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VIDEO: नहीं आ रहे 25,000 से अधिक के रिफण्ड, करदाता कर रहे रिफण्ड का इंतजार

VIDEO: नहीं आ रहे 25,000 से अधिक के रिफण्ड, करदाता कर रहे रिफण्ड का इंतजार

जयपुर: आयकर विभाग और करदाता के बीच खींच-तान का सबसे बड़ा कारण आयकर रिफण्ड अब एक बार फिर सिर उठा रहा है. मौजूदा स्थिति यह है कि जल्द से जल्द आयकर रिफण्ड जारी कर देने के विभागीय दावों के बीच अंतिम समय सीमा से पूर्व ही आयकर रिटर्न जमा कराने वाले करदाताओं के हाथ भी अब तक आयकर रिफण्ड हाथ नहीं लग पाए हैं, स्थिति तो यह भी बताई जा रही है कि जिन करदाताओं को 25 हजार रुपए से अधिक का रिफण्ड आना हैं, वे केवल इंतजार ही कर रहे पेश है. ऐसे में आशंका यह भी है कि कहीं ऐसा नहीं हो रिफण्ड का इंतजार कर रहे करदाता को नए वित्तीय वर्ष तक इंतजार करना पड़े. 

रिफण्ड आना तो फिलहाल दिव्य स्वप्न ही समझा जा रहा: 
वित्तीय वर्ष 2018-19 अर्थात कर निर्धारण वर्ष 2019-20 के लिए सामान्य करदाता की आयकर रिटर्न जमा कराने की अंतिम समय सीमा 31 जुलाई 2019 थी, जिसे सरकार ने बढ़ाकर 31 अगस्त 2019 किया था. सूत्रों का कहना है कि मूल समय सीमा अर्थात 31 जुलाई से पूर्व ही अपनी आयकर विवरणी जमा कराने वाले अनेक करदाता ऐसे है, जिन्हें अभी तक उनके आयकर रिफण्ड नहीं मिल सके. ऐसी स्थिति में ऐसे करदाता जिन्होंने संशोधित समय सीमा अर्थात 31 अगस्त तक अपनी कर विवरणी जमा कराई, उनके रिफण्ड आना तो फिलहाल दिव्य स्वप्न ही समझा जा रहा है.  उधर, आंकड़ों की बात करें तो आयकर विभाग इस साल 15 नवम्बर तक पिछले साल की तुलना में देश भर में अधिक आयकर रिफण्ड जारी कर चुका है.  राजस्थान में तो यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत की तुलना में भी अधिक है. लेकिन इसके बावजूद हजारों करदाता ऐसे हैं, जिनके पास आयकर रिफण्ड पहुंचा ही नहीं. 

यह रहा देश में आयकर राजस्व वसूली व आयकर रिफण्ड का हाल: 

15 नवम्बर 2018: 
- कुल प्राप्त आयकर राजस्व : 6,54,689 करोड़ रुपए
- कुल जारी आयकर रिफण्ड : 1,15,393 करोड़ रुपए  
- कुल प्राप्त राशि की तुलना में जारी रिफण्ड राशि : 17.62%

15 नवम्बर 2019: 
- कुल प्राप्त आयकर राजस्व : 6,86,240 करोड़ रुपए
- कुल जारी आयकर रिफण्ड : 1,38,180 करोड़ रुपए  
- कुल प्राप्त राशि की तुलना में जारी रिफण्ड राशि : 20.13 %  

यह रहा राज्य में आयकर राजस्व वसूली व आयकर रिफण्ड का हाल: 
15 नवम्बर 2018: 

- कुल प्राप्त आयकर राजस्व : 13,074 करोड़ रुपए
- कुल जारी आयकर रिफण्ड : 2,416 करोड़ रुपए  
- कुल प्राप्त राशि की तुलना में जारी रिफण्ड राशि : 18.48%

15 नवम्बर 2019:
- कुल प्राप्त आयकर राजस्व : 12,392 करोड़ रुपए
- कुल जारी आयकर रिफण्ड : 3,513 करोड़ रुपए  
- कुल प्राप्त राशि की तुलना में जारी रिफण्ड राशि : 28.35 %  

आयकर रिफण्ड नहीं आने के पीछे विशेषज्ञों का कहना है कि विभाग ने आयकर दाताओं के बैंक खाते में ही दिए जाने की व्यवस्था की है. विभाग ने बैंक खातों की सत्यता को भी अनिवार्य किया है. इसके चलते करदाता का बैंक खाता उसका पेन नम्बर और ECS मेच नहीं करता, तो विभाग की ओर से भेजा गया रिफण्ड लौट जाता है, लेकिन करदाता को इसका पता ही नहीं चलता. इसी तरह विभाग पुरानी मांग को भी आयकर रिफण्ड से समायोजित कर लेता है, लेकिन करदाता को पुरानी डिमाण्ड की जानकारी ही नहीं होती, जिससे वह विभाग से रिफण्ड पाने का इंतजार करता रहता है.  

आयकर राजस्व के कुल संग्रहण पर असर पड़ता है: 
आयकर रिफण्ड नहीं आने के पीछे विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मानता है कि कॉरपोरेट कर में हाल ही केन्द्र सरकार द्वारा दी गई छूट के कारण इस वर्ष विभाग की ओर से एकत्र किए जाने वाले आयकर राजस्व पर पड़ना तय है. चूंकि रिफण्ड जारी होने के कारण आयकर राजस्व के कुल संग्रहण पर असर पड़ता है. अत: आशंका यह भी जताई जा रही है कि आयकर राजस्व के आंकड़े बेहतर दिखाने के लिए भी विभाग की ओर से आयकर रिफण्ड पर अघोषित रोक लगी हुई है.  

आयकर रिफण्ड की व्यवस्था में पिछले कुछ सालों से सुधार आया: 
आयकर विभाग में हुए कम्प्यूटरीकरण के कारण आयकर रिफण्ड की व्यवस्था में हालांकि पिछले कुछ सालों से सुधार आया है. छोटी-छोटी राशि के आयकर रिफण्ड का दावा करने वाले करदाताओं को तो समय पर ITR जमा कराने के बाद कुछ ही समय में आयकर रिफण्ड मिल भी जाता है. लेकिन बड़े आयकर रिफण्ड मामलों में विभागीय अधिकारी कुछ अतिरिक्त सर्तकता भी बरतते हैं, जो रिफण्ड अटकने का बड़ा कारण बना हुआ है. अब जरूरत इस बात की है कि जब विभाग देरी से आयकर जमा कराने की दशा में करदाता को जिम्मेदार मान कर उससे जुर्माना वसूलता है तो देरी से रिफण्ड जारी करने के मामले में रिफण्ड जारी करने वाले अधिकारी की भी जिम्मेदारी तय करें और रिफण्ड पर दिए जाने वाले ब्याज की वसूली उससे निजी रूप से वसूले तो रिफण्ड में देरी की समस्या का आसान हल निकल सकता है, और समय पर आयकर रिफण्ड जारी करने से देश के आयकर संग्रहण की भी सही स्थिति देश के सामने आएगी. 

...विमल कोठारी, फर्स्ट इण्डिया न्यूज, जयपुर


 

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PLAY STORE से हटाया गया PAYTM, गूगल ने लगाया आरोप, कहा-नियमों का किया उल्लंघन

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नई दिल्ली: भारत की डिजिटल पेमेंट ऐप पेटीएम (Paytm) को गूगल ने अपने प्ले स्टोर (Play Store) से हटा दिया है. कंपनी पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं. पेटीएम (Paytm) की तरफ से एक ट्वीट कर बताया गया है कि प्लेस्टोर (Play Store) पर फिलहाल यह एप कुछ समय के लिए उपलब्ध नहीं रहेगा. पेटीएम (Paytm) का Paytm First Games एप भी प्लेस्टोर से हटा दिया गया है.

पेटीएम ने किया ट्वीट:
पेटीएम (Paytm) ने शुक्रवार को एक ट्वीट कर लिखा, 'डियर पेटीएमर्स, पेटीएम (Paytm) एंड्रॉयड एप नए डाउनलोड और अपडेट्स के लिए उपलब्ध नहीं है. हम जल्द ही वापस आएंगे. आपका पूरा पैसा सुरक्षित है और आप पेटीएम (Paytm) सामान्य तरीके से यूज कर पाएंगे.

एंड्रॉयड के लिए प्ले स्टोर से हटाया:
आपको बता दें कि पेटीएम (Paytm) की ओर से हाल ही में फैंटेसी क्रिकेट टूर्नामेंट शुरू किया था, जिसके बाद यह दोनों ही एप हटा दिए गए हैं. पेटीएम (Paytm) को एंड्रॉयड के लिए प्ले स्टोर (Play Store) से हटाया गया है, लेकिन यह iOS यूज़र्स के लिए Apple के App Store पर उपलब्ध रहेगा. वहीं, जिनके फोन में पहले से पेटीएम (Paytm) है, वो अपना एप और मोबाइल वॉलेट पहले की तरह यूज कर पाएंगे.

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गूगल ने किया बयान जारी:
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक गूगल (Google) ने अपनी गैंबलिंग पॉलिसी को लेकर एक बयान जारी किया है. कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि हम ऑनलाइन कसीनो या फिर किसी भी तरह के अनियमित गैंबलिंग एप जो स्पोर्ट्स में सट्टा लगाने की सुविधा देते हैं, को प्लेटफॉर्म पर रहने की अनुमति नहीं देते हैं. इसमें ऐसे ऐप्स भी शामिल हैं, जो यूजर्स को ऐसी बाहरी वेबसाइटों पर ले जाते हैं, जो उन्हें किसी पेड टूर्नामेंट में नकद पैसे या फिर कैश प्राइज़ जीतने के लिए भाग लेने को कहती हैं. यह हमारी पॉलिसीज का उल्लंघन है.साथ ही गूगल (Google) ने यह भी कहा है कि जब कोई एप इन नीतियों का उल्लंघन करता है, तो उसके डेवलपर को इस बारे में सूचित किया जाता है, और जब तक डेवलपर ऐप को नियमों के अनुरूप नहीं बनाता है, उसे तब तक गूगल प्ले स्टोर (Play Store) से हटा दिया जाता है.

भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशनों से वसूला जाएगा यूजर चार्ज, अब थोड़े महंगे हो सकते है ट्रेन टिकट!

भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशनों से वसूला जाएगा यूजर चार्ज, अब थोड़े महंगे हो सकते है ट्रेन टिकट!

नई दिल्ली: अगर आप भी ट्रेन में सफर करते है, तो यह खबर आपके लिए भी है. जी हां भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशनों से ट्रेन पकडने वाले यात्रियों की जेब पर भार पड़ने वाला है. क्योंकि भारतीय रेलवे अब आपसे यूजर चार्ज के तौर पर वसूली करेगा. भारतीय रेलवे ने विमानों के किराए की तर्ज पर एक फैसला लिया है, जिसमें वह जल्द ही पुनर्विकसित और अत्यधिक व्यस्त स्टेशनों पर यात्रियों से किराए में यूजर चार्ज वसूलना शुरू करेगा. इससे ट्रेन​ टिकट थोडे महंगे हो सकता है. रेलवे ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब देश में पहले से ही रेल किराए में संभावित वृद्धि और रेल क्षेत्र में निजी कंपनियों को लाए जाने पर चिंता व्यक्त की जा रही है.

यात्रियों को बेहतर सुविधाएं होगी उपलब्ध: 
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने बताया कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के क्रम में राजस्व जुटाने के लिए यह फैसला हुआ है. इसके प्रभाव में आने के बाद यह पहली बार होगा, जब रेल यात्रियों से इस तरह का शुल्क वसूला जाएगा. वीके यादव ने कहा कि शुल्क मामूली होगा और यह देश के 7 हजार रेलवे स्टेशनों में से लगभग 10-15 फीसदी स्टेशनों पर ही लागू किया जाएगा. 

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यूजर चार्ज संबंधी अधिसूचना होगी जारी:
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक सभी स्टेशनों जो पुनर्विकसित हो रहे हैं या नहीं, दोनों के लिए यूजर चार्ज संबंधी अधिसूचना जारी होगी. वीके यादव ने कहा कि यूजर चार्ज सभी 7 हजार स्टेशनों पर नहीं, बल्कि केवल उन्हीं स्टेशनों पर वसूल किया जाएगा, जहां अगले 5 वर्ष में यात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी. यह लगभग 10-15 फीसदी रेलवे स्टेशनों पर ही लागू किया जाएगा. उधर, नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि मेरा मानना है कि पात्रता सुनिश्चित करेगी कि आगे चलकर यात्री किराए और माल भाड़े दोनों में कमी आएगी.

सीएम गहलोत ने 400 से अधिक किसानों से किया सीधा संवाद, कहा- किसान के बेटे अब गांव में रहकर ही उद्यमी बन सकते हैं

सीएम गहलोत ने 400 से अधिक किसानों से किया सीधा संवाद, कहा- किसान के बेटे अब गांव में रहकर ही उद्यमी बन सकते हैं

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज प्रदेश के 400 से अधिक किसानों से सीधा संवाद करके राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति 2019 की समीक्षा की. मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योग लगाओ आय बढ़ाओ की थीम पर यह नीति लागू की गई है, जिसका किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाना चाहिए.  

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण चिकित्सकों की सलाह पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अगले एक महीने तक लोगों से मुलाकात के कार्यक्रम तो रद्द कर दिए है, लेकिन सुशासन के लिए वीसी के माध्यम से संवाद व बैठकों का दौर जारी है. इसी क्रम में सीएम गहलोत ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास से वीसी के माध्यम से राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति 2019 की समीक्षा की. इस वीसी में कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना, राज्य मंत्री टीकाराम जूली, मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, एसीएस वित्त निरंजन आर्य, प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा, सिद्धार्थ महाजन भी मौजूद थे. 

428 किसानों और 144 मंडियों के सचिवों के साथ चला संवाद:
करीब दो घंटे तक 428 किसानों और 144 मंडियों के सचिवों के साथ चले इस संवाद में मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई नीति यदि कागजों तक सीमित रहती है, तो उसका महत्व नहीं है, ऐसे में किसानों की नीति काफी विचार विमर्श के बाद बनाई गई है और किसानों को इस नीति के तहत अपने कृषि से जुड़े उद्योग स्थापित करके सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का फायदा उठाना चाहिए. सीएम ने कहा किसान के बेटे अब अपने गांव में रहकर ही उद्यमी बन सकते हैं, क्योंकि कई बार खेती में तो लागत मूल्य भी नहीं मिलता, ऐस में अब किसानों को खुद को थोड़ा डाइवर्ट करना चाहिए. कोविड के कारण प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था खराब है, इसलिए हमें खुद के पैरों पर ही खड़ा होना पड़ेगा. सीएम ने कहा कि प्रंस्करण नीति के तहत बनने वाले उत्पादों की मार्केटिंग के लिए सभी जिलों में प्रकोष्ठ बनेगा. 

करीब एक दर्जन किसानों व किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा की:
वीसी के माध्यम से हुए कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के करीब एक दर्जन किसानों व किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा की. गोकुलपुरा (सीकर) के बनवारी, जोधपुर की मनीषा, फलौदी के गजेंद्र सिंह व खींवसर के धर्मराज सहित कई किसानों से सीएम ने चर्चा की. जोधपुर के महेश सोनी का ग्वार से हाई प्रोटीन निकालने के प्लांट का प्लान मुख्यमंत्री को काफी पसंद आया और उन्होंने सोनी से इस बारे में लंबी चर्चा की. वहीं हनुमानगढ़ के दयाराम जाखड़ ने खजूर की खेती को लेकर सीएम से बात की और कुछ मांगे मुख्यमंत्री के सामने रखी. मुख्यमंत्री ने भी तुरंत मांग मानने का वादा किया. इस दौरान खजूर को लेकर कृषि मंत्री लालचंद कटारिया व मुख्यमंत्री गहलोत ने चुटकी भी ली. 

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कृषि विभाग के प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा ने प्रजेंटेशन दिया:
इससे पहले कृषि विभाग के प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा ने राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति 2019 के बारे में प्रजेंटेशन दिया. उन्होंने नीति के तहत किसानों को परिवहन, बिजली व सौर ऊर्जा सयंत्र पर मिलनी वाली सब्सिडी की जानकारी दी और बताया कि महिलाओं के लिए अलग से ब्याज अनुदान का प्रावधान है. कुंजीलाल ने बताया कि नीति के तहत अब तक 137 आवेदन आए हैं, जिनमें से 53 आवेदन स्वीकृत हो गए हैं और 84 प्रक्रियाधीन है. अब तक 247 करोड़ के निवेश राशि के आवेदन आए है. 53 प्रकरणों में 18.12 करोड़ की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है. 

अब किसानों की नई पीढ़ी अपना रोजगार खुद विकसित कर सकती है:
वीसी में किसानों को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि अब किसानों की नई पीढ़ी अपना रोजगार खुद विकसित कर सकती है. वहीं सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि चुनाव में कई नेता कृषि आय बढाने की बात करते है, लेकिन किसानों की असली पीड़ा गहलोत ने समझी है. आंजना ने सहकारिता के मामले में आगे बढ़ने की अपील की. राज्यमंत्री टीकाराम जूली ने सुझाव दिया कि प्रोसेसिंग यूनिट को लेकर सरकार को अपने स्तर पर क्षेत्रवार अध्ययन कराना चाहिए, क्योंकि प्रदेश के हर जिले की अपनी विशेष खूबी है. ऐसे में प्रत्येक जिले में यूनिट का लक्ष्य निर्धारित होना चाहिए. 

किसान अब उद्यमी बन सकता है:
राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति पिछले साल दिसंबर में आई थी और किसानों के लिए यह क्रांतिकारी साबित हो सकती है. इस नीति के तहत अब किसान अपनी जमीन पर ही कृषि से जुड़े उत्पादों की प्रोसेसिंग यूनिट लगा सकता है, किसान अब उद्यमी बन सकता है. यानी अब किसान भी उद्योग लगाओ और खूब कमाओ. बस जरूरत है सरकारी सिस्टम को सुधारकर इस नीति का जमीनी स्तर तक प्रचार प्रसार करने का, ताकि असली किसान इस नीति के तहत सरकार की योजना का फायदा उठा सके. 

आज से फिर शुरू हुई 5 माह बाद मुंबई से जोधपुर की एयर कनेक्टिविटी, चेन्नई के लिए अब रोजाना संचालन 

आज से फिर शुरू हुई 5 माह बाद मुंबई से जोधपुर की एयर कनेक्टिविटी, चेन्नई के लिए अब रोजाना संचालन 

जोधपुर: लॉकडाउन के दौरान बंद हुई जोधपुर से मुंबई की शेड्यूल फ्लाइट पांच माह बाद आज से फिर शुरू हो गई है. इंडिगो एयरलाइंस की मुंबई-जोधपुर की फ्लाइट संख्या 6E247 मुंबई से दोपहर 1:30 बजे रवाना होकर दोपहर 3:05 बजे जोधपुर पहुंची और इसका फेयर 6757 रुपए रखा गया है. यह फ्लाइट सप्ताह में 3 दिन संचालित होगी. यह फ्लाइट सप्ताह में मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को संचालित होगी. 

चेन्नई से जोधपुर की शेड्यूल फ्लाइट अब सातों दिन होगी संचालित :
वहीं दूसरी और हफ्ते में 4 दिन चलने वाली इंडिगो की चेन्नई से जोधपुर की शेड्यूल फ्लाइट अब सातों दिन संचालित होगी. इसके अलावा बेंगलुरु के लिए हफ्ते में 4 दिन फ्लाइट संचालित होती रहेगी. 2 सितंबर से जोधपुर से बेंगलुरु के बीच हवाई यात्रा करने वालों का शानदार रुझान रहा है. इन दिनों में दोनों ही शहरों से 2448 यात्रियों ने हवाई सफर किया है. जोधपुर एयरपोर्ट निर्देशक जीके खरे ने बताया कि विंटर सीजन का शेड्यूल जारी होने के दौरान दिल्ली के लिए फ्लाइट मिलने की उम्मीद है. 

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प्रवासियों का यात्री भार काफी अच्छा :
दक्षिण भारत के शहरों से जोधपुर सहित मारवाड़ के विभिन्न जिलों के प्रवासियों का यात्री भार काफी अच्छा है. इसका प्रमुख कारण दक्षिण के शहरों से अभी ट्रेन की कनेक्टिविटी नहीं होना भी है. जोधपुर से अभी सिर्फ मुंबई के लिए सूर्यनगरी एक्सप्रेस ही संचालित हो रही है. अब यशवंतपुर के लिए ट्रेन चलने वाली है.  यात्रियों का रुझान अच्छा है. बीते 4 दिनों में चेन्नई और बेंगलुरु के लिए आने जाने वाली फ्लाइट खचाखच भर कर गई है. बेंगलुरु की फ्लाइट में 551 यात्री आए और 630 यात्री गए वहीं चेन्नई की फ्लाइट में 575 यात्री और 672 यात्री गए हैं. 

VIDEO: यात्री मिले तो ठीक, वर्ना फ्लाइट कैंसिल! इंडिगो ने मात्र 1 सप्ताह में ही बंद की 2 शहरों की फ्लाइट

जयपुर: लॉक डाउन के बाद जब हवाई सेवाओं का संचालन धीरे-धीरे सुचारू हो रहा है. ऐसे में एयरलाइंस की अपना मुनाफा बढ़ाने की प्रवृत्ति यात्रियों पर भारी पड़ रही है. एयरलाइंस इन दिनों कम यात्री होने पर फ्लाइट्स को अचानक रद्द कर रही हैं. ऐसे में जिन कुछ यात्रियों की फ्लाइट में बुकिंग होती है, उनके लिए परेशानी खड़ी हो जाती है. हद तो यह है कि एयरलाइन मात्र कुछ दिन फ्लाइट चलाने के बाद ही इन्हें बंद भी कर रही हैं. देखिए, फर्स्ट इंडिया न्यूज़ की हवाई यात्रियों से जुड़ी यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट-

चंडीगढ़ और लखनऊ की फ्लाइट अचानक बंद:
अगर आप हवाई यात्रा करने जा रहे हैं तो जरा गौर से इस खबर को देखिए. और उन फ्लाइट के बारे में जानकारी नोट कर लीजिए, जो इन दिनों अक्सर रद्द हो रही हैं. ये फ्लाइट्स इन दिनों अचानक रद्द कर दी जाती हैं और यात्रियों को ऐनवक़्त पर सूचना दी जाती है. हालांकि एयरलाइन फ्लाइट रद्द करने के पीछे संचालन कारणों का हवाला देती हैं. लेकिन एयरपोर्ट से जुड़े सूत्रों की मानें तो किसी भी फ्लाइट में 40 प्रतिशत से कम यात्री होने पर एयरलाइंस फ्लाइट संचालन करने को मुफीद नहीं मानती. इस कारण फ्लाइट को रद्द कर देती हैं. ताजा मामला इंडिगो द्वारा पिछले सप्ताह शुरू की गई 2 शहरों की फ्लाइट का है. इंडिगो ने 25 अगस्त से लखनऊ और चंडीगढ़ के लिए 2 नई फ्लाइट शुरू की थी. ये फ्लाइट सप्ताह में 3 दिन संचालित होनी थी. इन फ्लाइट्स का संचालन अभी तक मात्र 4 बार ही हो सका था कि एयरलाइन ने दोनों फ्लाइट को बंद कर दिया है. एयरपोर्ट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक 180 सीटर विमान के लिए मात्र 30 से 40 यात्री ही मिल पा रहे थे. ऐसे में एयरलाइन ने विमान खाली चलाने के बजाय फ्लाइट्स को बंद करना ही मुनासिब समझा. हालांकि जिन यात्रियों ने इन फ्लाइट्स में आगामी दिनों के लिए बुकिंग की हुई है, उनके लिए परेशानी खड़ी हो गई है.

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ये 2 फ्लाइट हुई मात्र 1 सप्ताह में बंद
- इंडिगो की फ्लाइट 6E-6132 हुई बंद
- लखनऊ से सुबह 8:25 बजे जयपुर पहुंचती थी फ्लाइट
- जयपुर से सुबह 9:15 बजे होती थी चंडीगढ़ रवाना
- इंडिगो ने जयपुर रूट पर बंद की फ्लाइट
- अब लखनऊ-चंडीगढ़-श्रीनगर रूट पर हो रही संचालित
- इंडिगो की फ्लाइट 6E-6133 हुई बंद
- चंडीगढ़ से दोपहर 1:05 बजे जयपुर आती थी फ्लाइट
- जयपुर से दोपहर 1:55 बजे होती थी लखनऊ के लिए रवाना
- अब इंडिगो ने इसे चंडीगढ़-लखनऊ-रायपुर रूट पर किया संचालित

इन 2 फ्लाइट्स के अलावा जयपुर एयरपोर्ट से इन दिनों आधा दर्जन ऐसी फ्लाइट भी संचालित हो रही हैं, जो सप्ताह में आधे दिन ही चल पाती हैं. दरअसल इन फ्लाइट्स में यात्रियों की जब भी बुकिंग कम होती है, एयरलाइन संचालन कारण बताते हुए फ्लाइट्स को रद्द कर देती हैं. ना केवल निजी क्षेत्र की एयरलाइन, बल्कि एयर इंडिया भी इस मामले में पीछे नहीं है. इनमें सबसे ज्यादा आगरा जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट रद्द होती है.

ये फ्लाइट जो हो जाती हैं कभी भी रद्द
- एयर इंडिया की सुबह 7:45 बजे आगरा जाने वाली फ्लाइट 9I-687 
- एयर इंडिया की सुबह 11 बजे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट 9I-844
- पिछले 2 सप्ताह से अक्सर रद्द चल रही दोनों फ्लाइट
- जयपुर से सुबह 7 बजे अमृतसर जाने वाली स्पाइस जेट की फ्लाइट SG-2773
- 23 अगस्त से शुरू हुई, लेकिन अभी तक 13 दिन में मात्र 3 दिन ही संचालित हुई
- इंडिगो की सुबह 7:15 बजे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट 6E-665
- सप्ताह में 1 या 2 दिन रद्द रहती है फ्लाइट
- स्पाइस जेट की सुबह 10:05 बजे दिल्ली की फ्लाइट SG-8714 भी सप्ताह में रहती 1 या 2 दिन रद्द
- एयर इंडिया की रात 9 बजे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट 9I-644 भी रहती 1 या 2 दिन रद्द

पश्चिम बंगाल में लॉक डाउन से रद्द होती हैं कोलकाता की फ्लाइट:
इस सूची के अलावा इन दिनों कोलकाता के लिए संचालित होने वाली फ्लाइट भी अनियमित चल रही हैं. लेकिन उसके पीछे पश्चिम बंगाल राज्य सरकार द्वारा वहां पर लगाया जाने वाला लॉकडाउन है. लॉकडाउन के चलते लॉकडाउन वाले दिनों में हवाई और रेल यातायात पूरी तरह से प्रतिबंधित रहता है. ऐसे में जयपुर से कोलकाता जाने वाली 4 फ्लाइट भी रद्द हो जाती हैं. बड़ी बात यह है कि फ्लाइट रद्द होने के बाद एयरलाइन यात्रियों को किराया भी रिफंड नहीं करतीं. बल्कि आगामी दिनों में उस राशि से टिकट बुक करने के लिए मजबूर करती हैं. नियामक एजेंसी डीजीसीए की जानकारी में यह सब होने के बाद भी एयरलाइंस की इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लग पा रही है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की​ रिपोर्ट

VIDEO: आबकारी विभाग का शानदार प्रदर्शन, अगस्त 2020 में 819 करोड़ रुपए का राजस्व किया अर्जित

जयपुर: लॉकडाउन हटने के बाद आबकारी विभाग ने राजस्व अर्जन में कमाल का प्रदर्शन किया है.कोरोना के व्यापक असर के बाद भी आबकारी विभाग ने जून जुलाई और अगस्त के महीने में रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया है. कोरोना संक्रमण के व्यापक प्रभाव का असर हर ओर देखने को मिल रहा है. ऐसे कठिन समय में भी आबकारी बेहतर प्लानिंग से कमाल का प्रदर्शन कर रहा है.वित्तीय वर्ष में 12500 करोड़ के भारी भरकम टारगेट को पूरा करने की जिम्मेदारी आबकारी विभाग के पास है. लेकिन लॉकडाउन के कारण जहाँ अप्रैल के महीने में शराब की दुकानें बंद रहीं तो वहीं मई में भी कोरोना से शराब व्यवसाय प्रभावित रहा. लॉकडाउन हटने और जनजीवन सामान्य होने के बाद आबकारी विभाग के सामने अप्रैल और मई महीने के नुकसान की भरपाई की भी चुनौती थी.जिससे विभाग ने अच्छी तरह से पार पाई है. अतिरिक्त मुख्य सचिव निरंजन आर्य और एफएसआर डॉ पृथ्वी की मॉनीटिरिंग में आबकारी आयुक्त जोगाराम और उनकी टीम ने जुलाई और अगस्त महीने में रिकॉर्ड राजस्व हासिल किया है. इस वित्तीय वर्ष की बात करें तो विभाग अभी तक 3301 करोड़ का राजस्व हासिल कर चुका है.

आपको बताते हैं किस माह में कितना राजस्व किया अर्जित

-अप्रैल 2019 में 670 करोड़ रुपए का राजस्व
-अप्रैल 2020 में 145.17 करोड़ रुपए का राजस्व
-मई 2019 में 857 करोड़ रुपए का राजस्व
-मई 2020 में 697 करोड़ रुपए का राजस्व
-जून 2019 में 648 करोड़ रुपए का राजस्व
-जून 2020 में 740 करोड़ रुपए का राजस्व
-जुलाई 2019 में 779 करोड़ रुपए का राजस्व
-जुलाई-2020 में 900 करोड़ रुपए का राजस्व
-अगस्त 2019 में 652 करोड़ रुपए का राजस्व
-अगस्त 2020 में 819 करोड़ रुपए का राजस्व

कुल राजस्व-
-अप्रैल-अगस्त 2019 तक 3,606 करोड़ रुपए का राजस्व
-अप्रैल से 2020 अब तक 3,301 करोड़ रुपए का राजस्व

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आबकारी विभाग के अफसरों के सामने मौजूदा वित्तीय वर्ष में 12 हजार 500 करोड़ रुपये का भारी भरकम राजस्व लक्ष्य हासिल करने के बड़ी चुनौती है.इस टारगेट को अचीव करने के लिए विभाग को इसी रफ्तार से काम करना होगा. आबकारी मुख्यालय से मिले अधिकृत आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 में आबकारी मद से राज्य सरकार को कुल 9 हजार 600 करोड़ रुपये का राजस्व मिला.हालांकि लक्ष्य तय हुआ था 11 हजार करोड वसूली का.कोरोना संकट की वजह से मार्च 2020 के आखिरी हफ्ते से 3 मई तक करीब 41 दिनों के लॉकडाउन से अकेले आबकारी मद से 1000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है.इस नुकसान की भरपाई के लिए प्रदेश सरकार ने अंग्रेजी शराब और बीयर के दामों में बढ़ोत्तरी की है.इस बढ़ोत्तरी से आबकारी विभाग को 300 करोड रूपए की अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो सकेगी.

कोरोना काल में यह हैं आबकारी विभाग के सामने चुनौतियां
-होटल-बार खोलने की अनुमति तो मिली लेकिन पर्यटक नहीं पहुंच रहे
-देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या का लगातार गिर रहा ग्राफ
-कोरोना के कारण बीयर की बिक्री में आई है भारी कमी
-विवाह समारोह और कॉरपरेट मीटिंग भी नहीं हो रही हैं
-बड़े शहरों में से काफी लोग पलायन कर चुके हैं

कोरोना काल की बड़ी चुनौतियों के बीच भी जिस तरह से आबकारी विभाग ने राजस्व अर्जन में रफ्तार पकड़ी है वह काबिले तारीफ़ है.आबकारी आयुक्त जोगाराम भविष्य की प्लानिंग भी कोरोना को ध्यान में रखखर ही तैयार कर रहे हैं. ऐसे में उम्मीद है कि आने वाले महीनों में विभाग इसी तरह से प्रदर्शन जारी रखेगा.

...फर्स्ट इंडिया के लिए शिवेंद्र परमार की रिपोर्ट

VIDEO: प्रदेश के पर्यटन के लिए अच्छी खबर, जुलाई की अपेक्षा अगस्त में 3 गुना पर्यटक

जयपुर: प्रदेश के पर्यटन उद्योग के लिए अच्छी खबर है. कोरोना संक्रमण के ख़ौफ़ पर पर्यटन जीत की ओर आगे बढ़ रहा है. अगस्त के महीने में प्रदेश में पर्यटकों की संख्या 55 हजार से ज्यादा रही. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि नए पर्यटन सत्र में इस संख्या में और इजाफा होगा. इससे न केवल प्रदेश के पर्यटन उद्योग को मजबूती मिलेगी वरन पर्यटन से जुड़े लाखों लोग जो कोरोना की चपेट में आकर बेरोजगार हो गए थे उन्हें भी एक बार फिर अपने पसंदीदा रोजगार से जुड़ने का मौका मिलेगा. 

राजधानी के स्मारक प्रसिद्धि हासिल कर चुके:
राजस्थान को पर्यटन का प्रदेश माना जाता है. राजधानी जयपुर के स्मारक देश और दुनिया में इतनी प्रसिद्धि हासिल कर चुके है की गूगल पर भी एक क्लिक करो तो एक-एक स्मारक के लाखों पेज खुल जाते हैं. प्रदेश में पर्यटन ढांचा इतना मजबूत हुआ करता था जिस पर स्वाइन फ्लू, जीका, एंथ्रेक्स, सार्स और न जाने कितने वायरस आक्रमण कर चुके हैं लेकिन राजस्थान के पर्यटन ढांचे को टस से मस भी नहीं कर पाए. लेकिन इस बार देश और प्रदेश के पर्यटन पर जिस कोरोना नाम के वायरस ने हमला किया है उसके आगे प्रदेश प्रदेश का पर्यटन ढांचा दरकता दिखाई दे रहा है. 

कोरोना के चलते पर्यटन उद्योग को अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा:
कोरोना संकट के चलते प्रदेश में 18 मार्च को सभी पर्यटन स्थल जिनमें मॉन्यूमेंट, म्यूजियम, नेशनल पार्क, बायोलॉजिकल पार्क, सफारी सभी को बंद कर दिया गया था. यही नहीं टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़े तमाम स्टेक होल्डर जिनमें होटल, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट्स, हाथी गांव जैसे तमाम पर्यटन से जुड़े स्थलों को भी बंद कर दिया गया था. इससे पर्यटन उद्योग को अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा. आखिर अनलॉक वन में 1 जून को प्रदेश के पर्यटन स्थलों को शुरू कर दिया गया. इसके बाद 8 जून से तमाम होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन से जुड़े अन्य स्थल भी सैलानियों के लिए खोल दिए गए. लेकिन 1 जून से 30 जून तक के पहले 1 महीने में पर्यटन स्थलों पर माहौल निराशाजनक ही रहा.  राजधानी में के कुल 8 स्मारक और संग्रहालयों पर 1 महीने में महज 5269 पर्यटक पहुंचे. जबकि राजधानी के बाहर के प्रदेश के मॉन्यूमेंट और म्यूजियम जिनकी संख्या 24 है उन पर महज 3537 पर्यटक ही 1 महीने में पहुंचे. इसके बाद प्रदेश में मानसून आने के साथ ही पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है.

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मानसून ने पर्यटन स्थलों को भी एक बार फिर गुलजार कर दिया:
यह अलग बात है कि जुलाई में पर्यटकों का आगमन अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंचा था लेकिन अगस्त में मानसून की जोरदार बरसात में पर्यटन स्थलों को भी एक बार फिर गुलजार कर दिया और जुलाई की अपेक्षा अगस्त में पर्यटकों की संख्या में 3 गुना से ज्यादा का इजाफा हुआ. सैलानियों की संख्या बढ़ने से होटल रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के चेहरे पर थोड़ी रौनक लौटी है. जुलाई महीने में प्रदेश में कुल 19326 पर्यटक आए इनमें से 12665 राजधानी जयपुर के पर्यटन स्थलों पर पहुंचे जबकि 6661 में प्रदेश के अन्य पर्यटन स्थलों का दौरा किया. प्रदेश में जून में महज 8806 पर्यटक ही पहुंचे थे. पहले महीने में 8806 और दूसरे महीने में 19326 पर्यटकों का आंकड़ा इसलिए भी निराशाजनक है क्योंकि आमतौर पर  सीजन में इतने पर्यटक महज एक दिन में राजधानी में दिखाई देते रहे हैं. लेकिन अगस्त आते आते प्रदेश में मानसून की बरसात में भी तेजी में और पर्यटन स्थल भी पावणो से आबाद नजर आए. अगस्त में राजधानी के पर्यटन स्थलों पर जहां 42 हजार 600 पर्यटक आए वही राजधानी के बाहर के पर्यटन स्थलों पर यह संख्या 13 हजार 93 के स्तर तक पहुंची. राजधानी में अगस्त में सर्वाधिक पर्यटक नाहरगढ़ और विश्व विरासत में शुमार आमेर में पहुंचे. आमेर में पर्यटकों की संख्या 15 हजार रही जबकि नाहरगढ़ यह आंकड़ा 17 हजार से ज्यादा के स्तर पर रही.

पर्यटन उद्योग से जुड़े हुए 10 लाख से ज्यादा लोग:
राजधानी के बाहर सर्वाधिक संख्या पर्यटक अलवर, गागरोन किला,  चित्तौड़ में पर्यटकों रही. प्रदेश में पर्यटन उद्योग से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 10 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं जिनमें छोटे-छोटे वेंडर, हॉकर से लेकर गाइड, महावत, लोक कलाकार और बड़े स्तर पर होटल, रिसोर्ट संचालक तक शामिल हैं. कोरोना संक्रमण का इन सभी पर बुरा असर हुआ है अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश के बाद प्रदेश के पर्यटन के प्रमुख सचिव आलोक गुप्ता सहित तमाम अधिकारी इस प्रयास में जुटे हुए हैं कि प्रदेश में सुरक्षित और स्वास्थ्य पर माहौल तैयार कर पर्यटन को वापस मुख्यधारा में लाया जाए. सभी का प्रयास है 1 सितंबर से शुरू हुए पर्यटन सत्र में प्रदेश में इस तरह का माहौल तैयार किया जाए जिससे घरेलू पर्यटक ज्यादा से ज्यादा संख्या में राजस्थान आएं. 
 

प्रदेश में टेक्सटाइल, रक्षा एवं उड्डयन क्षेत्र में होगा 4000 करोड़ रूपये का निवेश, रोजगार के अवसर होंगे पैदा

प्रदेश में टेक्सटाइल, रक्षा एवं उड्डयन क्षेत्र में होगा 4000 करोड़ रूपये का निवेश, रोजगार के अवसर होंगे पैदा

जयपुर: प्रदेश में जल्द ही टेक्सटाइल, रक्षा एवं उड्डयन क्षेत्रों में अधिक सुविधाओं का विकास होगा. इसके लिए राज्य सरकार ने अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनी श्री वल्लभ पित्ती SVP ग्रुप के साथ 4000 करोड़ रूपये के निवेश के लिए एमओयू पर साइन किये हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में मुख्यमंत्री निवास पर राज्य सरकार के उद्योग विभाग और एस.वी.पी. इंटरनेषनल ग्रुप के बीच एमओयू साइन हुआ. इसके तहत कंपनी की ओर से राजस्थान में रक्षा एवं एयरोस्पेस परियोजना, एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयर एण्ड ओवरहॉल (एम.आर.ओ) प्रोजेक्ट, एक उड्डयन अकादमी तथा टेक्सटाइल से संबंधित एक परियोजना विकसित करने का प्रस्ताव है.

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प्रदेश में 4000 व्यक्तियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे: 
इस निवेश से प्रदेश में 4000 व्यक्तियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. इस मौके पर उद्योग मंत्री परसादीलाल मीणा, उद्योग राज्यमंत्री अर्जुन सिंह बामणिया, मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, एसीएस वित्त निरंजन आर्य, एस.वी.पी. ग्रुप के चेयरमैन वल्लभ पित्ती तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे. उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव नरेशपाल गंगवार, तथा ग्रुप के कार्यकारी निदेषक प्रवीण शैली ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये.  इससे पूर्व कम्पनी के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में निवेश प्रस्तावों के विषय में प्रस्तुतीकरण दिया. राज्य सरकार इन परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्नवयन हेतु प्रमुख शासन सचिव, उद्योग की अध्यक्षता में एक समिति गठन करने के निर्देश दिए हैं. 

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