VIDEO: नहीं आ रहे 25,000 से अधिक के रिफण्ड, करदाता कर रहे रिफण्ड का इंतजार

VIDEO: नहीं आ रहे 25,000 से अधिक के रिफण्ड, करदाता कर रहे रिफण्ड का इंतजार

VIDEO: नहीं आ रहे 25,000 से अधिक के रिफण्ड, करदाता कर रहे रिफण्ड का इंतजार

जयपुर: आयकर विभाग और करदाता के बीच खींच-तान का सबसे बड़ा कारण आयकर रिफण्ड अब एक बार फिर सिर उठा रहा है. मौजूदा स्थिति यह है कि जल्द से जल्द आयकर रिफण्ड जारी कर देने के विभागीय दावों के बीच अंतिम समय सीमा से पूर्व ही आयकर रिटर्न जमा कराने वाले करदाताओं के हाथ भी अब तक आयकर रिफण्ड हाथ नहीं लग पाए हैं, स्थिति तो यह भी बताई जा रही है कि जिन करदाताओं को 25 हजार रुपए से अधिक का रिफण्ड आना हैं, वे केवल इंतजार ही कर रहे पेश है. ऐसे में आशंका यह भी है कि कहीं ऐसा नहीं हो रिफण्ड का इंतजार कर रहे करदाता को नए वित्तीय वर्ष तक इंतजार करना पड़े. 

रिफण्ड आना तो फिलहाल दिव्य स्वप्न ही समझा जा रहा: 
वित्तीय वर्ष 2018-19 अर्थात कर निर्धारण वर्ष 2019-20 के लिए सामान्य करदाता की आयकर रिटर्न जमा कराने की अंतिम समय सीमा 31 जुलाई 2019 थी, जिसे सरकार ने बढ़ाकर 31 अगस्त 2019 किया था. सूत्रों का कहना है कि मूल समय सीमा अर्थात 31 जुलाई से पूर्व ही अपनी आयकर विवरणी जमा कराने वाले अनेक करदाता ऐसे है, जिन्हें अभी तक उनके आयकर रिफण्ड नहीं मिल सके. ऐसी स्थिति में ऐसे करदाता जिन्होंने संशोधित समय सीमा अर्थात 31 अगस्त तक अपनी कर विवरणी जमा कराई, उनके रिफण्ड आना तो फिलहाल दिव्य स्वप्न ही समझा जा रहा है.  उधर, आंकड़ों की बात करें तो आयकर विभाग इस साल 15 नवम्बर तक पिछले साल की तुलना में देश भर में अधिक आयकर रिफण्ड जारी कर चुका है.  राजस्थान में तो यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत की तुलना में भी अधिक है. लेकिन इसके बावजूद हजारों करदाता ऐसे हैं, जिनके पास आयकर रिफण्ड पहुंचा ही नहीं. 

यह रहा देश में आयकर राजस्व वसूली व आयकर रिफण्ड का हाल: 

15 नवम्बर 2018: 
- कुल प्राप्त आयकर राजस्व : 6,54,689 करोड़ रुपए
- कुल जारी आयकर रिफण्ड : 1,15,393 करोड़ रुपए  
- कुल प्राप्त राशि की तुलना में जारी रिफण्ड राशि : 17.62%

15 नवम्बर 2019: 
- कुल प्राप्त आयकर राजस्व : 6,86,240 करोड़ रुपए
- कुल जारी आयकर रिफण्ड : 1,38,180 करोड़ रुपए  
- कुल प्राप्त राशि की तुलना में जारी रिफण्ड राशि : 20.13 %  

यह रहा राज्य में आयकर राजस्व वसूली व आयकर रिफण्ड का हाल: 
15 नवम्बर 2018: 

- कुल प्राप्त आयकर राजस्व : 13,074 करोड़ रुपए
- कुल जारी आयकर रिफण्ड : 2,416 करोड़ रुपए  
- कुल प्राप्त राशि की तुलना में जारी रिफण्ड राशि : 18.48%

15 नवम्बर 2019:
- कुल प्राप्त आयकर राजस्व : 12,392 करोड़ रुपए
- कुल जारी आयकर रिफण्ड : 3,513 करोड़ रुपए  
- कुल प्राप्त राशि की तुलना में जारी रिफण्ड राशि : 28.35 %  

आयकर रिफण्ड नहीं आने के पीछे विशेषज्ञों का कहना है कि विभाग ने आयकर दाताओं के बैंक खाते में ही दिए जाने की व्यवस्था की है. विभाग ने बैंक खातों की सत्यता को भी अनिवार्य किया है. इसके चलते करदाता का बैंक खाता उसका पेन नम्बर और ECS मेच नहीं करता, तो विभाग की ओर से भेजा गया रिफण्ड लौट जाता है, लेकिन करदाता को इसका पता ही नहीं चलता. इसी तरह विभाग पुरानी मांग को भी आयकर रिफण्ड से समायोजित कर लेता है, लेकिन करदाता को पुरानी डिमाण्ड की जानकारी ही नहीं होती, जिससे वह विभाग से रिफण्ड पाने का इंतजार करता रहता है.  

आयकर राजस्व के कुल संग्रहण पर असर पड़ता है: 
आयकर रिफण्ड नहीं आने के पीछे विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मानता है कि कॉरपोरेट कर में हाल ही केन्द्र सरकार द्वारा दी गई छूट के कारण इस वर्ष विभाग की ओर से एकत्र किए जाने वाले आयकर राजस्व पर पड़ना तय है. चूंकि रिफण्ड जारी होने के कारण आयकर राजस्व के कुल संग्रहण पर असर पड़ता है. अत: आशंका यह भी जताई जा रही है कि आयकर राजस्व के आंकड़े बेहतर दिखाने के लिए भी विभाग की ओर से आयकर रिफण्ड पर अघोषित रोक लगी हुई है.  

आयकर रिफण्ड की व्यवस्था में पिछले कुछ सालों से सुधार आया: 
आयकर विभाग में हुए कम्प्यूटरीकरण के कारण आयकर रिफण्ड की व्यवस्था में हालांकि पिछले कुछ सालों से सुधार आया है. छोटी-छोटी राशि के आयकर रिफण्ड का दावा करने वाले करदाताओं को तो समय पर ITR जमा कराने के बाद कुछ ही समय में आयकर रिफण्ड मिल भी जाता है. लेकिन बड़े आयकर रिफण्ड मामलों में विभागीय अधिकारी कुछ अतिरिक्त सर्तकता भी बरतते हैं, जो रिफण्ड अटकने का बड़ा कारण बना हुआ है. अब जरूरत इस बात की है कि जब विभाग देरी से आयकर जमा कराने की दशा में करदाता को जिम्मेदार मान कर उससे जुर्माना वसूलता है तो देरी से रिफण्ड जारी करने के मामले में रिफण्ड जारी करने वाले अधिकारी की भी जिम्मेदारी तय करें और रिफण्ड पर दिए जाने वाले ब्याज की वसूली उससे निजी रूप से वसूले तो रिफण्ड में देरी की समस्या का आसान हल निकल सकता है, और समय पर आयकर रिफण्ड जारी करने से देश के आयकर संग्रहण की भी सही स्थिति देश के सामने आएगी. 

...विमल कोठारी, फर्स्ट इण्डिया न्यूज, जयपुर


 

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