जयपुर VIDEO: लाइसेंस, दस्तखत और फर्जीवाड़ा पार्ट- 2 ! निजी कम्पनी के फर्जीवाड़े पर कृषि विभाग की चुप्पी, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: लाइसेंस, दस्तखत और फर्जीवाड़ा पार्ट- 2 ! निजी कम्पनी के फर्जीवाड़े पर कृषि विभाग की चुप्पी, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: कृषि विभाग से उर्वरक बनाने के लिए लाइसेंस धारी एक निजी कम्पनी पर फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं. कंपनी में गुण नियंत्रण के लिए जिम्मेदार कार्मिक ने खुद के फर्जी हस्ताक्षर किए जाने की एफआईआर दर्ज कराई है. वहीं अब इस मामले में कृषि विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है. जयपुर की रॉयल कैमिकल एंड फर्टिलाइजर्स कम्पनी पर लाइसेंस के आवेदन में फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं. आरोप कम्पनी के लिए कथित रूप से गुण नियंत्रण का कार्य देखने वाले कार्मिक आनंदीलाल कुमावत ने लगाए हैं.

कार्मिक आनंदीलाल कुमावत ने करधनी थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि उसने कभी कम्पनी में कार्य ही नहीं किया गया. इंटरव्यू के नाम पर उसके दस्तावेजों की फोटोकॉपी लेकर कम्पनी संचालकों ने उसके नाम से कृषि विभाग में शपथ पत्र पेश कर दिए हैं. फर्स्ट इंडिया न्यूज ने 2 मई 2022 को इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए खबर प्रसारित की थी. अब इस मामले में कृषि विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है. दरअसल कम्पनी के लाइसेंस आवेदन में गुण नियंत्रण के लिए जिम्मेदार कार्मिक के अलग-अलग हस्ताक्षर होने के बावजूद भी कृषि विभाग के अधिकारियों ने कम्पनी का लाइसेंस रद्द करने के बजाय हर बार रिन्यू कर दिया. बाद में सितंबर 2016 में संयुक्त निदेशक कृषि (आदान) रामगोपाल शर्मा की सतर्कता से यह मामला पकड़ में आ सका.

3 आवेदनों में बदले दस्तखत, अधिकारी जारी करते रहे लाइसेंस !:
- कम्पनी राॅयल कैमिकल एंड फर्टिलाइजर्स ने मार्च 2011 में पहली बार लाइसेंस लिया
- उस समय कृषि विभाग में संयुक्त निदेशक (आदान) आरपी कुमावत थे
- तब आनंद लाल कुमावत पुत्र मालूराम कुमावत के नाम से लगाया गया शपथ पत्र
- जबकि युवक का कागजों में नाम है आनंदीलाल कुमावत पुत्र मालीराम कुमावत 
- अक्टूबर 2012 के जैव उर्वरक के आवेदन में नाम आनंदी लाल कुमावत पुत्र मालीराम कुमावत
- फरवरी 2014 में रिन्यूअल के शपथ पत्र में नाम हुआ आनंदलाल कुमावत पुत्र मालूराम कुमावत
- उस समय कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक थे एसके हुड्डा
- सितंबर 2016 में जिंक बोरेक्स के आवेदन में फिर बदल गए हस्ताक्षर
- तब संयुक्त निदेशक रामगोपाल शर्मा ने अलग-अलग हस्ताक्षर देखकर पकड़ा मामला
- रामगोपाल शर्मा ने कंपनी को पत्र लिख आनंदीलाल कुमावत को पेश करने के लिए कहा
- तब कम्पनी ने फर्जीवाड़ा खुलने पर गुण नियंत्रण के लिए जिम्मेदार कार्मिक का शपथ पत्र बदला
- आनंदीलाल कुमावत के बजाय हरवेन्द्र माथुर के नाम से लगाया गया नया शपथ पत्र

इस फर्जीवाड़े के पकड़े जाने के बाद भी निजी कम्पनी रॉयल कैमिकल एंड फर्टिलाइजर्स पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. न ही जिम्मेदार कृषि अधिकारियों के खिलाफ जांच बिठाई गई. हालांकि संयुक्त निदेशक रामगोपाल शर्मा ने कम्पनी को नोटिस जारी किए, जिसका भी कम्पनी ने संतुष्टिजनक जवाब नहीं दिया है. जानकारी के मुताबिक 20 अक्टूबर 2020 को आनंदीलाल कुमावत ने एफआईआर दर्ज कराने से पहले कृषि विभाग को अपनी अधिवक्ता बालकृष्ण शर्मा के जरिए इस फर्जीवाड़े को लेकर नोटिस भिजवाया था. नोटिस पर कृषि विभाग ने कम्पनी को पत्र लिखे, लेकिन कम्पनी ने विभाग को संतुष्टिजनक जवाब नहीं दिए हैं.

लाइसेंस, दस्तखत और फर्जीवाड़ा पार्ट- 2:

- आनंदीलाल के नोटिस के बाद कृषि विभाग ने 8 दिसंबर 2020 को कम्पनी को पत्र लिखा
- आनंदीलाल के आरोपों पर 7 दिन में कम्पनी से स्पष्टीकरण मांगा
- कम्पनी ने 14 दिसंबर 2020 को कृषि विभाग को स्पष्टीकरण तो नहीं दिया
- बल्कि कृषि विभाग को पहले आनंदीलाल के नोटिस की मूल कॉपी भेजने को लिख दिया
- 1 फरवरी 2021 को कृषि विभाग ने फिर से कम्पनी को 3 दिन में जवाब देने को पत्र लिखा
- आंनदीलाल के नियुक्ति पत्र, सहमति पत्र, वेतन बिल भुगतान प्राप्ति रसीद माहवार और अन्य दस्तावेज मांगे
- कम्पनी ने 3 फरवरी 2021 को भेजे जवाब में कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए
- केवल न्यायिक मुकदमे में आनंदीलाल के पेश होने सम्बंधी एक कागजात भिजवाए 

इस पूरे मामले में फर्स्ट इंडिया न्यूज ने जब कम्पनी के पार्टनर हरवेन्द्र माथुर से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि आनंदीलाल कम्पनी के साथ जुड़ा हुआ था. उसे मासिक वेतन नहीं दिया जाता था, बल्कि वाउचर के जरिए किश्तों में पैसा दिया जाता था. हालांकि माथुर अपनी सफाई में आनंदीलाल का नियुक्ति पत्र, सहमति पत्र, वेतन बिल, ईएसआई या पीएफ की रसीद उपलब्ध नहीं करा सके. कुलमिलाकर इस पूरे प्रकरण में एक तरफ जहां न केवल कम्पनी की गड़बड़ी दिखाई दे रही है, जिसने आनंदीलाल के नाम से पेश दस्तावेजों में हर बार अलग-अलग हस्ताक्षर पेश किए. बल्कि साथ ही कृषि विभाग के 2 पूर्व अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही भी दिख रही है. देखना होगा कि फर्स्ट इंडिया न्यूज के इस खुलासे के बाद क्या कृषि विभाग इस मामले में दोषी कम्पनी और पूर्व अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा ?

और पढ़ें