राज्यसभा चुनाव के बाद परवान चढ़ती आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स, अब मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का आरोप

राज्यसभा चुनाव के बाद परवान चढ़ती आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स, अब मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का आरोप

जयपुर: राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के बाद भी आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स परवान चढ़ती नजर आ रही है. अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ भाजपा विधायक अशोक लाहोटी, सुभाष पूनिया, रामलाल शर्मा और निर्मल कुमावत ने विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया है. विधायकों ने इसको लेकर विधानसभा सचिव को पत्र सौंपा है. इस पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के भी हस्ताक्षर है. 

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मुख्यमंत्री के 35 करोड़ वाले बयान को किया गया कोट: 
ऐसे में अब आखिर विशेषाधिकार हनन बनता है या नहीं इस पर विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को फैसला करना है. आरोप में मुख्यमंत्री के 35 करोड़ वाले बयान को कोट किया गया है. इस बारे में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कटारिया के कक्ष में एक बड़ी बैठक भी हुई है. 

संयम लोढ़ा ने सतीश पूनिया पर लगाया था विशेषाधिकार हनन का आरोप:
वहीं इससे पहले निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने भी बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया पर विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया. लोढ़ा ने शिकायत में कहा है कि, सतीश पूनिया ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस की बाड़ेबंदी के दौरान 23 विधायकों को वोट के बदले खान, रिको प्लॉट देने और कैश ट्रांजैक्शन से लाभान्वित किया गया है.

21 जून को विधानसभा में दी थी शिकायत:
दरअसल, कांग्रेस सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय संयम लोढ़ा ने पूनिया के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की शिकायत 21 जून को विधानसभा में दी थी. विधानसभा सचिवालय ने अध्यक्ष के समक्ष फाइल पुटअप किया था. ऐसे में अब दोनों ही मामलों में विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को फैसला करना है. 

क्या है विशेषाधिकार हनन?
देश में विधानसभा, विधानपरिषद और संसद के सदस्यों के पास कुछ विशेष अधिकार होते हैं, ताकि वे प्रभावी ढंग से अपने कर्तव्यों को पूरा कर सके. जब सदन में इन विशेषाधिकारों का हनन होता है या इन अधिकारों के खिलाफ कोई कार्य किया जाता है, तो उसे विशेषाधिकार हनन कहते हैं. इसकी स्पीकर को की गई लिखित शिकायत को विशेषाधिकार हनन नोटिस कहते हैं.

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कैसे लाया जा सकता है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव?
नोटिस के आधार पर स्पीकर की मंजूरी से सदन में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जा सकता है. विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव संसद के किसी सदस्य द्वारा पेश किया जाता है, जब उसे लगता है कि सदन में झूठे तथ्य पेश करके सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन किया गया है या किया जा रहा है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए सुनिल शर्मा रिपोर्ट

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