सभी राजनीतिक पार्टियों ने माना कि एम 3 श्रेणी की ईवीएम है 'फुल प्रूफ' 

Dr. Rituraj Sharma Published Date 2018/11/17 11:13

जयपुर (ऋतुराज शर्मा)। कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक पार्टियों ने यह मान लिया है कि एम 3 श्रेणी की ईवीएम फुल प्रूफ है और इसमें छेड़खानी नहीं की जा सकती। भारतीय मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओ.पी.रावत ने कहा कि अब किसी भी राजनीतिक पार्टी ने ईवीएम के बजाय बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग नहीं की। रावत ने कहा कि जब तक शिकायत नहीं होती आयोग कार्रवाई नहीं करता और कभी-कभी दंतविहीन और विषविहीन होना अच्छे लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। पत्रकारों के सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में इस बार पहली बार वोट करनेवाले 18 से 19 वर्ष के मतदाता 2.85 प्रतिशत हैं। साथ ही उन्होंने आचार संहिता में राज्य के जरूरी काम नहीं रूकें,इसके लिए सीएस की अध्यक्षता में बनाई स्क्रीनिंग कमेटी के काम को सराहते हुए कहा कि उसकी ओर से 452 में से 188 मामले आयोग को भेजे जिनमें 150 का निराकरण किया गया। 

भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओ.पी.रावत ने प्रदेश भर की चुनाव तैयारियों का 360 डिग्री रिव्यू के बाद कहा कि इस बार पहली बार ऐसा हुआ है कि जब किसी भी राजनीतिक पार्टी ने आयोग को ईवीएम वीवीपेट के बजाय बैलट पेपर से विधानसभा चुनाव कराने की मांग नहीं की। उन्होंने कहा कि ईवीएम नॉन टेम्परेबल है और प्रदेश में साढ़े सात लाख लोगों ने मॉक पोल करके यह साबित किया है। 

उन्होंने बताया कि-

—राज्य में विधानसभा चुनाव में 4 करोड 74 लाख 79 हजार 402 वोटर्स हैं जिसमें दो करोड 47 लाख से ज्यादा पुरुष वोटर्स हैं और 246 ट्रांसजेंडर्स हैं। वहीं इस बार सबसे ज्यादा 1 लाख 46 हजार सर्विस वोटर्स हैं। 
—आचार संहिता में काम नहीं रुके इसके लिए सीएस की अध्यक्षता में बनाई स्क्रीनिंग कमेटी की तारीफ करते हुए कहा कि कमेटी के पास आए 452 मामलों में दो सौ से ज्यादा मामलों के लिए यह कहा गया है कि इस पर राज्य स्तर पर ही निर्णय किए जा सकते हैं। वहीं 188मामले आयोग को भेजे गए जिसमें 150 का निराकरण कर दिया गया है।
—हालांकि उन्होंने सख्ती जताते हुए कहा कि आपराधिक केस 3 बार अखबारों में प्रकाशित करना अनिवार्य है हालांकि इनका खर्चा प्रत्याशी के खर्चे में नहीं जोड़े जाने की राजनीतिक दलों की मांग पर आयोग को फैसला करना बाकी है। उन्होंने उत्साहित होकर बताया कि इस बार 18 से 19 वर्ष के वोट करने वाले मतदाता 2.85 फीसदी होंगे। 
—उन्होंने बताया कि पार्टियों ने मांग की थी कि मतदाता सूची जो दलों को मिले वही मतदान केंद्र पर मिले,यह मांग मान ली गई है। आयोग ने इस बारे में पहले ही निर्देश दिए हैं कि वे सरकारी कर्मचारी जो किसी राजनीतिक और सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े हैं जो किसी तरह निर्वाचन को प्रभावित करते हों,उन्हें निर्वाचन प्रक्रिया से अलग किया जाए और कार्यपालना रिपोर्ट भी ले ली गई है। 

राजनीतिक दलों ने ये दिए हैं सुझाव

—कुछ दलों ने आग्रह किया कि जिन शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व ज्यादा है, वहां न्यूनतम 200 मीटर दूरी पर अस्थाई प्रचार कार्यालय नहीं खोलने के दिशा-निर्देश में शिथिलता प्रदान की जानी चाहिए। 
—प्रभावशाली लोगों द्वारा मतदाताओं को लुभाने और धमकाने आदि की प्रवृति को रोकने के लिए ठोस कार्यवाही सुनिश्चित करने की मांग की है।
—कुछ राजनीतिक दलों द्वारा यह मांग की गई कि चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की आपराधिक पृष्ठभूिम (यदि हो तो) प्रकाशित और प्रसारित करवाने के खर्च को उम्मीदवारों के चुनाव खर्च में नहीं जोड़ा जाए।  
—कुछ दलों ने यह मांग भी की कि कुछ सरकारी कार्मिक जो किसी सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं और किसी राजनैतिक दल की ओर सुझाव रखने हैं तो वे चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे कार्मिकों को चुनाव कार्य से दूर रखा जाए। 
—एक राजनीतिक दल ने आयोग से मांग की है कि धर्म के नाम पर चुनाव प्रचार के प्रयासों को रोका जाए।
—कुछ राजनीतिक दलों ने अनुमति के सिस्टम से संबंधित समस्याओं का मुद्दा उठाया और आग्रह किया कि प्रचार के लिए उपलब्ध सीमित दिनों को देखते हुए सिस्टम को व्यवस्थित करने के निर्देश दें। 
—कुछ दलों ने यह भी मांग की कि एक सुपरिभाषित प्रक्रिया और मानक प्रारूपों को जमीनी स्तर पर अपनाया जाए और यह भी तय किया जाए कि नियुक्त अधिकारी द्वारा शक्ति का दुरूपयोग ना किया जाए।
—एक दल ने मांग की कि जो सामाजिक संगठन स्वतंत्र, निष्पक्ष चुनाव की पैरवी और प्रचार करना चाहते हैं उनके पोस्टर्स को अनुमति प्रदान की जाए।
—एक राजनैतिक दल ने एक विशेष राजनैतिक दल द्वारा भामाशाह योजना से संबंधित कार्ड पर पार्टी का चिन्ह दर्शाए जाने का मुद्दा उठाया।
—एक राजनीतिक दल ने आदर्श आचार संहिता के दौरान गैर आरएएस कैडर से आईएएस में पदोन्नति का मुद्दा उठाया।
—कुछ राजनीतिक दलों ने मांग की कि शराब और धन वितरण की किसी भी आशंका को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। 
—कुछ राजनीतिक दलों ने आग्रह किया कि चुनाव आयोग निर्वाचन की प्रक्रिया या चुनाव के बाद जब्त किए गए किसी भी तरह के सामान को छुड़ाने के लिए उचित प्रक्रिया और दिशा-निर्देश जारी करे।
—एक दल ने निर्वाचन बाॅन्ड स्कीम का मुद्दा उठाया।
—राजनीतिक दलों द्वारा स्थैतिक निगरानी दलों द्वारा जन सामान्य को परेशान किये जाने के मुद्दे को उठाया गया तथा अनुरोध किया गया कि निर्वाचन व्यय माॅनिटरिंग के अंतर्गत जो जब्ती की कार्यवाही की जाती हैं, उसको मुक्त करवाने की प्रक्रिया सरल की जाये।
—राजनीतिक दलों ने प्रचार-प्रसार के लिए एक से अधिक वाहन की पूरे राज्य के लिए अनुमति देने का अनुरोध किया। 
—कुछ राजनीतिक दलों ने आयोग से आग्रह किया कि चुनाव अधिकारियों को इस बाबत दिशा-निर्देश दिए जाएं कि राजनैतिक विज्ञापनों के प्री सर्टीफिकेशन के उनके आवेदन का समयबद्ध निस्तारण किया जाए। 
—कुछ राजनैतिक दलों ने आयोग का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि कुछ निजी मीडिया उनके दल के कार्यक्रमों और नीतियों को दिखाने में भेदभाव बरत रहे हैं। इन निजी मीडिया को सभी राजनैतिक दलों को समान जगह/समय दिए जाने के लिए निर्देशित किया जाए।
—राजनीतिक दलों ने मांग की है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि मतदान दिवस के दिन अपनी ड्यूटी पर तैनात रोडवेज बसों के चालक और परिचालक तथा लघु उद्योगों के कार्मिक भी अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। 
—एक राजनीतिक दल ने शिकायत की है कि मतदान केंद्र पर यदि पोलिंग एंजेंट उपलब्ध नहीं होते हैं तो चुनाव अधिकारी निकटतम मतदान केंद्र से पोलिंग एजेंट को नियुक्त करने से मना कर देते हैं। 

यह निरोधात्मक कार्रवाइयां की गई हैं-
—साढ़े 3 करोड़ कीमत की अवैध शराब पकड़ी
—अवैध शराब धरपकड़ में और काम करने की जरूरत
—2018 में 11.54 करोड़ की अवैध राशि बरामद
—2018 में 3656 हथियार पकड़े गए
—पेड न्यूज में काम करने की जरूरत
—पिछली बार 2013 में 12.79 करोड़ की राशि बरामद
—पेड न्यूज के खिलाफ कार्रवाई में और काम करने की जरूरत बताई।
—रावत ने नॉन बेलेबल वारंट तामील करने में की गई कार्रवाई को असंतोषजनक बताया और कहा कि इसमें और काम करने की जरूरत है।
—उन्होंने कहा कि 36172 मतदान स्थल पर वोटर असिस्टेंस बूथ  होंगे क्योंकि पार्टियां बूथ्स के बाहर पाण्डाल लगाकर एजेंट बैठाती हैं जिसके पाण्डाल का खर्चा प्रत्याशी के खाते में जोड़ने का निर्णय किया गया है। ऐसे में खुद आयोग की ओर से वोटर असिस्टेंस बूथ की व्यवस्था की है।

उन्होंने आयोग के नख दंत विहीन के सवाल पर साफ कहा कि जब तक शिकायत नहीं होती आयोग कार्रवाई नहीं करता। साथ ही कहा कि दंत विहीन और विष विहिन होना अच्छे लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। पॉस मशीन्स में कमल के फूल से भाजपा के प्रचार होने के आरोपों को नकारते हुए आयोग की ओर से बताया गया कि यह राजनीतिक दल के सिंबल से भिन्न है। उन्होंने कहा कि योजना 3-4 सालों से जारी है और इस दरम्यान उपचुनाव भी हो चुके जिसमें भी ऐसी कोई शिकायत नहीं आई।
 

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