Live News »

कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने की समीक्षा, कहा-कोरोना महामारी के बीच टिड्डी प्रकोप बड़ी चुनौती

कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने की समीक्षा, कहा-कोरोना महामारी के बीच टिड्डी प्रकोप बड़ी चुनौती

जयपुर: कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कोरोना महामारी के बीच टिड्डी प्रकोप को बड़ी चुनौती बताते हुए विभागीय अधिकारियों को जिला प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय एवं किसानों के सहयोग से प्रभावी नियंत्रण करने के निर्देश दिए. निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ टिड्डी नियंत्रण, खरीफ आदान व्यवस्था एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा की. सोमवार को कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन ने इस साल व्यापक पैमाने पर टिड्डी प्रकोप की आशंका जताते हुए गत वर्ष की तुलना में दो से तीन गुना अधिक प्रभाव की चेतावनी दी है.

टिड्डी नियंत्रण के लिए सभी जरूरी इंतजाम:
इस साल पिछले वर्ष प्रभावित हुए 12 जिलों के अलावा अन्य जिलों में भी टिड्डी के पहुंचने की आशंका है. उन्होंने कहा कि हमने पिछले साल बहुत ही बढ़िया तरीके से टिड्डी पर नियंत्रण किया था, लेकिन इस साल और ज्यादा प्रभावी सर्वेक्षण एवं नियंत्रण प्रणाली अपनाने की आवश्यकता होगी. राज्य सरकार केन्द्र के साथ पूरा समन्वय स्थापित कर टिड्डी नियंत्रण के लिए सभी जरूरी इंतजाम कर रही है. उन्होंने जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति के माध्यम से सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए. अधिकारी मौके पर पर्याप्त कीटनाशक की उपलब्धता सुनिश्चित करें. व्हाट्स एप ग्रुप बनाकर पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर सांसद तक सभी जनप्रतिनिधियों को जोड़ें, ताकि समय पर टिड्डी की तुरंत सूचना मिल सकें और प्रभावी नियंत्रण किया सके. उन्होंने किसानों का पूरा सक्रिय सहयोग लेने के निर्देश दिए. उन्होंने बताया कि टिड्डी प्रभावित जिलों में रिक्त पदों पर अन्य जिलों से कार्मिक नियुक्त किए गए हैं और शीघ्र ही नई भर्ती से चयनित सहायक कृषि अधिकारी एवं कृषि पर्यवेक्षकों को नियुक्ति दी जाएगी. जिसके कार्मिकों की कोई कमी नहीं रहेगी.

खाद की व्यवस्था करने के निर्देश दिए:
कृषि मंत्री ने अच्छी बरसात होने की भविष्यवाणी को विभाग और किसानों के लिए खुश खबरी बताते हुए काश्तकारों के लिए समय पर बीज एवं खाद की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। फसल बीमा ऋणी किसानों के लिए भी वैकल्पिक कटारिया ने बताया कि इस वर्ष से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ऋणी किसानों के लिए भी वैकल्पिक कर दी है. ऋणी किसान यदि स्वयं को बीमा से अलग रखना चाहता है तो उसे आगामी 8 जुलाई तक संबंधित बैंक शाखा को सूचित करना होगा. उन्होंने अधिकारियों को इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए. कृषि मंत्री ने रबी फसल कटाई प्रयोग के आंकड़े जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि नुकसान का आंकलन किया जा सके. उन्होंने तकनीकी वजह से पुराने सालों के अटके कुछ क्लेम भी शीघ्र जारी करवाने के निर्देश दिए.

देश के सबसे चर्चित राज्यपाल धनखड़ का आज हैं जन्मदिन, शेखावटी में जाट राजनीति से सफर शुरू कर वकालात में भी रहे सिरमौर

गत वर्ष हुए 12 जिले टिड्डी से प्रभावित:
प्रमुख शासन सचिव नरेशपाल गंगवार ने बताया कि गत वर्ष 12 जिले टिड्डी से प्रभावित हुए थे, वहां के लिए काफी पहले ही कंटीनजेंसी प्लान तैयार कर लिया है. इस साल नए जिले जुड़ने की आशंका के कारण शेष जिले भी जिला कलक्टर से कंटीनजेंसी प्लान स्वीकृत कराकर मुख्यालय भिजवाएं. उन्होंने सोयाबीन बीज का उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए. उन्होंने बताया कि टिड्डी नियंत्रण के लिए जहां गाड़ियां पहुंचने में मुश्किल होती है वहां ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव किया जाएगा. इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर ली जाएगी.  कृषि आयुक्त डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि इस वर्ष पहली बार 11 अप्रेल को राज्य में टिड्डी दलों का प्रवेश हुआ था और अब तक जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, नागौर, अजमेर, पाली, बीकानेर, सिरोही एवं भीलवाड़ा जिलों में लगभग 37 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी का प्रभाव रहा है.

खरीफ-2019 तक के सभी बीमा क्लेम का भुगतान जून अंत तक:
यहां प्रभावी ढंग से नियंत्रण कर भविष्य के लिए राज्य सरकार की ओर से योजनाबद्ध ढंग से प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि टिड्डियों के नियंत्रण एवं सर्वेक्षण के लिए 70 बोलेरो, 45 बोलेरो केम्पर यूटिलिटी वाहन, 600 ट्रेक्टर माउंटेड स्प्रेयर मय ट्रेक्टर एवं 3 हजार 200 ट्रेक्टर मय पानी के टैंकरों के उपयोग की स्वीकृति जारी की जा चुकी है. वाहनों का किराये पर संचालन के लिए 5 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है. किसानों को शत प्रतिशत अनुदान पर पौध संरक्षण रसायन उपलब्ध कराने के लिए 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. गत वर्ष की तरह इस साल भी खरीफ के लिए खाद-बीज की पर्याप्त व्यवस्था है. मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप पात्र किसानों को निःशुल्क बीज उपलब्ध कराने के लिए 15 हजार क्विंटल संकर बाजरा बीज के लिए जिलेवार आपूर्ति एवं वितरण आदेश जारी किए जा चुके हैं. साथ ही 25 हजार क्विंटल मक्का बीज की व्यवस्था की जा रही है. डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि फसल बीमा योजना में खरीफ-2019 तक के सभी बीमा क्लेम का भुगतान जून अंत तक कर दिया जाएगा. 

सीएम योगी ने प्रियंका गांधी का प्रस्ताव किया स्वीकार, मजदूरों के लिए एक हजार बसें भेजने का किया था अनुरोध

और पढ़ें

Most Related Stories

किसानों को किया जा चुका 2 हजार 261 करोड़ रुपए के बीमा क्लेम का वितरण- कटारिया

किसानों को किया जा चुका 2 हजार 261 करोड़ रुपए के बीमा क्लेम का वितरण- कटारिया

जयपुर: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ-2019 अन्तर्गत प्रदेश में 13 लाख पात्र बीमित किसानों को 2 हजार 261 करोड़ रुपए के बीमा क्लेम का वितरण किया जा चुका है. यह कुल क्लेम का 91 प्रतिशत है. कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया ने बताया कि फसल बीमा योजना अन्तर्गत खरीफ-2019 में कुल 2 हजार 496 करोड़ रुपए के बीमा क्लेम का आंकलन किया गया था, जिसमें से 2 हजार 261 करोड़ रुपए के क्लेम का वितरण किया जा चुका है. यह कुल क्लेम का लगभग 91 प्रतिशत है, जिससे 13 लाख बीमित काश्तकार लाभान्वित हुए हैं.

हरियाणा, यूपी और दिल्ली के लिए एक पास हो, हफ्ते भर में बनाई जाए व्यवस्था- सुप्रीम कोर्ट 

राज्य के 14 जिलों में खरीफ-2019 का पूरा क्लेम वितरित कर दिया गया:
कटारिया ने बताया कि राज्य के 14 जिलों में खरीफ-2019 का पूरा क्लेम वितरित कर दिया गया है. अन्य 14 जिलों में भी कुल देय बीमा क्लेम में से अधिकांश का भुगतान किया जा चुका है. शेष पांच जिलों के बकाया बीमा क्लेम के भुगतान की कार्यवाही की जा रही है, जिससे जल्द पात्र बीमित काश्तकारों को उनका बीमा क्लेम मिल जाएगा. 

Rajasthan Corona Updates: पिछले 12 घंटे में 68 नये पॉजिटिव केस आया सामने, अब भरतपुर जिला बना कोरोना का नया हॉटस्पॉट  

बीमा कम्पनियों से 2 हजार 386 करोड़ रुपए का भुगतान करवाया: 
कृषि मंत्री ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान विपरीत परिस्थितियों में भी राज्य सरकार के विशेष प्रयासों से 13 लाख बीमित किसानों को बीमा कम्पनियों से 2 हजार 386 करोड़ रुपए के बीमा क्लेम का भुगतान करवाया गया है. कृषि मंत्री कटारिया ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अन्तर्गत 1 जनवरी 2019 से अब तक 6 हजार 41 करोड़ रुपए के बीमा क्लेम का वितरण किया जा चुका है, जिससे 42 लाख 31 हजार पात्र बीमित किसानों को राहत मिली है. 


 

देशी नस्ल के गौवंश की डेयरी स्थापना के लिए मिलेगा 90 प्रतिशत तक ऋण, चुकाने पर 30 प्रतिशत सब्सिडी

देशी नस्ल के गौवंश की डेयरी स्थापना के लिए मिलेगा 90 प्रतिशत तक ऋण, चुकाने पर 30 प्रतिशत सब्सिडी

जयपुर: जिला कलक्टर एवं जिला गौपालन समिति के अध्यक्ष डॉ. जोगाराम ने बताया कि ‘‘कामधेनू डेयरी योजना’’ के अन्तर्गत स्वरोजगार के लिए नवयुवक, महिलाएं, इच्छुक पशुपालक, गौ पालक, कृषक पशुपालन विभाग की प्रजनन नीति अनुसार दूधारू देशी गौवंश का संर्वधन कर देसी उन्नत गौवंशों की डेयरी लगा सकते हैं. डेयरी लगाने के लिए इच्छुक एवं पात्रता रखने वाले अभ्यर्थियों को 30 जून 2020 तक निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना होगा. 

Coronavirus Vaccine: रूस ने किया कोरोना वैक्सीन तैयार करने का दावा, सैनिकों पर हो रहा है ट्रायल 

चयनित अभ्यर्थियों के माध्यम से कामधेनू डेयरियां खोली जाएंगी:
डॉ.जोगाराम ने बताया कि ‘‘कामधेनू डेयरी योजना’’ के अन्तर्गत जिले में पशुपालन विभाग की प्रजनन नीति के अनुरूप वित्तीय वर्ष 2020-21 में सरकार द्वारा चयनित अभ्यर्थियों के माध्यम से कामधेनू डेयरियां खोली जाएंगी. इस डेयरी में उच्च दुग्ध क्षमता वाली एक ही नस्ल के 30 गौवंश होगें.

90 प्रतिशत राशि बैंक लोन के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी: 
उन्होंने बताया कि डेयरी खोलने के लिए लाभार्थी के पास पर्याप्त स्थान एवं हरा चारा उत्पादन करने के लिए कम से कम एक एकड़ भूमि होनी चाहिए. इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 36 लाख रूपये निर्धारित की गई है. इसमें लाभार्थी को 10 प्रतिशत राशि स्वयं द्वारा वहन करनी होगी एवं 90 प्रतिशत राशि बैंक लोन के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी. डेयरी योजना अन्तर्गत लिया गया ऋण चुकाए जाने पर राज्य सरकार द्वारा 30 प्रतिशत सब्सिडी भी दी जाएगी. 

चयनित पशुपालकों को 30 गौवंश के लिए ऋण दिया जाएगा:
जिला कलेक्टर ने बताया कि पशुपालक, गोपालक, कृषकों, नवयुवकों, महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए एवं उन्नत गौवंशों से पशुपालकों की आय बढा़ने के लिए कामधेनू डेयरी योजना में चयनित पशुपालकों को 30 गौवंश के लिए ऋण दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि सफल आवेदक को बैंक के माध्यम से ऋण प्रदान किए जाने के बाद डेयरी प्रबंधन एवं गौ उत्पादों के संबंध में उन्हें प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन भी दिया जायेगा. लाभार्थी को इस क्षेत्र में कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना आवश्यक हैं. साथ ही डेयरी का संचालन स्थानीय निकाय के प्रतिबंधित सीमा क्षेत्र से बाहर किया जायेगा. 

Cyclone Nisarga: महाराष्ट्र से टकराया चक्रवाती तूफान निसर्ग, 129 साल बाद इतना भयानक तूफान  

प्रथम चरण में एक ही नस्ल की 15 गौवंश क्रय करने होंगे:
संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग जयपुर उम्मेद सिंह ने बताया कि कामधेनू डेयरी योजना के अन्तर्गत इच्छुक पशुपालक, गौपालक, कृषक, नवयुवक, महिलाओं को 30 जून 2020 तक निर्धारित प्रपत्र में कार्यालय संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग को आवेदन करना होगा. प्रथम चरण में देशी नस्ल की गायें जिनकी उम्र 5 वर्ष या दो ब्यांत (जो भी कम हो) होनी चाहिए एवं दुग्ध उत्पादन 10-12 लीटर प्रतिदिन होना चाहिए. प्रथम चरण में एक ही नस्ल की 15 दुधारू गाय एवं इसके 6 महीने बाद द्वितीय चरण में 15 देशी गौवंश क्रय करने होंगे. योजना के बारे में अधिक जानकारी एवं आवेदन पत्र विभाग की वेबसाइट https://gopalan.rajasthan.gov.in/ से डाउनलोड कर प्राप्त किए जा सकते हैं. 

जैसलमेर में टिड्डी का टेरर, जून-जुलाई और अगस्त में पाक से बड़े टिड्डी हमले की चेतावनी

जैसलमेर में टिड्डी का टेरर, जून-जुलाई और अगस्त में पाक से बड़े टिड्डी हमले की चेतावनी

जैसलमेर: भारत पाक सीमा से सटे सरहदी जिले में जैसलमेर में एक बार फिर टिड्डी के हमले होने शुरू हो गए जिससे एक बार फिर से टिड्डी को लेकर चिंता सताने लगी है की पिछले साल की भाति इस बार भी कहर ना बरपा दें. एक तरफ इस बार देश में कोरोना के कहर बरपाया हुआ है वहीं दूसरी तरफ टिड्डी दल फिर से अटैक कर रहे हैं. 

Rajasthan Corona Updates: राजस्थान में कोरोना मौतों का दोहरा शतक ! पिछले 12 घंटे में 2 मौतें, 171 नए पॉजिटिव आए सामने

टिड्डी दल के हमले ने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया: 
सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में टिड्डियों की आफत ने एक बार पुनः दस्तक दी है. जैसलमेर सीमा क्षेत्र धनाना की ओर से गत रविवार को आए टिड्डी दल का जैसलमेर एयरपोर्ट मार्ग पर पड़ा उड़ा ले जाने के बाद सफाया किया इसी दल से अलग हुए एक छोटे दल लाणेला गांव के पास पड़ाव किया था वहां भी उन नियंत्रण की कार्रवाई करने का दावा सरकारी तंत्र की ओर से किया है. टिड्डी चेतावनी संगठन के राजेश कुमार ने बताया जैसलमेर एयरपोर्ट मार्ग पर 3 गुना 4 किलोमीटर की लंबाई वाले दल पर नियंत्रण के लिए लगातार प्रयास किए गए , वहीं रामदेवरा ग्राम पंचायत टिड्डी दल के हमले ने किसानों की चिंता को बढ़ा दिया क्षेत्र में पेड़ पौधे वनस्पति किसानों के खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं फिर की ढाणी के आसपास क्षेत्र में करीब 3 किलोमीटर की परिधि में बताया कि आसमान में उड़ता नजर आया.

पुलिसवाले ने ही की पुलिसवाले से ठगी, खुद का वीडियो बनाकर किया सोशल मीडिया पर वायरल 

टिड्डी अटैक से सरकार और जिला प्रसाशन चिंतित:
जैसलमेर में लगातार टिड्डी अटैक से सरकार और जिला प्रसाशन चिंतित है. राजस्थान में प्रवेश करने से पहले टिड्डियों के ये दल पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी भारी तबाही मचा चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, चार करोड़ की संख्या वाला टिड्डियों का एक दल 35 हजार लोगों के लिए पर्याप्त खाद्य को समाप्त कर सकता है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जून में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है. इस बार टिड्डी के कहर को खत्म करने के लिए विभाग दवरा पुख्ता इंतजाम किये है.

सहकारिता मंत्री आंजना ने लिखा केंद्रीय मंत्री तोमर को पत्र, समर्थन मूल्य पर होने वाली जींस खरीद का लाभ समस्त किसानों को देने का किया आग्रह

सहकारिता मंत्री आंजना ने लिखा केंद्रीय मंत्री तोमर को पत्र, समर्थन मूल्य पर होने वाली जींस खरीद का लाभ समस्त किसानों को देने का किया आग्रह

जयपुर: सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि समर्थन मूल्य पर होने वाली जिंस खरीद का लाभ समस्त किसानों को मिलना चाहिए. केन्द्र सरकार इस सम्बन्ध में नीति बनाये कि समर्थन मूल्य की खरीद में प्रत्येक किसान से एक निश्चित मात्रा में उपज की खरीद हो. 

Rajasthan Corona Updates: राजस्थान में कोरोना मौतों का दोहरा शतक ! पिछले 12 घंटे में 2 मौतें, 171 नए पॉजिटिव आए सामने

किसानों का बहुत बड़ा तबका सरकार की योजना से वंचित:  
सहकारिता मंत्री ने बताया की भारत सरकार द्वारा खरीफ फसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि स्वागत योग्य कदम है और इसका फायदा किसानों को मिलेगा. उन्होनें बताया कि केन्द्र सरकार किसानों की आय दोगुना करना चाहती है वहीं दूसरी तरफ किसानों का बहुत बड़ा तबका सरकार की योजना से वंचित है. ऐसे में समान नीति बनाकर सभी किसानों को लाभांवित किया जाये.

पुलिसवाले ने ही की पुलिसवाले से ठगी, खुद का वीडियो बनाकर किया सोशल मीडिया पर वायरल 

10 से 20 प्रतिशत किसान ही अपनी उपज एमएसपी पर बेच पाते हैं:
आंजना ने बताया कि समर्थन मूल्य खरीद में किसी भी राज्य की उपज का 25 प्रतिशत ही खरीदा जाता है. केन्द्र सरकार द्वारा इस नियम से 10 से 20 प्रतिशत किसान ही अपनी उपज एमएसपी पर बेच पाते हैं. ऐसे में किसानों का बड़ा वर्ग बाजार में ओने-पोने दाम पर फसल बेचने को मजबूर होता है, और उसकी आय में बढ़ोतरी नही हो पाती है. अतः कोरोना महामारी देखते हुए एमएसपी का लाभ सभी किसानों को मिले इसके लिए केन्द्र सरकार को शीघ्र कदम उठाने चाहियें. 

जैसलमेर: 2 ग्राम टिड्डी का टेरर जारी, विभाग ने रात-भर चलाया अभियान

 जैसलमेर: 2 ग्राम टिड्डी का टेरर जारी, विभाग ने रात-भर चलाया अभियान

जैसलमेर: भारत पाक सीमा से सटे सरहदी जिले में जैसलमेर में एक बार फिर टिड्डी के छोटे छोटे हमले होने शुरू हो गए जिससे एक बार फिर से टिड्डी को लेकर चिंता सताने लगी है की पिछले साल की भाति इस बार भी कहर ना बरपा दें. एक तरफ इस बार देश में कोरोना के कहर बरपाया हुआ है. वहीं दूसरी तरफ टिड्डी दल फिर से अटैक कर रहे हैं. सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में टिड्डियों की आफत ने एक बार पुनः दस्तक दी है. सोमवार शाम जैसलमेर में टिड्डी के बड़े दल ने धावा बोल दिया जिस पर जिला कलक्टर की गंभीरता से रात भर टिड्डियों को नियतंत्राण की कार्रवाई को अंजाम दिया गया. 

Rajasthan Corona Updates: पिछले 12 घंटे में 4 मौतें, 149 नये पॉजिटिव आए सामने 

लाखों की संख्या में टिड्डियों को नष्ट किया गया: 
जैसलमेर के एयरपोर्ट रोड के आस पास क्षेत्र इलाके में टिड्डी ने पड़ाव डाला जिस पर टिड्डी नियंत्रण विभाग और कृषि विभाग ने रात-भर रेस्क्यू अभियान चलाया गया, जिस पर लाखों की संख्या में टिड्डियों को नष्ट किया गया. जैसलमेर जिले में टिड्डियों पर नियंत्रण के लिए युद्धस्तर पर प्रयास जारी हैं. टिड्डियों पर नियंत्रण की दृष्टि से जिला प्रशासन के निर्देशों पर टिड्डी नियंत्रण सहित संबंधित विभागों की ओर से टिड्डी प्रभावित क्षेत्रों में कीटनाशकों के व्यापक स्प्रे की वजह से टिड्डियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है. फिर भी जैसलमेर के आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र में टिड्डी के दल देखें गए. 

भारतीय सेना को मिली बड़ी कामयाबी, LoC पर घुसपैठ कर रहे तीन आतंकियों को किया ढेर 

आज से किसानों के लिए उपज रहन ऋण वितरण योजना का शुभारंभ, 25 हजार किसानों को मिलेगा लाभ

आज से किसानों के लिए उपज रहन ऋण वितरण योजना का शुभारंभ, 25 हजार किसानों को मिलेगा लाभ

जयपुर: सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने बताया कि 1 जून को सभी जिलों में ग्राम सेवा सहकारी समितियां किसानों को रहन ऋण वितरण कर उपज रहन ऋण योजना का शुभारंभ करेगी. कोविड-19 महामारी के दौर में किसानों को कम दामों पर फसल नहीं बेचनी पड़े इसके लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 3 प्रतिशत ब्याज दर पर उपज रहन ऋण देने का फैसला किया है. इसे अमलीजामा देते हुए जून माह में 25 हजार किसानों को योजना के तहत लाभ प्रदान करने का लक्ष्य रखा हैं.

अब पोकरण में लगाई कांस्टेबल ने फांसी, कारणों का नहीं हुआ खुलासा 

किसान को अपनी उपज का 70 प्रतिशत ऋण मिलेगा:
आंजना ने बताया कि ग्राम सेवा सहकारी समितियों के सदस्य लघु एवं सीमान्त किसानों को 1.50 लाख रूपये तथा बड़े किसानों को 3 लाख रूपये रहन ऋण के रूप में मिलेंगे. किसान को अपनी उपज का 70 प्रतिशत ऋण मिलेगा. इससे किसान की तात्कालिक वित्तीय आवश्यकताएं पूरी होगी. बाजार में अच्छे भाव आने पर किसान अपनी फसल को बेच सकेगा. उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष कृषक कल्याण कोष से 50 करोड रूपये का अनुदान इस योजना के लिए किसानों को मिलेगा. प्रमुख सचिव सहकारिता एवं कृषि नरेश पाल गंगवार ने बताया कि योजना में पात्र समितियों का दायरा बढ़ाकर इसे 5500 से अधिक किया गया है. 

 Lockdown 5.0: Unlock 1 होने का आगाज, राजस्थान में मिलेंगी कई तरह की छूट, ये अब भी बंद रहेंगे 

किसान को रहन ऋण देने की राजस्थान की यह विशेष पहल:
भारत में सबसे कम ब्याज दर 3 प्रतिशत पर किसान को रहन ऋण देने की राजस्थान की यह विशेष पहल है. जो किसानों एवं समितियों की आय में वृद्धि करेगी. अधिक से अधिक पात्र किसानों को उपज रहन ऋण देकर उनकी तात्कालिक आवश्यकता को पूरा करने में सहकारी समितियां मदद करेगी. गंगवार ने बताया कि सरकार की मंशा है कि प्रतिवर्ष 2 हजार करोड़ रूपये रहन ऋण के रूप में किसानों की मदद की जाए. जिसे मूर्त रूप दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस कार्य में लगे कार्मिकों के लिए भी प्रोत्साहन योजना लाई जाएगी. जिलों के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिए गए है कि  रहन ऋण वितरण कर किसानों को लाभान्वित किया जाए.

नहरी किसानों के लिए राहत की खबर, आज से 30 जुलाई तक मिलेगा खरीफ का पानी

नहरी किसानों के लिए राहत की खबर, आज से 30 जुलाई तक मिलेगा खरीफ का पानी

जैसलमेर: भारत पाक सीमा से सटे सरहदी जिले जैसलमेर के नहरी किसानों के लिए अच्छी खबर है कि अब उन्हें आगामी एक महीने तक खरीफ की फसलों के लिए पानी दिया जाएगा. हालांकि पहले सरकार द्वारा रेगुलेशन के तहत 26 अप्रैल से 30 मई तक पानी दिया जाना था, लेकिन रेगुलेशन में संशोधन करते हुए सरकार ने 30 मई से आगामी 30 जुलाई तक किसानों को खरीफ की फसल व पेयजल के लिए पानी उपलब्ध करवाया जाएगा. 

Coronavirus Vaccine बनाने में अब एक और कंपनी ने जगाई दुनिया की उम्मीदें, अक्टूबर के अंत तक हो सकती है तैयार

सिंचाई के लिए 30 मई से 30 जुलाई तक पानी दिया जाएगा:
इंदिरा गांधी नहर परियोजना की नहरों को खरीफ फसलों के दौरान सिंचाई के लिए 30 मई से 30 जुलाई तक पानी दिया जाएगा. नहरों के 4 समूह में से इन अवधि में दो समूह चलाएं जाएंगे. जिसमें जैसलमेर व पोकरण भी शामिल है. इसके साथ ही बाड़मेर लिफ्ट परियोजना के लिए भी पानी छोड़ा जाएगा. विभाग ने काश्तकारों से अपील की है कि सिंचाई पानी की मात्रा को ध्यान में रखते हुए कम पानी के उपयोग वाली फसलों की सिंचाई करे. इंदिरा गांधी नहर परियोजना जैसलमेर संभाग में बुर्जी 1254 मुख्य नहर के नीचे बारी प्रणाली, द्वितीय चरण के रेगुलेशन के लिए जल नहरों में सिंचाई के लिए दिया जाएगा. नहरबंदी के बाद अब किसानों को सिंचाई के लिए पानी रविवार से नियमित रूप से मिलेगा.

जयपुर एयरपोर्ट से आज 20 में से 12 फ्लाइट रद्द, 6 दिन बाद एयरलाइन्स पहुंची पहले दिन के संचालन पर 

किसानों ने भी खरीफ की बुआई की तैयारियां शुरू कर दी:
अब सिंचाई के लिए इंदिरा गांधी मुख्य नहर से जुड़ी नहरों के चार में दो समूह में पानी चलाया जाएगा ताकि खरीफ फसल की बुआई की जा सके. नहरों में दो समूह में चलने वाला पानी एक समूह में साढ़े आठ दिन तक चलता है. इसके बाद दूसरा समूह शुरू होता है. इसी क्रम से नहरी पानी का शिड्यूल 34 दिनों तक निर्धारित होता है. उधर सिंचाई पानी का बेसब्री से इंतजार कर रहे किसानों ने भी खरीफ की बुआई की तैयारियां शुरू कर दी है. पंजाब के साथ अब राजस्थान सीमा में भी नहर की मरम्मत नहीं होगी क्योंकि 4 समूह में पानी देने के लिए नहर में हरिके से 11 हजार 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाना है. इतने पानी में नहर का जलस्तर ज्यादा रहेगा, जिससे किसी भी प्रकार की मरम्मत संभव नहीं है.  

जून माह में 25 हजार किसानों को उपज रहन ऋण योजना से जोड़ने का लक्ष्य, फसल रहन ऋण के लिए 5500 ग्राम सेवा सहकारी समितियां को दी पात्रता

जून माह में 25 हजार किसानों को उपज रहन ऋण योजना से जोड़ने का लक्ष्य, फसल रहन ऋण के लिए 5500 ग्राम सेवा सहकारी समितियां को दी पात्रता

जयपुर: 1 जून से शुरू हो रही उपज रहन ऋण योजना के तहत जून माह में राज्य के 25 हजार किसानों को जोड़कर लाभ प्रदान किया जायेगा. राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से किसानों के उपज बेचान से जुड़े हितों की सुरक्षा सम्भव हो सके. उन्होंने कहा कि योजना में पात्र समितियों का दायरा बढ़ाकर इसे 5500 से अधिक किया गया है ताकि अधिक से अधिक किसान लाभान्वित हो सके. 

मुख्यमंत्री गहलोत का बड़ा फैसला, पेयजल के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को 25  लाख रुपए स्वीकृत 

किसान को उसकी उपज का 70 प्रतिशत ऋण मिलेगा:
आज सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव और रजिस्ट्रार नरेश पाल गंगवार पंत कृषि भवन में उपज रहन ऋण योजना, फसली ऋण वितरण एवं अन्य संबंधित बिन्दुओं पर जिलों में पदस्थापित सहकारिता के अधिकारियों एवं व्यवस्थापकों को विडियों काफ्रेंसिंग के माध्यम से सम्बोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि लघु एवं सीमान्त किसानों को 1.50 लाख रूपये एवं बड़े किसानों को 3 लाख रूपये रहन ऋण के रूप में देने के लिए योजना जारी की है. इसमें किसान को उसकी उपज का 70 प्रतिशत ऋण मिलेगा. किसान बाजार में अच्छे भाव आने पर अपनी फसल को बेच सकता है. यह योजना किसान की तात्कालिक वित्तीय आवश्यकता को पूरी करने तथा कम दामों में फसल बेचने की मजबूरी में मददगार साबित होगी. 

कार्मिकों के लिए आयेगी प्रोत्साहन स्कीम:
प्रमुख सचिव ने कहा कि राजस्थान की यह योजना भारत में सबसे कम ब्याज दर 3 प्रतिशत पर किसान को रहन ऋण देने की विशेष पहल है. जो किसानों एवं समितियों की आय में वृद्धि करेगी. उन्होंने निर्देश दिये कि सहकारी समितियां अपने आस-पास के गोदामों को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक किसानों को उपज रहन ऋण देकर उनकी तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करें. योजना में अच्छे कार्य करने वाली समितियों के कार्मिकों के लिए शीघ्र ही एपेक्स बैंक द्वारा प्रोत्साहन स्कीम जारी की जायेगी. 

4.44 लाख मै.टन सरसों एवं चना की हुई खरीद: 
गंगवार ने कहा कि कोविड-19 महामारी में केवीएसएस एवं जीएसएस घोषित गौण मण्डियां बहुत अच्छे से कार्य कर रही है और 427 गौण मण्डियां ओपरेशनल होकर किसानों को अपने खेत के नजदीक ही उपज बेचान की सुविधा दे रही है. उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर खरीद में जीएसएस को जोड़ने से किसानों को अपने नजदीकी उपज बेचान की सुविधा मिलने से खरीद कार्य में गति आयी है. जो खरीद पहले 58 दिन में होती थी, आज वह 26 दिन में ही पूरी हो रही है तथा किसानों के खाते में तीन से चार दिन में भुगतान भी हो रहा है. 27 मई तक 1 लाख 76 हजार 434 किसानों से 4 लाख 44 हजार 628 मै.टन सरसों एवं चना की खरीद हो चुकी है, जिसकी राशि 2 हजार 64 करोड़ रूपये है. इसमें से 1 हजार 723 करोड़ रूपये का भुगतान किसानों को हो चुका है. 

VIDEO: जून में होगी 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं, 31 मई के बाद भी जारी रहेगा रात्रिकालीन कर्फ्यू  

4295 करोड़ रूपये फसली ऋण का हुआ वितरण: 
राज्य के 13 लाख 18 हजार 177 किसानों को 4 हजार 295 करोड़ रूपये का सहकारी फसली ऋण का वितरण हो चुका है. उन्होंने भरतपुर, जैसलमेर, हनुमानगढ़, बारां एवं जालौर जिलों में ऋण वितरण की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि संबंधित जिले इस कार्य में गति लाये और शीघ्र फसली ऋण वितरण करे. गंगवार ने कहा कि हमारी मंशा है कि ग्राम सेवा सहकारी समिति को किसान की समस्या समाधान एवं सुविधाओं के लिए सिंगल विड़ों के रूप में विकसित किया जाये. 
 

Open Covid-19