अलवर के किसान ने किया खेती के लिए अनूठा नवाचार, मिलेंगे ये फायदे

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/10/09 12:10

अलवर: जिले में खेती के लिए नवाचार किया गया है. यह एक इंटीग्रेटेड खेती की तरह है जिसमे पशुपालन, जैविक खेती, प्रदूषण से राहत, धुआं मुक्त चूल्हा समेत फलों वाली खेती की पैदावार और मृदा सुधार भी शामिल किया गया है. इस पूरे प्रारूप को राज बायो ऑर्गेनिक अलवर प्रारूप नाम दिया गया है. अलवर के किशनगढ़ बास क्षेत्र के शेखपुर गांव में एक किसान संजीव ने इस नवाचार को अपनाया है. सबसे पहले पशुपालन के लिए धरती से दो ढाई फीट ऊंचा एक प्लेटफार्म बनाया गया. जिसे छायादार बनाकर पशुओं को रहने लायक किया गया. जहां पशु के मल मूत्र और उन्हें नहलाने की व्यवस्था भी है. वह सभी मल मूत्र और पानी इकट्ठा होकर 1 कुंड में जाता है जहां मिथेन गैस बनती है और घर का पूरा काम इसी मिथेन गैस से जलने वाले चूल्हे पर होता है.

यहां इस नवाचार के तहत अलग-अलग 2 कुंड बनाए: 
 40- 41 दिन में पशु का मल मूत्र निकल कर वापस दूसरे कुंड में आता है यहां इस नवाचार के तहत अलग-अलग 2 कुंड बनाए गए हैं ताकि 1 कुंड भर जाए तो दूसरे में जोड़ दिया जाता है. पूरा सिस्टम ऑटोमेटिक रखा गया है जिसमें कोई न्यूनतम खर्चा भी नहीं है. कुंड से बाहर निकलने वाले जैविक खाद से एक अर्क भी निकलता है जो एक अलग कुंड में इकट्ठा होता है इस अर्क को खेत में दवा की जगह स्प्रे किया जाता है. स्प्रे करने के लिए भी एक छोटी मोटर लगाकर बोरिंग की मोटर के पाइप से जोड़ दिया जाता है और जैसे ही खेत में स्प्रिंकलर चलते हैं उसी के साथ ही अर्क भी खेत में पहुंच जाता है और बिना किसी अतिरिक्त खर्चे के फसल में इस अर्क का छिड़काव हो जाता है.

जैविक खाद से खरपतवार भी नहीं उगती: 
बूंद बूंद सिंचाई में भी यह अर्क अपने आप ही पौधों तक पहुंच जाता है. उधर अलग अलग कुंड में तैयार हुआ जैविक खाद खेतों में पहुंचाया जा सकता है किसान का यह प्लान है कि वह बड़े स्तर पर जैविक खाद का उत्पादन कर व्यापार भी कर सकता है. खास बात यह है कि इस अर्क और जैविक खाद से ना केवल खेत की मिट्टी सुधरी है बल्कि खरपतवार भी नहीं उगती है. खुले में गोबर नहीं डाला जाता जिससे मक्खी मच्छर और दूसरी बीमारियों से निजात मिलती है. पर्यावरण में फैलने वाली दुर्गंध नहीं फैलती, खेतों में नाइट्रोजन यूरिया का उपयोग नहीं किया जाता और इसी जैविक खाद से अनार की खेती की जा रही है. यह जैविक अनार दूसरे किसी भी अनार से ज्यादा बेहतर है. यहां के किसान कहते हैं कि अगर सरकार इस इंटीग्रेटेड खेती के लिए सब्सिडी देना शुरू कर दे तो लाभ का सौदा हो सकता है. अभी जितना भी खर्चा किसान ने किया है वह खुद से ही किया है. 

...अश्विनी यादव फर्स्ट इंडिया न्यूज अलवर

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