नामांकन शुरू होते ही निर्वाचन आयोग के शिकंजे में उलझेंगे प्रत्याशी!

Dr. Rituraj Sharma Published Date 2018/11/10 03:52

जयपुर (ऋतुराज शर्मा)। प्रत्याशी बनने जा रहे नेताओं के लिए अगला सप्ताह खासा चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। टिकट पाने के बाद जब वे थोड़ी राहत की सांस ले रहे होंगे तब ही नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ उन पर भारत निर्वाचन आयोग का शिकंजा और कसेगा। आइये इस खास रिपोर्ट के जरिये जानते हैं कैसे-

महज टिकट पाकर ही अगर आप विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए निश्चिंत हो गए हो तो थोड़ा रुकिए। अगले सप्ताह यानि 12 नवंबर से नामांकन शुरू होने के साथ ही प्रत्याशी एक के बाद एक ऐसे शिकंजे में उलझेंगे कि उन्हें फिलहाल राहत की सांस नहीं मिलनेवाली है।

नामांकन भरने के साथ यह देना होगा ब्योरा-
—इस बार भारत निर्वाचन आयोग ने  दागी उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी आम जनता को हो इसलिए यह प्रावधान किया है-
—चुनाव आयोग ने फॉर्म 26 में किया संशोधन।
—सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर किया है संशोधन।
—अब अभ्यर्थी को पर्चा दाखिल करते समय  आपराधिक  मामलों की जानकारी देनी होगी।
—दर्ज और लंबित केसेस की जानकारी देनी होगी।
—अभ्यर्थियों को नामांकन के दौरान मोटे अक्षरों में आपराधिक मामलों की जानकारी दर्शानी होगी। 
—दोषसिद्ध हो जाए या उसके विरूद्ध कोई भी आपराधिक मामला दर्ज या लंबित हो, तो अभ्यर्थियों को ऐसे प्रकरणों की जानकारी तीन अलग-अलग तिथियों में —नामांकन वापसी और मतदान तिथि से 2 दिन पूर्व 12 साइज के फाॅन्ट में अपनी विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित करवानी होगी। 
—आपराधिक मामलों की जानकारी प्रिन्ट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में व्यापक तौर पर कम से कम 3 बार प्रकाशित और प्रसारित करवानी होगी।
—केन्द्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने इसमें संशोधन किया है। 
—संशोधन के तहत सभी राजनैतिक दलों को चुनाव सम्पन्न होने से 30 दिनों के भीतर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए गए हैं कि जिसमें इस बात का स्पष्ट उल्लेख हो कि उनके द्वारा निर्देशों की पालना कर दी गई है।
—साथ ही पार्टी द्वारा समाचार पत्रों की कटिंग्स भी लगानी पड़ेंगी। इसके अलावा उम्मीदवारों द्वारा प्रकाशित और प्रसारित सूचना को जिला निर्वाचन अधिकारी को चुनाव व्यय के ब्योरे के साथ भी प्रस्तुत करना होगा।

यही नहीं इन अभ्यर्थियों को नामांकन भरते समय इन विभागों से प्रमाण पत्र भी देना होगा कि उनका कोई बकाया राशि का भुगतान बाकी नहीं है-
1.कार्मिक विभाग के सारे अनुभाग
2.जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (इसमें बिजली बिल की राशि देना बकाया नहीं-यह होता है प्रमाण पत्र)
3.राजस्थान स्टेट मोटर गैराज (इसमें गाड़ियों से जुड़े नो ड्यूज देना होगा।)
4.संपदा विभाग (इससे जुड़ी संपत्ति के उपयोग को लेकर कोई बकाया नहीं,इसका प्रमाण पत्र।)
5.जीएडी ग्रुप 3 व ग्रुप 4 (सरकारी आवास से जुड़े नो ड्यूज)
6.पीएचईडी (पानी के बिल संबंधी नो ड्यूज)
7.बीएसएनएल (टेलीफोन व इंटरनेट बिल संबंधी नो ड्यूज)
8.पीडब्ल्यूडी (इस विभाग का विद्युत/फर्नीचर/आवास संबंधी अदेयता प्रमाण पत्र देना होगा।)

इसके साथ ही नामांकन शुरू होने के साथ मॉनिटरिंग का दायरा इस तरह बढ़ेगा-
—12 नवंबर को नामांकन शुरू होने के साथ भारत निर्वाचन आयोग की मॉनिटरिंग का दायरा बढ़ जाएगा।
—इसके बाद से ही प्रत्याशियों की ओर से किया जा रहा तमाम तरह का खर्च उसके खाते में जुड़ेगा।
—गौरतलब है कि आयोग ने प्रत्याशियों की व्यक्तिगत खर्च की सीमा 28 लाख तय कर रखी है।
—ऐसे में चुनाव प्रचार शुरू होने के साथ मतदान के दिन तक विशेष ध्यान रखना होगा।
—इन खर्चों में पोस्टर,पर्चे,बैनर,पेम्पलेट सहित तमाम तरह के प्रचार माध्यमों से प्रचार तो शामिल है ही...वेबसाइट के जरिए किया गया प्रचार भी शामिल किया जाएगा।
—इसके साथ ही अन्य तरह के अन्य जरिए से किए गए प्रचार का खर्चा भी प्रत्याशियों के व्यक्तिगत खाते में जुड़ेगा।
—नामांकन से पूर्व खर्चा पार्टी के खाते में जोड़ा जा रहा है।गौरतलब है कि राजनीतिक दल के खर्चे की सीमा तय नहीं है।

इसी के साथ प्रत्याशियों को यह भी ध्यान रखना होगा-

विज्ञापन के सर्टिफिकेशन के बारे में
—सोशल मीडिया, एप्स, मोबाइल भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में शामिल है।
—इसमें जो विज्ञापन होगा उसका सर्टिफिकेशन जरूरी होगा
—ब्लॉग विज्ञापन की श्रेणी में नही माना जायेगा।
—इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विज्ञापन का अधि प्रमाणन समिति से सर्टिफिकेशन जरूरी है 
—प्रदेश में 90 से ज्यादा दल रजिस्टर्ड लेकिन मान्यता प्राप्त नहीं है
—राजस्थान में 1 भी राज्यस्तरीय दल नहीं है।

सर्टिफिकेशन इसलिए जरूरी कि
—इससे पता चलता है कि विज्ञापन विद्वेष नहीं फैला रहा हो। 
—यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि आचार संहिता का उल्लंघन न हो।
—जबकि प्रिंट मीडिया में पोलिंग से 48 घण्टे पहले सर्टिफिकेशन जरूरी है। 
—चुनाव समाप्ति के आधा घण्टे  तक एक्जिट पोल नहीं दे सकते।

—बल्क sms से विज्ञापन का भी सर्टिफिकेशन जरूरी
—राज्य स्तर पर इसके लिए एसीईओ की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है।
—पार्टी जब अधि प्रमाणन के लिए जल्दी में हो तो वह ट्रांसक्रिप्ट देती है और उससे सर्टिफिकेशन हो जाता है।
—48 घण्टे में हो जाता सर्टिफिकेशन।
—ई पेपर में दिए विज्ञापनों का भी सर्टिफिकेशन जरूरी
—अखबार में सर्टिफिकेशन जरूरी नहीं लेकिन ऐसे विज्ञापनों के लिए एक बार फॉर्म भरने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा जिसमें पूरा ब्योरा देना पड़ेगा।
—वहीं ई पेपर में दिए जानेवाले विज्ञापन का सर्टिफिकेशन जरूरी है।
—विज्ञापन सर्टिफिकेशन से जुड़ी शिकायत के लिए अपीलीय कमेटी गठित
—सीईओ अध्यक्ष हैं इसके,बाकी 2 सदस्य
—सोशल मीडिया को पूरा नियंत्रण का मैकेनिज्म नहीं अभी तक
—अभ्यर्थी शपथ पत्र में सोश्यल मीडिया के बारे में देगा जानकारी

संदिग्ध न्यूज के बारे में
—संदिग्ध न्यूज भेजी जाएगी MCMC को
—96 घण्टे में नोटिस जारी किया जाएगा
—48 घण्टे में जवाब देना होगा अभ्यर्थी को
—48 घण्टे में mcmc करेगी निर्णय
—डीआईपीआर के मूल्य से लागत जोड़ी जाएगी प्रत्याशी के खाते में

यह है प्रक्रिया
—जिला स्तरीय समिति भेजेगी MCMC को
—4-5 श्रेणी के मामले रखे जाएंगे जिला MCMC में
—फिर अभ्यर्थियों को नोटिस भेजा जाएगा RO द्वारा
—जवाब व दस्तावेज आने पर RO भेजेगा MCMc को
—फिर MCMC करेगी निर्णय कि वह पेड न्यूज है या नहीं
—उसका खर्चा प्रत्याशिबके खाते में जोड़ा जाएगा
—इसके विरुद्ध राज्य MCMC को कर सकता है

पेड न्यूज के बारे में
—सेरोगेट विज्ञापन आते कई बार अखबार,टीवी में जो न्यूज दिखती है पर न्यूज होती नहीं है।
—न्यूज के साथ एनालिसिस भी इस दायरे में आती है। 

सोशल मीडिया पर विज्ञापन
—सोशल मीडिया की टीम का वेतन राजनीतिक दल के खाते में जोड़ेंगे।
—इंटरनेट कंपनी व वेबसाइट का भुगतान भी जोड़ा जाएगा।
—विज्ञापन बनाने वाली कंपनी की कोस्ट जुड़ेगी
—विज्ञापन चलाने वाले की कोस्ट भी जुड़ेगी
—चुनाव खर्चे में दी जाएगी
—सोशल मीडिया की सामग्री आचार संहिता उल्लंघन वाली नहीं हो

सी-विजिल एप शुरू होने के साथ संभावित प्रत्याशियों पर शिकंजा पहले ही कस चुका है लेकिन अभी चूंकि वे प्रत्याशी नहीं हैं तो उनके खाते में चुनाव खर्च जुड़ने से वे बच रहे हैं।
 

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