कोरोना वायरस के खौफ के बीच भीलवाड़ा में तैयार मास्क बचा रहा लोगों की जान

कोरोना वायरस के खौफ के बीच भीलवाड़ा में तैयार मास्क बचा रहा लोगों की जान

कोरोना वायरस के खौफ के बीच भीलवाड़ा में तैयार मास्क बचा रहा लोगों की जान

भीलवाड़ा: कोरोना वायरस के खौफ के बीच कपड़ा नगरी में कोरोना वायरस से बचाव के लिए तैयार किया गया भीलवाड़ा का मास्‍क दक्षिण कोरिया तक लोगों की जान बचाने में सहायक हो रहा है. भीलवाड़ा में करीब 32 हजार मास्‍क प्रतिदिन एक कपड़ा इकाई में बनकर तैयार हो रहे है. 

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प्रतिदिन 30 से 35 हजार मास्‍क ही बना पा रहे: 
टेक्‍सटाईल इंजिनियर और उद्योगपति जुगल किशोर चेमाडी ने 5 साल पहले सर्जीकल गारमेन्‍ट के साथ मास्‍क बनाने का कार्य शुरू किया था मगर चाइना के सस्‍ते माल के आगे ये उद्योग टिक नहीं पा रहा था मगर आज कच्‍चे माल की महंगी सप्‍लाई जैसी विपरित परिस्थियों में भी ये प्रतिदिन 30 से 35 हजार मास्‍क ही बना पा रहे हैं. फैक्‍ट्री सुपरवाईजर दिनेश कुमार ने कहा कि कोरोना वायरस के बढ़ने के बाद भीलवाड़ा मास्‍क की मांग बढ़ी है. फैक्‍ट्री में ओर भी मेडिकल सेक्‍टर के उपयोग में आने वाले सुरक्षा और मेडिकल स्‍टाफ के ड्रेसेज बनायी जाती है. 

करीब 1 हजार गुना हमारे मास्‍क की मांग बढ़ गयी: 
अपने पिता के साथ मास्‍क फैक्‍ट्री में कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले डायरेक्‍टर गौरव कुमार का कहना है कि मेरे पिता ने यह व्‍यवसाय ट्रेड फेयर में जाने के बाद शुरू किया और उन्‍हे वहीं से ईनोवेशन की प्रेरणा मिली थी. कोरोना वायरस के चलते करीब 1 हजार गुना हमारे मास्‍क की मांग बढ़ गयी है. कोरोना वायरस के भय ने हालात बदले है और हमें उम्‍मीद है कि आने वाले समय मास्‍क और सुरक्षा उपकरणों की मांग मेडिकल हेल्‍थ क्षैत्र में बढ़ेगी. अब तक मास्‍क बनाने के लिए चीन तकनि‍क वाली मशीन का उपयोग कर रहे थे मगर अब जर्मनी में बनी मशीन लाने की योजना बना रहे हैं. हम कोरिया के बाद अब मिडल ईस्‍ट देशों से भी हमारे पास में मास्‍क की मांग आ रही है.  

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भीलवाड़ा के उद्योगपतियों को एक नई राह दिखायी:
औद्योगिक नगरी भीलवाड़ा में फैब्रिक्‍स और सर्टिंग के परम्‍परागत उद्योग के बीच अब मेकिडल हेल्‍थ के क्षेत्र में काम आने वाले रेडिमेंट गारमेन्‍ट की मांग ने भीलवाड़ा के उद्योगपतियों को एक नई राह दिखायी है. 

...भीलवाड़ा से फर्स्ट इंडिया के लिए नवीन जोशी की रिपोर्ट

         

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