VIDEO: बेखौफ खनन माफियाओं के चलते अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही अरावली...

Nirmal Tiwari Published Date 2019/02/08 10:53

जयपुर। सदियों से अपने आंचल में राजस्थान के 19 जिलों को महफूज रख रही अरावली इन दिनों अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। बेखौफ खनन माफिया दशकों पहले गैंती हथौड़े से चोट देकर पत्थर निकालते निकालते आज डायनामाइट से अरावली को रोज दरकने पर मजबूर कर रहा है। खान विभाग और जिम्मेदार सरकारी महकमों की खौफनाक मिलीभगत का आलम यह है कि नंगी आंखों से दर्जनों किलोमीटर दूर से दिखने वाली अरावली को आज दूरबीन से देखने की नौबत आ गई है। 

प्रदेश के 33 में से 19 जिलों को बाड़, भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचाने वाली अरावली.... 19 जिलों के करीब 4 करोड़ लोगों को भोजन और आवास देने वाली अरावली....लाखों मवेशियों को चारा पानी और जड़ी बूटी देने वाली अरावली...देश दुनिया के सैलानियों को वन, वन्यजीव, नदी नाले, तालाब देने वाली अरावली...अब तक मरुस्थल में तब्दील होने वाले प्रदेश में रेगिस्तान के प्रसार को रोकने वाली अरावली...जी हां...वो अरावली जो मां की तरह अपने आंचल में हमें अभैद्य सुरक्षा देती रही है। आज वही अरावली अगर रुदन कर रही है तो जिम्मेदारी तो सरकार को लेनी ही होगी। अरावली पर एक ही स्टोरी या आर्टिकल में सबकुछ लिखा जाना संभव नहीं ऐसे में आज आपको रुबरू कराते हैं राजधानी जयपुर के दिल्ली रोड की अरावली पर्वतमाला से। यहां कुछ रसूकदार खनन व्यवसायियों की वर्षों पुरानी खदाने हैं जिनका क्षेत्र अनुमान से ही तय कर रखा है। यहां दो दशाक पहले जो दो सौ मीटर तक ऊंचे पहाड़ थे वो आज चंद फुट के पत्थर में तब्दील हो गए हैं। गुणवता, बिदारा, लखेर में अंधाधुंध खनन से हालात बहुत खराब हो चुके हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का तल्ख होना और यह कहना कि क्या पहाड़ों को हनुमान जी उठा ले गए गलत नहीं है। आईए आपको कुछ स्थानीय निवासियों की पीड़ित जुबान से दिल्ली रोड में बेजा खनन के हालात की जानकारी दिलाते हैं।

गुणावत्ता, लखेर और चंदवाजी क्षेत्र में एनएच 8 के किनारे के ऊंचे ऊंचे पहाड़ों को अवैध डीप होल ब्लास्टिंग से जमीदोज कर दिया गया है। बिदारा में तो पहाड़ों की हालत यह है कि दूर से देखने पर कुछ शिल्प खड़े दिखाई देते हैं। पास में ही स्कूल है। बीएसएफ का कैंप है, दर्जनों मकान हैं जो ब्लास्टिंग से दरक गए हैं। स्थानीय निवासियों में इतना डर है कि खनन माफिया के लोग कभी भी मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। खान व पुलिस महकमें के जिम्मेदार अधिकारी भी इनसे हाथ मिलाए हुए हैं ऐसे में खनन माफिया का हौसला बढ़ता ही जा रहा है। मवेशी मर जाते हैं और बीघाओं में खेती खराब हो जाती है। अवैध खनन इस कदर है कि रोजाना लाखों रुपए का अवैध पत्थर यहां के रसूदारों के क्रेशरों पर पहुंच रहा है।

अरावली को रोज धमाकों से दहला रहा खनन माफिया बेखौफ कानून से खेल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद भी कानों में रूई डाले खनन अधिकारी खनन माफिया से काले गठजोड़ को तोड़ने को तैयार नहीं। अब देखना होगा कि प्रकृति से खेल रहे लोगों को सरकार ठीक करेगी या खुद कुदरत ही।

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