झालाना लैपर्ड प्रोजेक्ट में एक जिप्सी संचालक ने तोड़े सारे नियम कायदें

Nirmal Tiwari Published Date 2019/03/23 11:16

जयपुर। पिछले 14 महीने में पांच बघेरों की मौत होने के बाद भी झालाना प्रोजेक्ट लैपर्ड प्रशासन लापरवाह बना हुआ है। वन्यजीव संरक्षण के नाम पर माफिया में तब्दील होते जा रहे कुछ लोगों के हाथ की कठपुतली बने वन अधिकारियों ने एक तरह से प्रोजेक्ट लैपर्ड इन लोगों को मनमानी कने के लिए सौंप दिया है। आज भी यहां कुछ ऐसा ही हुआ जब राज्य सरकार को नीचा दिखाया गया और बुकिंग में मनमानी की गई। सच से पर्दा उठाती 'फर्स्ट इंडिया न्यूज़' की रिपोर्ट:

कुछ ही दिनों में शहर के बीच लैपर्ड सफारी होने चलते देशभर में मशहूर हुआ झालाना का प्रोजेक्ट लैपर्ड अब अपनी छवि खोता जा रहा है। वन्यजीव संरक्षण के नाम पर चांदी काट रहे कुछ लोगों के हाथ की कठपूतली बने प्रोजेक्ट लैपर्ड में न तो राज्य सरकार की चल रही और न ही वन अधिकारियों की। यहां सबकुछ चंद लोगों की इच्छा से ही हो रहा है। ताजा घटनाक्रम की बात करें तो आज सुबह ही झालाना लैपर्ड प्रोजेक्ट में एक जिप्सी संचालक ने न केवल सारे नियम कायदे तोड़ दिए वरन जो काम प्रदेश के मुख्यमंत्री के स्तर पर होना है उसे भी खुदने ही कर डाला। जी हां...झालाना प्रोजेक्ट लैपर्ड में पिछले दो महीने से पांच ईलेक्ट्रिक व्हीकल्स लाए गए हैं जिन्हें लेकर काफी विवाद हुआ। इन ई व्हीकल्स के उदघाटन के लिए मुख्यमंत्री से समय मांगा गया था लेकिन इसी बीच आचार संहिता लग गई और इन व्हीकल्स को खड़ा कर दिया गया, लेकिन आज रोहित नाम के एक जिप्सी संचालक के ई व्हीकल से उसके चहेतों को सफारी करवाई गई। 

मतलब सीधा सा है जिन व्हीकल्स का उद्घाटन मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तावित है उनमें से एक व्हीकल को आज एक जिप्सी संचालक ने वन अधिकारियों की मिलीभगत से जंगल में सफारी के लिए भेज दिया। मामला सिर्फ यहीं खत्म नहीं होता...इस रोहित के मित्रों को आज सुबह झालाना की बुकिंग में नियम विरुद्ध तरीके से बैठा देखा गया। इस दौरान पर्यटक बुकिंग के बाहर लाइन में खड़े होकर टिकट लेने का इंतजार करते रहे लेकिन बुकिंग क्लर्क अंदर रोहित के मित्रों के टिकट बनाते रहे और पर्यटकों निराश लौटना पड़ा। दरअसल झालाना प्रोजेक्ट लैपर्ड में चार पांच लोगों को पूर्व मंत्री गजेंद्रसिंह खींवसर ने इतनी ज्यादा खुली छूट दे रखी थी कि वे अब वन अधिकारियों तक पर भारी पड़ रहे हैं। हालात यहां तक खराब हैं कि वन अधिकारी चाहकर भी इन लोगों को मनमानी से नहीं रोक सकते। कुछ तो विभाग के उच्चाधिकारियों के रिश्तेदार भी हैं जिनसे कुछ कहना प्रोजेक्ट के अधिकारियों के लिए संभव नहीं। कुला मिलाकर कहा जा सकता है कि झालाना प्रोजेक्ट जितनी तेजी से विश्व पटल पर उभरा उतनी तेजी से अब बदनाम होता जा रहा है। इसलिए बेहतर होगा सरकार प्रोजेक्ट की बेहतरी के लिए जल्द कोई ठोस कदम उठाए।
 

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