आहोर विधानसभा: बाहरी उम्मीदवार को सिरे से खारिज करने के 'मूड' में जनता 

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/09/30 10:29

आहोर (विक्रमसिंह करणोत)। विधानसभा चुनावों का बिगुल बस कुछ ही दिनों में बजने वाला है। ऐसे में मतदाताओं के मूड़ का जिक्र ना हो ये कैसे संभव है। बात अगर जालोर जिले की आहोर विधानसभा क्षेत्र की करें तो दोनों ही बड़े राजनैतिक दलों में टिकट पाने वालों ने जयपुर दिल्ली के चक्कर काटने शुरू कर दिए हैं। वहीं क्षेत्र की जनता ने इस बार बाहरी उम्मीदवार को सिरे से खारिज करने का मूड़ बना लिया है। 

आहोर विधानसभा क्षेत्र के ज्यादातर मतदाताओं का मानना है कि पिछले 25 वर्षों से दोनों ही पार्टियों ने बाहरी उम्मीदवार को टिकिट देकर स्थानीय नेताओं को नज़र अंदाज़ किया है। 25 वर्षो से जो भी यहां से विधायक बना वो जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा ओर इसी के चलते क्षेत्र की आम समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। आहोर क्षेत्र की जनता को यह महसूस हो रहा है कि बाहरी नेताओं के विधायक बनने से क्षेत्र का विकास रुक सा गया है। 

मतदाताओं के साथ साथ पार्टियों के स्थानीय वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी बाहरी उम्मीदवारों को लेकर जोरदार नाराज़गी है। हालांकि पार्टियों के कार्यकर्ता कैमरे पर तो इस विषय पर खुल कर तो नहीं बोल रहे हैं। पर पार्टी की बैठकों में जोरदार तरीके से बाहरी प्रत्याशियों का विरोध भी कर रहे हैं। ऐसे में अगर इस बार भी पार्टियां बाहरी प्रत्याशियों को थोपने की जिद्द करती है तो इसके परिणाम कुछ अलग होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में कोई स्थानीय निर्दलीय आहोर विधानसभा क्षेत्र से बाजी मार जाए। 

1952 के पहले विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक हुए 14 विधानसभा चुनावों में आहोर की जनता ने कई पार्टियों को यहां से विधायक बनने का अवसर दिया है। पर आज तक यहां से कोई निर्दलीय विधायक बनने में सफल नही हुआ है। पर इस बार भी पार्टियां बाहरी को प्रत्याशी बनाती है तो निर्दलीय विधायक आहोर के खाते में आ सकता है।

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