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लॉन्च हुआ एपल का ये नया हैंडसेट, जानिए फीचर्स और कीमत

लॉन्च हुआ एपल का ये नया हैंडसेट, जानिए फीचर्स और कीमत

नई​ दिल्ली: एपल के लेटेस्ट हैंडसेट एपल आईफोन एसई को देश में लॉन्च ​कर दिया गया है. एपल के इस लेटेस्ट मोबाइल में बेहद खूबियां है. फोन में एपल A13 बायोनिक चिपसेट है. एपल ने इसी चिपसेट का यूज आईफोन 11 सीरिज में भी किया था. एपल आईफोन एसई 2020 के 64 GB स्टोरेज वेरिएंट की भारत में दाम 42,500 रुपए तय हुई है. ये मोबाइल फोन 128 GB और 256 GB स्टोरेज वेरिएंट में भी उपलब्ध होगा. लेकिन कंपनी ने फिलहाल अपने बाकी 2 वेरिएंट के दाम पर कोई जानकारी नहीं दी है. 

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बायोनिक चिपसेट का यूज:
एपल आईफोन SE 2020 में 4.7 इंच (750×1334 Pixels) रेटिना एचडी एलसीडी डिस्प्ले है. डिस्प्ले पैनल Haptic टच सपोर्ट के साथ आता है. स्पीड और मल्टीटास्किंग के लिए इस लेटेस्ट एपल आईफोन में A13 बायोनिक चिपसेट का यूज किया गया है. 

सेल्फी और वीडियो कॉलिंग कैमरा:
नए आईफोन में फेस आईडी सपोर्ट के बजाय टच आईडी बटन दिया गया है. एपल के इस नए आईफोन के पिछले भाग में 12MP प्राइमरी कैमरा सेंसर, अपर्चर F/1.8 है. बैक पैनल पर एलईडी ट्रू टोन फ्लैश भी है. सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 7MP का फ्रंट कैमरा सेंसर दिया गया है, अपर्चर एफ/2.2 है.नए आईफोन एसई 2020 में वाई-फाई 802.11 एक्स, ब्लूटूथ, 4G एलटीई, जीपीएस/ए-जीपीएस और लाइटनिंग पोर्ट दिया गया है.

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चीन का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर बनकर तैयार, साल के अंत तक तैनाती की योजना

चीन का पहला स्वदेशी  एयरक्राफ्ट कैरियर बनकर तैयार, साल के अंत तक तैनाती की योजना

बीजिंग: चीन से एक बड़ी खबर सामने आई है. असल में चाइना ने पहली बार स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर बनाकर कीर्तिमान स्थापित किया है. इतना ही नहीं इस विमान वाहक पोत को इस साल के आखिर तक तैनात भी किया जा सकता है. आपको बता दे कि स्वदेश निर्मित विमान वाहक पोत शैनडोंग का नियमित परीक्षण और समुद्री प्रशिक्षण मिशन पूरा हो गया है और इस साल के अंत तक यह युद्धक तैनाती के लिये तैयार हो जाएगा. इसकी घोषणा सरकारी मीडिया में आई एक खबर के बाद की गई है. 

पिछले महीने चीन की सेना ने कहा था कि चीनी विमान वाहक लियाओनिंग और शैनडोंग ने हाल ही में नियमित प्रशिक्षण और समुद्री परीक्षण पूरा कर लिया है. लियाओनिंग को साल 2012 में जबकि शैनडोंग को पिछले साल दिसंबर में पीएलए की नौसेना में शामिल किया गया था. आधिकारिक मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि चीन छह विमान वाहक पोत तैयार करने की योजना बना रहा है. 

चाइना सेंट्रल टेलीविजन (सीसीटीवी) ने खबर दी है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) में 10 महीने तक सेवाएं देने के बाद शैनडोंग युद्ध के समय तैनाती के लिये तैयार हो जाएगा. आपको बता दे कि चाइना और भारत के बीच लगातार सीमा विवाद बढ़ता जा रहा है और बैठकों के कई दौर के बाद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पा रहा है. इनता ही नहीं चीन आए दिन षड़यंत्र के जाल बिछाने में लगा हुआ है. (सोर्स-भाषा)

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IIT मद्रास का पहला डिजीटल कॉन्वोकेशन प्रोग्रान संपन्न, बांटी 2300 से ज्यादा डिग्रीयां

IIT मद्रास का पहला डिजीटल कॉन्वोकेशन प्रोग्रान संपन्न, बांटी 2300 से ज्यादा डिग्रीयां

चेन्नई,तमिलनाडू: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान- मद्रास के इतिहास में पहली बार डिजिटल माध्यम से दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया और 2,300 से अधिक डिग्रियां दी गईं है. जिसके बाद एक नये व्यवस्था की शुरुआत भी हो चुकी है. इस मौके पर मिक्स्ड रियलिटी तकनीक का प्रयोग किया गया था जो , 57वें दीक्षांत समारोह का मुख्य आकर्षण था. 

इस मौके पर चीफ गेस्ट नोबेल पुरस्कार विजेता और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में सैद्धांतिक भौतिकी के प्रोफेसर डेविड जे थे. उन्होंने इस अवसर पर कहा कि डिग्री प्राप्त कर रहे छात्रों के लिए अब उस ज्ञान का प्रयोग करने की शुरुआत है जो उन्होंने अध्ययन के दौरान ग्रहण किया है.आईआईटी मद्रास के बोर्ड ऑफ गवर्नर के चेयरमैन और महिंद्रा एंड महिंद्रा के प्रबंध निदेशक पवन गोयनका ने दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की थी. (सोर्स-भाषा)

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Nasa का दावा: हम अपनी सफलता का ही शिकार हुए, अंतरिक्ष यान से छलककर अंतरिक्ष में ही गिर रहे बेनू छुद्र ग्रह के नमूने

Nasa का दावा:  हम अपनी सफलता का ही शिकार हुए, अंतरिक्ष यान से छलककर अंतरिक्ष में ही गिर रहे बेनू छुद्र ग्रह के नमूने

केप केनावरल, अमेरिका: हाल ही में नासा ने एक बड़ा खुलासा किया है. एक रिपोर्ट के अनुसार बेनू छुद्र ग्रह के नमूने लेकर आने वाले नासा के अंतरिक्ष यान ऑरिसिस-रेक्स के कंटेनर से नमूनों के बहूमूल्य कण छलककर अंतरिक्ष में ही गिर रहे हैं.  वैज्ञानिकों ने इस बात की जानकारी दी है और पुष्टि भी की है. तीन दिन पहले वैज्ञानिकों ने बताया था कि अंतरिक्ष यान ऑरिसिस-रेक्स ने बेनू छुद्र ग्रह पर कुछ देर रुककर उसके नमूने एकत्रित कर लिये हैं. 

आपको बता दे कि नासा का इस तरह का ये पहला अभियान है. नासा को उम्मीद है कि अंतरिक्ष यान से लाए गए बेनू ग्रह के नमूनों की मदद से सौरमंडल की उत्पत्ति के राज खुल सकते हैं. माना जाता है कि इन ग्रहों की उत्पत्ति भी सौरमंडल के साथ हुई थी. अभियान के मुख्य वैज्ञानिक डेंटे लॉरेटा ने मंगलवार को हुए उस अभियान के बारे में बताते हुए कहा था कि यान ने उम्मीद से अधिक नमूने एकत्रित कर लिये हैं और उसके धरती पर लौटने की उम्मीद है.

नासा वैज्ञानिक लॉरेटा ने आनन-फानन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा है कि हम अपनी सफलता का ही शिकार बन गए हैं. उन्होंने कहा कि यान नियंत्रक बाधाओं को दूर कर बेनू के और अधिक नमूनों को गिरने से रोकने के अलावा कुछ नहीं कर सकते है. आगे और क्या-क्या अद्भूत घटनाएं देखने को मिलेंगी ये तो वक्त ही बताएगा. (सोर्स-भाषा)

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2008 में आज के दिन हुआ था ‘चंद्रयान-1’ का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण

 2008 में आज के दिन हुआ था ‘चंद्रयान-1’ का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण

नई दिल्ली: इतिहास के पन्नों में 22 अक्टूबर का दिन भारत के लिए अंतरिक्ष की एक बड़ी उपलब्धि के साथ जुड़ा है. जी हां आज के दिन सन् 2008 में भारत ने अपने पहले चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-1’ का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया था. जिसके बाद दुनिया भारत का लोहा मान गई थी. इस प्रोजेक्ट को अंजान तत्कालिन इसरो प्रमुख जी माधवन की अध्यक्षता मे दिया गया था.

आपको बता दे कि आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में प्रक्षेपण स्थल पर कई दिनों से  बारिश और खराब मौसम की शिकायत थी मगर इसके बाद भी आखिरकार भारत ने इस दिन ‘चंद्रयान-1’ के रूप में अपने पहले मानवरहित चंद्र अभियान को अमली जामा पहनाया और दुनिया भर में अपनी ताकत की उदाहरण पेश किया था. (सोर्स-भाषा)

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6 महीने की सुरक्षित अंतरिक्ष यात्रा के बाद धरती पर लौटे तीन अंतरिक्ष यात्री

 6 महीने की सुरक्षित अंतरिक्ष यात्रा के बाद धरती पर लौटे तीन अंतरिक्ष यात्री

मास्को: अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में छह महीने के अभियान के बाद तीन अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित धरती पर लौट आए है. नासा के तीनों खगोल यात्रीओं में अमेरिका के क्रिस केसिडी, रूस के अनातोली इवानिशीन तथा इवान वेगनर शामिल है. सूत्रों के अनुसार तीनों को लेकर आ रहे सोयूज कैप्सूल कजाखस्तान के देजकाजगन शहर के दक्षिण पूर्व में बृहस्पतिवार की सुबह सात बजकर 54 मिनट पर लैंडिग की है. 

चिकित्सा जांच के बाद तीनों को हेलीकॉप्टर से देजकाजगन लाया जायेगा जहां वह अपने घर के लिये उड़ान भरेंगे. कोरोना वायरस महामारी के कारण अतिरिक्त सावधानी को ध्यान में रखते हुये रूसी बचाव दल की टीम के साथ जब उनकी (अंतरिक्ष यात्रियों) मुलाकात हुयी तो उससे पूर्व उनकी कोरोना वायरस जांच की गयी है. हांलाकि इन राहत प्रयासों में शामिल लोगों की संख्या सीमित थी. 

जानकारी है कि केसिडी, इवानिशीन एवं वेगनर अप्रैल से ही अंतरिक्ष स्टेशन में रह रहे थे. नासा के केट रूबिंस, रूस के सर्गेई रेजिकोव तथा सर्गेई कुद-सेवरेचकोव एक सप्ताह पहले छह महीने के लिए अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना हो चुके हैं. फिलहाल सेफ लैडिंग से सभी वैज्ञानिकों ने राहत की सांस ली है.  (सोर्स-भाषा)

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गोबर के चिप से मोबाइल फोन विकिरण कम होने के सबूत दे कथीरिया: IMOS वैज्ञानिक

गोबर के चिप से मोबाइल फोन विकिरण कम होने के सबूत दे कथीरिया: IMOS वैज्ञानिक

नई दिल्ली: देश की राजधानी में राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष वल्लभभाई कथीरिया द्वारा किए गए दावे में नया मोड़ आया है. असल में करीब छह सौ वैज्ञानिकों और विज्ञान के शिक्षकों ने को पत्र लिखकर कहा है कि वह गोबर की चिप से मोबाइल फोन विकिरण कम करने में मदद मिलने संबंधी अपनी दावों को साबित करने के लिए जल्दी से जल्दी साक्ष्य पेश करें. 

‘इंडिया मार्च फॉर साइंस’ की मुंबई शाखा ने एक बयान में कहा कि वैज्ञानिकों ने यह भी जानकारी मांगी है कि इस संबंध में वैज्ञानिक प्रयोग कब एवं कहां हुए और मुख्य जांचकर्ता कौन था. जिसके पीछे ये जानना है कि कहीं भ्रामकता फैलाने के लिहाज से तो कहीं ऐसे दावे नहीं किए जा रहे है. 

उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि इस संबंधी अध्ययन के परिणाम कहां प्रकाशित हुए. आपको बता दे कि कथीरिया ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि घरों में गोबर रखने से विकिरण कम होता है और एक गोबर की चिप बनाई गई है जो मोबाइल फोन से होने वाले विकिरण को कम कर सकती है. फिलहाल सभी को कथीरिया  की ओर से रिपोर्ट का इंतजार है. (सोर्स-भाषा)

 

गोबर के चिप से मोबाइल फोन विकिरण कम होने के सबूत दे कथीरिया: IMOS वैज्ञानिक

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नई दिल्ली: देश की राजधानी में राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष वल्लभभाई कथीरिया द्वारा किए गए दावे में नया मोड़ आया है. असल में करीब छह सौ वैज्ञानिकों और विज्ञान के शिक्षकों ने को पत्र लिखकर कहा है कि वह गोबर की चिप से मोबाइल फोन विकिरण कम करने में मदद मिलने संबंधी अपनी दावों को साबित करने के लिए जल्दी से जल्दी साक्ष्य पेश करें. 

‘इंडिया मार्च फॉर साइंस’ की मुंबई शाखा ने एक बयान में कहा कि वैज्ञानिकों ने यह भी जानकारी मांगी है कि इस संबंध में वैज्ञानिक प्रयोग कब एवं कहां हुए और मुख्य जांचकर्ता कौन था. जिसके पीछे ये जानना है कि कहीं भ्रामकता फैलाने के लिहाज से तो कहीं ऐसे दावे नहीं किए जा रहे है. 

उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि इस संबंधी अध्ययन के परिणाम कहां प्रकाशित हुए. आपको बता दे कि कथीरिया ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि घरों में गोबर रखने से विकिरण कम होता है और एक गोबर की चिप बनाई गई है जो मोबाइल फोन से होने वाले विकिरण को कम कर सकती है. फिलहाल सभी को कथीरिया  की ओर से रिपोर्ट का इंतजार है. (सोर्स-भाषा)

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जियो की ढाई-तीन हजार रुपए में 5जी स्मार्टफोन बेचने की योजना: कंपनी अधिकारी

जियो की ढाई-तीन हजार रुपए में 5जी स्मार्टफोन बेचने की योजना: कंपनी अधिकारी

नई दिल्ली: रिलायंस जियो के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी 5,000 रुपए से कम कीमत में 5जी स्मार्टफोन पेश करने की योजना बना रही है, और आगे बिक्री बढ़ने पर इसकी कीमत घटाकर 2500-3000 हजार रुपए तक की जाएगी. कंपनी इस पहल के तहत वर्तमान में 2जी कनेक्शन का इस्तेमाल करने वाले 20-30 करोड़ मोबाइल उपयोगकर्ताओं को लुभाने की कोशिश करेगी.

कंपनी के एक अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि जियो उपकरण की कीमत 5,000 रुपए से कम रखना चाहती है. जब हम बिक्री बढ़ा लेंगे, तो इसकी कीमत 2,500-3,000 रुपए हो सकती है. रिलायंस जियो ने इस संबंध में भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया. इस समय भारत में मिलने वाले 5जी स्मार्टफोन की कीमत 27,000 रुपए से शुरू है.

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जियो भारत में उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त में 4जी मोबाइल फोन पेश करने वाली पहली कंपनी. इसके तहत जियो फोन के लिए 1,500 रुपए देने थे, जो बाद में वापस हो सकते थे. रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कंपनी की 43वीं वार्षिक आम बैठक में भारत को 2जी मुक्त (2जी कनेक्शनों से मुक्त) बनाने की बात कही थी और एक सस्ते 5जी स्मार्टफोन की जरूरत पर जोर दिया था.

कंपनी अपने 5जी नेटवर्क उपकरण पर भी काम कर रही है और उसने दूरसंचार विभाग से इन उत्पादों के परीक्षण के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित करने के लिए कहा है. सरकार ने अभी रिलायंस जियो के अनुरोध पर फैसला नहीं किया है. इस समय भारत में 5जी सेवाएं नहीं हैं और सरकार ने 5जी तकनीक के परीक्षण के लिए दूरसंचार परिचालकों को स्पेक्ट्रम आवंटित नहीं किया है. (भाषा)