद फेरबदल और विस्तार की ,उम्मीद है राजनीतिक नियुक्तियों से जुड़ी सौगात की. निकाय चुनावों और उसके बाद प्रमुखों के चुनाव में कांग्रेस को बड़ी सफलता मिली. 49 में से 37 निकायों में प्रमुख बना लेना बड़ी बात है. ऐसे में निगाहें गढ़ गई है सीएम गहलोत पर कि वो अब क्या निर्णय भविष्य में लेने जा रहे है. संभावनाएं है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सियासी फैसले ले सकते है इनमें प्रमुख है मंत्रीपरिषद फेरबदल और विस्तार. इस विस्तार और फेरबदल में निर्दलीय और कांग्रेस में आये अन्य दलों के विधायकों को भी जगह मिल सकती है. इसके अलावा नये विकल्प के तौर पर आयोग और बोर्ड में भी जगह दी जा सकती है. दो या तीन उप मुख्यमंत्री बनाये जाने की भी जोरदार चर्चाएं. अब उन कद्दावर विधायकों के नाम की चर्चा जिन्होंने छोटे सरकार के चुनावों में अपनी परफोरमेंस से खुद को साबित किया, इनमें से कुछ ने अपनी क्षमता के बाद मंत्रीपरिषद में आने के लिये दरवाजा खटखटाया है. 

--------चमके विधायक---------
--संदीय यादव..कांग्रेस विधायक
-भिवाड़ी नगर परिषद में कांग्रेस का प्रमुख बनवाया
-बसपा से कांग्रेस में आये है संदीप

--कांति मीना..निर्दलीय विधायक
-थानागाजी से निर्दलीय विधायक
-कांग्रेस का प्रमुख बनाने का काम किया

--मेवाराम जैन..कांग्रेस विधायक
-बाड़मेर से कांग्रेस का बोर्ड और प्रमुख बनाया
-बाड़मेर से दूसरी बार कांग्रेस के विधायक है जैन

---सुभाष गर्ग..राज्य मंत्री व भरतपुर के विधायक
-भरतपुर नगर निगम में कांग्रेस का मेयर बनाने में रही भूमिका
-गहलोत मंत्रीपरिषद में उनकी बढ़ सकती है भूमिका
-आरएलडी के विधायक लेकिन गहलोत टीम में माने जाते है

---राजेन्द्र सिंह विधूड़ी ..कांग्रेस विधायक
-रावतभाटा में कांग्रेस का बोर्ड और प्रमुख बनाने का क्रेडिट मिला
-कांग्रेस में गुर्जर नेता के तौर पर चर्चित
-दिल्ली के रसूखातों के बल पर सियासत में मुकाम
-करीब 20साल बाद रावतभाटा में कांग्रेस का प्रमुख बना

---कृष्णा पूनिया..विधायक कांग्रेस
-राजगढ़ में कस्वां परिवार का तिलिस्म तोड़ा
-पहले विधानसभा में हराया अब निकाय में भी
-राजगढ में कांग्रेस का प्रमुख बनाने में कामयाब रही

---राजकुमार गौड़ ..निर्दलीय विधायक
-श्रीगंगानगर में कांग्रेस का प्रमुख बनाने में योगदान दिया
-जिसे विधानसभा चुनावों में परास्त किया था उसी का किया सहयोग
-जीते निर्दलीय लेकिन सीएम गहलोत को मानते है अपना नेता

---विनोद लीलावाली....विधायक हनुमानगढ़
-हनुमानगढ़ में प्रमुख बनाने में सफलता मिली
-विनोद लीलावाली पहले भी रह चुके है मंत्री
-हनुमानगढ़ की सफलता से उनका कद बढ़ा

---रीटा चौधरी ..विधायक मंडावा
-बिसाऊ में कांग्रेस का परचम फहराया
-हाल ही में विधानसभा का उपचुनाव जीता था
-दूसरी बार मंडावा से विधायक है रीटा
-कद्दावर नेता रहे स्वर्गीय रामनारायण चौधरी की बेटी

---बृजेन्द्र ओला........विधायक झुंझुनूं
-निकाय में भी ओला परिवार की बादशाहत कायम
-शहर में भी ओला परिवार की मेहनत रंग लाई
-बृजेन्द्र ओला पहले भी रह चुके है मंत्री

---भरत सिंह ...विधायक कांग्रेस
-कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने सांगोद के शहर में बनाई सरकार
-निकाय प्रमुख और बोर्ड दोनों बनवाये
-भरत सिंह पिछली गहलोत सरकार में भी रह चुके पीडब्लूडी मंत्री

---चेतन डूडी ..विधायक डीडवाना
-डीडवाना में कांग्रेस को बड़ी जीत मिली
-डूडी पहली बार बने है कांग्रेस के विधायक
-संसदीय सचिव पद के लिये नाम चर्चा में

----सुरेश मोदी ...कांग्रेस विधायक 
-नीम का थाना में मोदी परिवार ने परम्परागत गढ़ में लोहा मनवाया
-बोर्ड और प्रमुख दोनों बनाने में रहे कामयाब
-बाजौर-खंडेलवाल की महायुति को उन्होंने धवस्त किया

---राजेन्द्र पारीक .......कांग्रेस विधायक
-सीकर नगर परिषद में हाथ की फिर सरकार
-राजेन्द्र पारीक ने अपनी क्षमता को साबित किया
-पारीक पिछली गहलोत सरकार में थे काबिना मंत्री
-इस सफलता से उनके हौंसले बुलंद,दावा मंत्री का

--संयम लोढ़ा..निर्दलीय विधायक
-सिरोही-शिवगंज दोनों में लोहा मनवाया
-हाथ से नहीं बने विधायक लेकिन निकाय में हाथ को किया मजबूत
-दोनों जगहों के निकाय प्रमुख बने कांग्रेस के नेता
-डॉ सीपी जोशी के करीबी माने जाते है लोढ़ा

मंत्रीपरिषद फेरबदल और विस्तार के लिये गहलोत इस समय को चुन सकते है जब कांग्रेस के अंदर फीलगुड़ का एहसास ...इसके कई कारण है. पहला कारण महाराष्ट्र में शिवसेना,एनसीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार का निर्माण. महाराष्ट्र की सियासत राजस्थान से भी ताल्लुक रहा. जयपुर के एक रिसोर्ट में ही महाराष्ट्र के कांग्रेस के विधायकों को ठहराया गया था और कमान संभाली थी खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने. उनके विश्वस्त सलाहकार चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा,कृषि मंत्री लालचंद कटारिया,मुख्य सचेतक महेश जोशी ,कांग्रेस नेता धर्मेन्द्र राठौड़ ने टास्क को पूरा किया. यूं कह सकते है कि जयपुर महाराष्ट्र के विधायकों के लिये शुभ साबित हुआ. इससे पहले विधानसभा में मंडावा के उपचुनाव में कांग्रेस को सफलता मिली. मंडावा में कांग्रेस को बड़ी जीत मिली और अब अशोक गहलोत ने निकाय चुनावों में कड़ी से कड़ी जोड़कर जता दिया कि उन्हे यूं ही सियासी जादूगर नहीं कहा जाता. टर्निंग पाइंट के तौर पर अशोक गहलोत का ईडब्लूएस का राहत भरे बदलावों से जुड़ा फैसला बीजेपी के मूल वोट बैंक में सेंध लगाने में मददगार साबित हुआ. निकाय प्रमुखों के चुनावों के आंकड़े बताते है कि करीब 22जगहों पर कांग्रेस के सामान्य वर्ग के नेताओं ने निकाय प्रमुख का पद हासिल किया. इसी फीलगुड़ के बीच उम्मीद की जा रही मंत्रीपरिषद फेरबदल और विस्तार की. 

------------गहलोत कर सकते है मंत्रीपरिषद का फेरबदल और विस्तार-----------
- दो या तीन उप मुख्यमंत्री बनाये जाने की चर्चाएं
- डॉ सीपी जोशी को उपमुख्यमंत्री बनाये जाने की चर्चा,उनके साथ ही लालचंद कटारिया,मा.भंवर लाल मेघवाल-खिलाड़ी लाल बैरवा का नाम भी चर्चाओं में
- जोशी अगर स्पीकर पद पर ही बने रहे तो महेश जोशी या राजेन्द्र पारीक को मंत्रालय मिल सकता है. 
- डॉ सीपी जोशी को मंत्री बनाकर उनकी सियासी कुशलता को इस्तेमाल करने के बारे में सोचा जा रहा.
- महेन्द्रजीत मालवीय को भी फ्रंट में लाया जा सकता है चाहे मंत्रीमंडल हो या फिर प्रदेश कांग्रेस का संगठन. 
- हरीश चौधरी को अपग्रेड़ करने की चर्चाएं
- निर्दलीय विधायकों में से कुछ दिग्गज चेहरों को जगह मिल सकती है.
- बसपा से कांग्रेस में आये विधायकों में से कुछ को आयोग-बोर्ड चैयरमेन बनाये जाने की चर्चा-मंत्री अथवा संसदीय सचिव भी संभव
- ईडब्लूएस के फैसले के कारण राजपूत-ब्राह्मण-वैश्य नेताओं को तरजीह मिलने की संभावना
- राजनीतिक नियुक्तियों का पिटारा खुल सकता है जिसका बेसब्री से इंतजार हो रहा 

बीजेपी इन दिनों झंझावतों से जूझ रही. आपसी एकता और सामंजस्य के अभाव के कारण बीजेपी ना तो उपचुनाव और ना ही निकाय चुनावों में कोई छाप छोड़ पाई. बीजेपी के नये प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को विरासत में कांटो का ताज मिला है लिहाजा उन्हें चुनौतियों का डटकर मुकाबला करना होगा. पहले टेस्ट में तो वो उतीर्ण नहीं हो पाये लेकिन भविष्य में चुनौती मिलने वाली है पंचायत चुनावों की, इनमें कांग्रेस सदैव मजबूत रहती आई है. 

....फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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