प्रकृति की वादियों में अन्नपूर्णा माता का निवास है 'पत्थर की गुफा'

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/10/17 09:02

बालाघाट। प्राकृतिक वादियों और पहाडों से घिरे बालाघाट जिले में खासकर नवरात्र पर्व में भक्तों का मेला लगना शुरू हो जाता है। क्योंकि इन पहाड़ियों में स्वंय माता रानी का बसेरा है। यही कारण है कि बालाघाट मुख्यालय से 18 किलोमीटर दुर ग्राम गड़दा की पहाड़ पर पत्थर की गुफा में माता अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए दुर-दुर से श्रृद्धालूगण अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। कहा जाता है कि एक दशक पुर्व माँ अन्नपूर्णा ने एक आदिवासी भक्त के सपने में आकर इस पहाड़ी की गुफा में अपना वजूद बताया था। तभी से यहां माता के भक्त अपनी मुरादें लेकर आते है। 

माँ अन्नपूर्णा का दरबार गड़दा के ऊंचे पहाड़ों पर लगता है। इस दरबार में यूं तो कभी भी लोग सर झूकाने जाते है लेकिन नवरात्र में यहां भक्तों का मेला लग जाता है। इस दरबार में उन लोगों की भी खासी भीड़ देखी जाती है। जो अपनी मुराद पुरी होने के बाद माता का शुक्रिया अदाकर ज्वारा बो कर ज्योत जलाते है। भक्तों की मानें तो माता अन्नपुर्णा के आर्शीवाद से कई महिलाओं की सुनी गोद भर गई है। वहीं ऐसी तमाम मुराद पुरी करने वाली माता रानी के किस्से है। जो आज भी भक्तों को चकित कर देते हैं। 

माँ अन्नपूर्णा ने सपने में बताया गुफा का पता 

बताया जाता है कि प्राचीन समय में यहां पत्थर की कोठी थी, जो अनाज से भरी रहती थी। जिसे माँ अन्नपूर्णा का भंडार माना जाता था। लेकिन यहां समय के साथ इस पत्थर के भंडार को लेकर लोगों की आस्था कम होती चली गई। जिसके चलते माँ अन्नपूर्णा ने सपने में आकर भक्त को पत्थर की गुफा में प्रकट होने की बात बताई। सपने के अनुसार जब आदिवासी व्यक्ति कुछ लोगों के साथ बताये स्थान पर पत्थर की गुफा में गये तो यहां माता कि प्रतिमुर्ति दिखाई दी। तभी से यहां साल दर साल माता के भक्त सैकड़ों से हजारों की तादाद में पहुंच रहे है। 

अन्य देवियों का भी है वास

माँ अन्नपुर्णा के धाम गड़दा के पहाड़ी पर माता अन्नपूर्णा के अलावा पत्थरों की सुरंग और गुफाओं में और भी कई देवियों का वास है। जहां माता वैष्णव देवी, माता शारदा, माँ कामाख्या, माँ बग्लामुखी सहित अन्य देवीयों का वास माना जाता है। जहां मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ सहित अन्य स्थानों से आने वाले भक्त यहां माता अन्नपूर्णा के अलावा पत्थरों की गुफा में अन्य देवियों के दर्शन भी करते है। यहां सभी माताओं का दरबार स्वंय निर्मित है। इन गुफाओं में कुछ भी मानव निर्मित नहीं है। खास बात यह है कि कठिन चढ़ाई होने के बाद भी सूनी गोद भरने वाली महिलाएं अपने दुध मुहें बच्चों को माता के दरबार में खिलाने के लिए आते है। 

प्रकृति की गोद में बसी माँ अन्नपूर्णा के दरबार में पहुंचने के लिए प्राकृतिक पहाड़ों की चढ़ाई चढ़नी होती है। जिस ओर शासन प्रशासन के द्वारा यहां किसी भी प्रकार की प्रयास नहीं किया गया है। उपेक्षा के चलते आज भी भक्तगण यहां सीढ़ी और पेयजल जैसे अन्य सुविधाओं के लिए उम्मीद लगाये बैठे है। बावजूद इसके यहां माँ अन्नपूर्णा के दरबार के प्रति भक्तों का मेला बढ़ते ही जा रहा है। 

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