VIDEO: मैराथन माथापच्ची के बाद जसकौर मीना को मिला दौसा से टिकट, जानिए क्या है इनसाइड स्टोरी

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/14 09:33

जयपुर। आखिरकार बीजेपी ने दौसा में अपना उम्मीदवार तलाश ही लिया। पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसकौर मीना को बीजेपी ने दौसा के चुनावी समर में उतारा है। इसके साथ ही राजस्थान की 25 सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी उम्मीदवारों की तस्वीर साफ हो गई। बीजेपी आलाकमान की ओर से कराये रैपीड सर्वे के बाद जसकौर को टिकट थमाया गया है। 

आंतरिक सियासत और कुनबे की कलह से पार पाने की कोशिशों के तहत बीजेपी ने दौसा से जसकौर मीना को प्रत्याशी बनाया है। एसटी रिजर्व सीट दौसा में टिकट चयन को लेकर मैराथन माथापच्ची का दौर चला। कांग्रेस की उम्मीदवार सविता मीना के नाम की घोषणा के तकरीबन 2 हफ्ते बाद बीजेपी ने दौसा में नाम फाइनल किया। यहां बीजेपी के अंदर टिकट को लेकर दो मत थे। डॉ किरोड़ीलाल मीना चाह रहे थे अपनी पत्नी गोलमा देवी या फिर अपने भाई जगमोहन मीना को टिकट दिलाना लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। उधर वसुंधरा राजे कैम्प से पहले महुवा से निर्दलीय विधायक ओम प्रकाश हुड़ला, फिर उनकी पत्नी प्रेम का नाम चला। जसकौर मीना और रामकिशोर मीना के नाम भी इसी कैम्प से चलाये गये। टिकट वितरण को लेकर जद्दोजहद करीब 2 हफ्ते तक चली। 

जसकौर मीना के टिकट की इनसाइड स्टोरी:

—डॉ किरोड़ी चाह रहे थे भाई जगमोहन मीना का टिकट
—वसुंधरा राजे कैम्प ने ओम प्रकाश हुडला से संपर्क किया
—हुडला ने अपनी पत्नी का नाम आगे किया 
—हुडला की पत्नी के नाम पर जावड़ेकर और वसुंधरा राजे दोनों की सहमती नहीं थी
—बीजेपी राष्ट्रीय नेतृत्व ने कहा चुनाव लड़ना है तो विधायकी छोड़कर खुद ही लड़ना होगा चुनाव पत्नी को नहीं दे पायेंगे
—महुवा विधायक पद छोड़ने को हुडला नहीं हुये तैयार
—उधर इसी बीच महिला कार्ड के तौर पर डॉ किरोड़ी कैम्प से चला गोलमा देवी का नाम
—गोलमा देवी के नाम चलने के साथ ही राजे कैम्प की ओर से जसकौर मीना का नाम चलाया गया
—सूत्र बताते है कि राजे कैम्प में जसकौर और हुडला के साथ साझा बैठकें हुई
—जसकौर मीना के नाम को मजबूती के साथ आगे बढाया
—राजे कैम्प को डॉ किरोड़ी लाल मीणा की रणनीति को रोकना था 
—विधानसभा चुनाव परिणाम डॉ किरोड़ी कैम्प के लिये आखिर तक नुकसान देह साबित हुये
—विरोधी धड़े ने इन परिणामों को ही मुद्दा बनाया
—इसके बाद गोलमा देवी और जसकौर मीना के नाम पर पार्टी ने गोपनीय रैपीड सर्वे कराया और फैसला बीजेपी के संसदीय बोर्ड पर छोड़ दिया
—स्थानीय संघ से भी राय ली गई 
—आखिरकार 2 हफ्ते के बाद जसकौर मीना का नाम फाइनल हो गया 

दौसा में मुकाबले की तस्वीर तो साफ हो गई लेकिन मुकाबला आसान नहीं है.. बीजेपी के मोदी फेक्टर के आगे कांग्रेस को फिर से कड़ी चुनौती मिलने वाली है....विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को दौसा जिले में प्रचंड बहुमत मिला था.... दौसा लोकसभा क्षेत्र में आने वाली विधानसभा सीट पर कमल को पंजे ने जोरदार शिकस्त दी...नामों के सामने आने के बाद यहां हाई प्रोफाइल चुनाव होने जा रहा है

दौसा लोकसभा चुनाव महा मुकाबला:

सविता मीना, कांग्रेस उम्मीदवार:

—विधायक मुरालीलाल मीना की पत्नी 
—दौसा, बांदीकुई, महुवा सीट पर मुरारी का सीधा प्रभाव
—थानागाजी सीट पर भंवर जितेन्द्र से मदद मिलेगी
—मुरारी लाल मीना बांदीकुई से भी विधायक रह चुके है और अभी दौसा से विधायक है

प्लस पाइंट:
—3 विधानसभा सीटों पर प्रभाव
—मीना क्षत्रप के तौर पर स्थापित
—गुर्जर वोट लेने की क्षमता 
—पायलट फेक्टर से मिल सकती है मदद
—दलित वोटों इनके लिये माइल स्टोन बन सकते है 
—मूल ओबीसी जातियों में प्रभाव 

जसकौर मीना, उम्मीदवार भाजपा:

—पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पूर्व सांसद (सवाई माधोपुर) 
—लालसोट का मंडावरी इनका पीहर
—पूर्व मंत्री वीरेन्द्र मीना है सगे भतीजे
—लालसोट विधानसभा सीट पर व्यापक प्रभाव
—अभी लालसोट से परसादी लाल मीना चुनाव जीते है
—पराजित बीजेपी प्रत्याशी ने आरोप लगाया था कि मुझे जसकौर मीना ने हराया
—महुवा में जसकौर मीना को निर्दलीय विधायक ओम प्रकाश हुडला का साथ मिल सकता है
—डॉ किरोड़ी लाल मीणा का साथ इनके लिये अहम साबित हो सकता है

प्लस पाइंट:
—लालसोट, चाकसू, सिकराय रह सकते है प्रभावी 
—गुर्जर-ब्राह्मण साझा वोट मिले तो बांदीकुई, दौसा, महुवा, थानागाजी में मुरालीलाल मीना के लिये परेशानी खड़ी हो सकती है
—वैश्य भी जसकौर कैम्प को मिल सकते है
—करौली-धौलपुर में टिकट नहीं मिलने से नाराज बैरवा वोटर्स को जसकौर ने अगर साध लिया तो फायदा मिल सकता है 

दौसा में जातीय गणित के तौर पर एसटी सीट पर सामान्य, दलित और एसबीसी वर्ग निर्णायक रहा है। पिछले चुनावों में भी एसटी वोटों का झुकाव डॉ किरोड़ीलाल मीना की ओर था लेकिन अन्य समाजों ने हरीश मीना का साथ दिया और वो चुनाव जीत गये। माली वोट यहां किधर जाएंगे यह भी महत्वपूर्ण रहेगा। दौसा लोकसभा सीट पर जातीय सियासत को साधने पर ही चुनाव जीता जा सकता है। विधानसभा में नरेन्द्र मोदी ने दौसा के समीप जनसभा की थी भीड़ भी खूब जुटी, लेकिन जातीय गणित को बीजेपी के अनुकूल नहीं रही। मीणा-गुर्जर वोटों का एक जाजम पर आना जाना बीजेपी के लिये नुकसानदेह रहा। दो महिलाओं सविता और जसकौर के बीच की जंग यहां यह भी साबित करेगी कि भावी मीना सितारा यहां कौन बनेगा। क्योंकि दौसा से ही मीना राजनीति में संदेश जाता है। 

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट


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