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Anant chaturdashi: आज है अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन, ये है शुभ मुहूर्त

Anant chaturdashi: आज है अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन, ये है शुभ मुहूर्त

जयपुर: आज देशभर में अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जा रहा है. आज के दिन ‘अनंत’ भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. यही नहीं आज के दिन भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन भी किया जाता है. इसी के चलते आज के दिन का महत्व बढ़ जाता है. माना जाता है कि प्रतिमा का विसर्जन करने से भगवान गणपति पुनः कैलाश पर्वत पर पहुंच जाते हैं. 

इस बार अनंत चतुर्दशी 12 सितंबर को सुबह 05:06 बजे से लगेगी और 13 सितंबर को 7:35 सुबह तक रहेगी इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी. आज के दिन लोग व्रत रखते हैं और भगवान सत्यनारायण की कथा भई सुनते हैं. इस दिन श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करना बहुत ही उत्तम माना जाता है. 
आज के दिन कलश पर अष्टदल कमल के सामान बने बर्तन पर कूश से निर्मित अनंत की स्थापना की जाती है. इसके पास कुमकुम, केसर, हल्दी रंगित चौदह गांठों वाला अनंत भी रखा जाता है. कुश के अनंत की वंदना कर के उसमें भगवान विष्णु का आवाहन तथा ध्यान कर के गंध, अक्षत, पुष्पों, धूप, दीप तथा नैवेद्य से पूजन किया जाता है. इसके बाद कथा सुनाया जाता है. अनंत देव का पुन: ध्यान मंत्र पढ़कर अपनी दाहिनी भुजा पर बांधना चाहिए. यह चौदह गांठ वाला डोरा भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला तथा अनंत फलदायक माना गया है. 

वहीं गणेश चतुर्थी को विराजमान हुए गणपति का अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन किया जाता है. इस दिन वैसे कभी भी विसर्जन कर सकते हैं लेकिन हम आपको उत्तम मुहूर्त के बारे में बता रहें हैं जिसमें गणेश विसर्जन करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है. 

सुबह 06 बजकर 08 मिनट से सुबह 07 बजकर 40 मिनट तक
शाम 04 बजकर 54 मिनट से शाम 06 बजकर 27 मिनट तक
 

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इन नियमों का करना होगा पालन:
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तीर्थ यात्रा में गांदरबल जिले में बालटाल बेस कैंप से गुफा तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर का यूज होगा. अमरनाथ यात्रा केवल उत्तरी कश्मीर बालटाल मार्ग से होकर निकलेगी. इस वर्ष किसी भी तीर्थयात्री को पहलगाम मार्ग से यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी. अधिकारियों ने यह भी तय किया गया है कि 15 दिनों के दौरान सुबह और शाम गुफा मंदिर में की जाने वाली ‘आरती’ का देशभर के भक्तों के लिए सीधा प्रसारण होगा. 

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जयपुर: शनिवार का दिन शनिदेव के पूजन का दिन है. मान्यता है की इंसान के जीवन में करे गए अच्छे और बुरे कामों का फल शनिदेव ही देते है. सभी नौ ग्रहों में सबसे ताकतवर शनि को ही माना जाता है, ऐसे में ज्योतिष अनुसार जिसकी कुंडली में शनि ग्रह की स्तिथि ठीक नहीं होती उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन वही यह ग्रह सही दशा में हो तो हर क्षेत्र में सफलता मिल सकती है. तो आइये आपको बताते हे शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय यह उपाय शनिवार को ही किये जाने चाहिये.

आज के दिन दान जरूर करें आज काले तिल, काला कपड़ा, कंबल, लोहे के बर्तन, उड़द की दाल का दान करें इससे शनिदेव खुश होंगे और फल भी देंगे.

शास्त्रों के अनुसार सरसों के तेल का दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है यह शनिदेव की प्रिय चीजों में से एक है जिन लोगों को शनि की दशा के कारण सफलता नहीं मिल पा रही है यदि वे शनिवार के दिन लोहे के बर्तन में सरसों का तेल और उसमें एक सिक्का डालकर किसी निर्धन व्यक्ति को दान करें तो उन्हें सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती है. 

बंदर हनुमान जी का रूप होते हैं तो ऐसे में बंदरों को गुड़ और चने खिलाए प्रत्येक शनिवार हनुमान चालीसा का पाठ करें हनुमान जी का पूजन करने से व्यक्ति को शनि दोषों का सामना नहीं करना पड़ता.

शनिदेव की पसंदीदा चीजों में से एक है काली उड़द की दाल शनि के प्रभाव के कारण जिन लोगों को धन संबंधी परेशानियां होती है उन्हें काली उड़द की दाल या काले तिल का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जरूर करना चाहिए इस तरह किए गए दान से आर्थिक समस्याएं समाप्त हो जाती है.

लोहा शनिदेव का बहुत अधिक प्रिय है इसलिए शनिदेव के लिए किए जाने वाले दान में लोहे के बर्तन का दान खास महत्व रखता है, शनि की दशा के प्रभाव को कम करने के लिए लोहे के बर्तनों का दान करना शुभ माना जाता है शनिवार के दिन शाम के समय किसी जरूरतमंद व्यक्ति को लोहे का बर्तन दान करना चाहिए.

काला रंग शनिदेव को बहुत अधिक प्रिय है शास्त्रों के अनुसार जो लोग शनिदेव की कृपा पाना चाहते हैं उन्हें काले रंग की वस्तुएं अर्पित करने से जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं शनिवार को काले रंग के पशु-पक्षियों को भोजन कराने और काली चीजों का दान करने से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है.   

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जयपुर: आज रात साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने वाला है. यह ग्रहण वास्तविक चंद्र ग्रहण ना होकर एक उपछाया चंद्र ग्रहण होगा. इस ग्रहण का कोई अशुभ प्रभाव नहीं माना गया. इसके साथ ही उप छाया ग्रहण का कोई सूतक भी नहीं लगता है. आज लगने वाला उपछाया चंद्र ग्रहण रात में 11 बजकर 11 मिनट से शुरू होगा और रात में 2 बजकर 34 मिनट पर खत्म होगा. ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं जो चंद्रग्रहण के बाद करना शुभ माने जाते हैं.

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- चंद्रग्रहण के बाद मंदिर को साफ-सुथरा करके यदि आपके घर में भगवान की प्रतिमा है तो उन्‍हें गंगाजल से स्नान करके नए वस्त्र पहनाएं. उसके बाद पूजा करके भोग लगाएं और खुद भी अन्न और जल ग्रहण करें. 

- चंद्रग्रहण के बाद सफेद वस्‍तुओं का दान करना मंगलकारी होता है. ग्रहण के बाद गुरुजनों, ब्राह्मणों और पुरोहितों एवं जरूरतमंदों को दान करना चाहिए. 

- राणों में चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण के बाद स्‍नान को बेहद आवश्‍यक बताया गया है. एक बात का ध्‍यान रखें कि स्‍नान कपड़े पहनकर करें. शास्‍त्रों में नग्‍न होकर स्‍नान करना वर्जित बताया गया है. 

- ग्रहण के बाद घर में हर जगह गंगाजल का छिड़काव करें. साथ ही पूजा स्‍थल को भी पवित्र करें और सभी मूर्तियों पर गंगाजल छिड़कें. 

- चंद्रग्रहण के बाद रात के बचे हुए पके भोजन को न खाएं. आप चाहें तो इसे सुबह पशुओं को खिला सकते हैं. 

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गुरुवार को भूलकर भी नहीं करने चाहिए ये 4 काम, जानिए क्यों?

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जयपुर: घर के बड़े बुजुर्ग कुछ काम गुरुवार के दिन नहीं करने की सलाह देते है, ब्रह्मांड में स्थित नौ ग्रहों में से गुरु वजन में सबसे भारी ग्रह है इसलिए गुरुवार का विशेष महत्व है. इस दिन हर वो काम जिससे कि शरीर या घर में हल्कापन आता हो, ऐसे कामों को करने से मना किया जाता है क्योंकि ऐसा करने से गुरु ग्रह हल्का होता है. तो आइये जानते है कोनसे हे वो 4 काम जो गुरुवार को कतई नहीं करने चाहिए...

बाल धोना: बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है. शास्त्रों में गुरुवार को महिलाओं को बाल धोने से इसलिए मनाही की गई है क्योंकि महिलाओं की जन्म कुंडली में बृहस्पति पति का कारक होता है साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक होता है. बृहस्पतिवार को सिर धोने से बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी होती है. 

नेल कटिंग और शेविंग: शास्त्रों में गुरु ग्रह को जीव कहा गया है, जीव मतलब आयु. गुरुवार को नेल कटिंग और शेविंग करना गुरु ग्रह को कमज़ोर करता है, जिससे की आपकी आयु पर असर पड़ता है. 

घर में किए गए कार्य: बृहस्पति का प्रभाव घर और शरीर दोनों पर रहता है. वास्तु के अनुसार घर में ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है, ईशान कोण का संबंध परिवार के बच्चो से होता है. ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है, घर में अधिक वजन वाले कपड़ो को धोना, कबाड़ घर से बहार निकालना या घर को धोना ईशान कोण को कमजोर करता है. 

रुक सकती है तरक्की: जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से कामयाबी के रास्ते आसानी से खुलते है. किसी भी जन्म कुंडली में दूसरा और ग्यारहवां भाव धन के  स्थान होते हैं. गुरु ग्रह इन दोनों ही स्थानों का कारक ग्रह होता है, गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है. ऐसे में आपको सिर धोना, नेल कटिंग, शेविंग, अधिक वजन वाले कपड़ो को धोना, पोछा लगाने ऐसे कामो से बचना चाहिए.  

बुधवार के दिन करें यह 5 उपाय, दूर होंगे आपके सारे दोष

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जयपुर: बुधवार का दिन बुध देव को समर्पित है और यदि इस दिन भगवान गणेश की भी पूजा की जाए तो अत्‍यंत लाभ की प्राप्‍ति होती है. गणेश जी सभी देवता में प्रिय देवता माने जाते है.  प्रथम पूज्य गणेशजी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है, तो ऐसे में आप भी बुधवार के दिन ये 5 विशेष उपाय करके अपने सारे दोष दूर कर जीवन में सकारात्‍मकता ला सकते है. आइये जानते हे उन 5 विशेष उपाय के बारे में...

पहला उपाय: 
गाय को पूजनीय और पवित्र माना गया है. बुधवार के दिन गाय माता को हरी घास खिलानी चाहिए. माना जाता है कि गौ माता की सेवा से सभी देवी-देवताओं प्रसन होते है और उनकी कृपा बनी रहती है.

दूसरा उपाय: 
अगर आप जिस काम को करने की कोशिश करते हैं या फिर हर काम में आपको असफलता मिलती है, तो बुधवार के दिन गणेश के मंत्र 'ओम गं गणपतये नमः' का जाप विधि विधान से करें आपको सभी कष्टों से निजात मिल जायेगा.

तीसरा उपाय: 
किसी जरूरतमंद व्यक्ति को या किसी मंदिर में हरे मूंग का दान करें, मूंग बुध ग्रह से संबंधित अनाज है, इसका दान करने से बुध ग्रह के दोष शांत होते हैं. इसे आपके जीवन में समृद्धि आती है. 

चौथा उपाय: 
गणेश जी को मोदक बहुत ही प्रिय है, बुधवार को गणपति बप्पा की पूजा में मोदक का भोग अवश्य लगाए आपकी हर मनोकामना पूरी होगी.

पांचवा उपाय:
धन संबंधित समस्या के लिए बुधवार के दिन श्री गणेश की विधि-विधान से पूजा करने के बाद गुड़ और घी का भोग लगाएं और थोडी देर बाद यह भोग गाय को खिला दें. इससे आपको काफी फायदा मिलेगा.

निर्जला एकादशी पर बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार, भक्तों के लिए पट रहे बंद

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सीकर: आज निर्जला एकादशी का पर्व है, लेकिन कोरोना संकट के बीच सारे उत्सव रद्द है, तो ऐसे में लोग निर्जला एकादर्शी का पर्व घरों में ही मना रहे है. निर्जला एकादशी पर बाबा श्याम की विशेष पूजा आराधना हुई. सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पुजारियों ने बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार के आराधना की. लेकिन श्याम प्रेमी इस बार निर्जला एकादशी पर दर्शन नहीं कर पाये. 

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श्याम प्रेमियों को नहीं हुए दर्शन:
निर्जला एकादशी पर जहां बाबा श्याम के दरबार में लाखों लोगों की भीड़ रहती थी, लेकिन कोरोना के चलते इस बार श्याम के भक्तों को निराश रहना पडा .मंगलवार को बाबा श्याम के भक्त दीदार नहीं कर पाए, कोरोना संक्रमण के चलते बाबा का दरबार बंद रहा. निर्जला एकादशी के दिन पुजारियों ने सिर्फ बाबा श्याम की सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पूजा आराधना की और पट बंद कर दिए. 

निर्जला एकादशी का पौराणिक बड़ा महत्व:
निर्जला एकादशी का पौराणिक बड़ा महत्व है, आज के दिन बाबा श्याम के दरबार में लाखों भक्त अपनी हाजिरी लगाते हैं. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ और मंदिर 3 माह से पूरी तरह बंद चल रहा है. राज्य सरकार के आदेश के बाद ही भक्तों के लिए मंदिर खोला जाएगा. पहली बार ऐसा हुआ है कि निर्जला एकादशी के दिन बाबा श्याम के दर्शन भक्तों को नहीं हुए. 

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