VIDEO- Corona Impact: सभी स्मारक, नेशनल पार्क, सफारी, मेले बंद, 10 लाख से ज्यादा लोग हुए बेरोजगार

VIDEO- Corona Impact: सभी स्मारक, नेशनल पार्क, सफारी, मेले बंद, 10 लाख से ज्यादा लोग हुए बेरोजगार

जयपुर: प्रदेश के पर्यटन पर आखिर कोरोना सी लग ही गई. कोरोना वायरस की दहशत के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला करते हुए प्रदेश के सभी किले, महल, स्मारक, नेशनल पार्क, सफारी, मेले और उत्सव तत्काल प्रभाव से बंद कर दिए हैं. अब 31 मार्च से पहले इनमें कोई भी पर्यटक गतिविधि नहीं होगी. 

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प्रदेश में पर्यटकों की गतिविधि पूरी तरह से ठप:
कोरोना वायरस से मानव जाति को सिर्फ जानकारी खतरा नहीं है बल्कि रोजी रोटी को भी खतरा हो गया है. कोरोना की चपेट में आकर चरमराए पर्यटन उद्योग की हालत इतनी खराब हो गई है कि अकेले राजस्थान की बात करें तो करीब 10 लाख से ज्यादा लोग अचानक बेरोजगार हो गए हैं. कोरोना की बढ़ती दहशत के बीच राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी किले, महल, स्मारक, नेशनल पार्क, सफारी, मेले, उत्सव और तमाम इवेंट को 31 मार्च तक के लिए प्रतिबंधित कर दिया है. इस फैसले के बाद प्रदेश में पर्यटकों की गतिविधि पूरी तरह से ठप हो गई है और जो देशी और विदेशी सैलानी राजस्थान में थे वह तुरंत प्रभाव से अपने घरों की ओर जाने के लिए निकल पड़े हैं. दरअसल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर प्रदेश में 50 या उससे अधिक लोगों के एक साथ एकत्र होने पर 31 मार्च तक प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था. इसके बाद से ही आज वन और पर्यटन विभाग ने भी बैठक कर प्रदेश में पर्यटक गतिविधि तुरंत प्रभाव से बंद करने का फैसला किया. सरकार के इस फैसले के बाद विश्व विरासत में शुमार आमेर सहित प्रदेश के सभी 6 हिल फॉर्ट्स, संग्रहालय और सभी पूरा स्मारक बंद कर दिए गए हैं. 

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घरेलू पर्यटकों ने भी राजस्थान से अपनी तमाम बुकिंग रद्द करवा दी: 
प्रदेश में छोटे-बड़े 700 से अधिक होटल हैं जिनमें पिछले एक पखवाड़े में बुकिंग 80 फ़ीसदी से सीधे 10 से 15 फ़ीसदी के स्तर पर आ गई है. ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर के पास तमाम बुकिंग रद्द हो चुकी हैं. विदेशी ही नहीं घरेलू पर्यटकों ने भी राजस्थान से अपनी तमाम बुकिंग रद्द करवा दी हैं. पैलेस ऑन व्हील्स के सत्र के शेष सात फेरे रद्द कर दिए गए हैं. राजस्थान दिवस समारोह, मेवाड़ उत्सव, गणगौर उत्सव रद्द करने का फैसला किया है. इससे पहले होली उत्सव और विल्डरनेस कांग्रेस रद्द किए जा चुके हैं. आमेर में लाइट एंड साउंड शो, कुंडा में हाथी सफारी, जयगढ़, नाहरगढ़, हवा महल, जंतर मंतर, अल्बर्ट हॉल, जंतर-मंतर, ईसर लाट, विद्याधर का बाग, सिसोदिया रानी गार्डन सहित तमाम स्मारक बंद किए गए हैं. रणथंभौर, सरिस्का, मुकंदरा, भरतपुर में घना, कुंभलगढ़, चित्तौड़, झालाना लेपर्ड सफारी को भी बंद किया गया है.

होटल इंडस्ट्री धड़ाम से नीचे आ गिरी: 
प्रदेश में पर्यटक गतिविधि बंद किए जाने से ट्रैवल ट्रेड को भारी नुकसान हुआ है और आशंका जताई जा रही है कि प्रदेश में टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़े 10 लाख से अधिक लोग बेरोजगारी की हालत में आ गए हैं. अग्रिम बुकिंग रद्द होने से जो इवेंट होने के लिए पूरी तरह तैयार थे वह रद्द हो गए हैं और आयोजकों को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है. होटल इंडस्ट्री धड़ाम से नीचे आ गिरी है, बुकिंग सर्व काली न्यूनतम स्तर पर आ गई है. राजधानी के जो स्मारक पर्यटकों से आबाद रहते थे उन पर कोरोना कर्फ्यू दिखाई दे रहा है पर्यटकों के परिवहन से जुड़े टैक्सी ड्राइवर, जिप्सी संचालक और हाथी गांव में पल रहे हाथी और महावतों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. जो वेंडर और होकर छोटे-छोटे सामान बेचकर अपने घर पर 2 जून की रोटी का इंतजाम करते थे उनके चेहरे पर निराशा के भाव साफ देखे जा सकते हैं. 

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अरबों रुपए का व्यवसाय चौपट हुआ:
कोरोना का कहर इस कदर टूटा है कि प्रदेश के पर्यटन उद्योग पर 'कोरोना सील' लग गई है. लाखों लोग बेरोजगार हुए हैं, अरबों रुपए का व्यवसाय चौपट हुआ है और ऐसी कोई उम्मीद नहीं कि अगले 1 साल में भी पर्यटन उद्योग वापस अपने पैरों पर खड़ा हो पाएगा. इंसान तो इंसान उससे जुड़े हर पहलू को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया है. उम्मीद की जानी चाहिए कि कुदरत की मेहर होगी और कोरोना से जल्दी ही देश दुनिया को छुटकारा मिलेगा. 

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