अयोध्या केस: सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता कमेटी को दिया 31 जुलाई तक फाइनल रिपोर्ट देने का समय

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/18 11:08

नई दिल्ली: अयोध्या जमीन प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. गुरुवार को रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता कमेटी को 31 जुलाई तक फाइनल रिपोर्ट देने का समय दिया है. इसके बाद 2 अगस्त से 5 जजों की बैंच प्रकरण पर रोजाना सुनवाई करेगी. 

मध्यस्थता कमेटी से हो रही समय की बर्बादी: 
कुछ दिन पहले राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के मामले में एक पक्षकार गोपाल सिंह विशारद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका की थी. इसमे याचिकाकर्ता ने कहा था कि मध्यस्थता कमेटी के आधार पर विवाद सुलझने के आसार काफी कम हैं, क्योंक इसमें तो सिर्फ समय की बर्बादी हो रही है, इसलिए कोर्ट मध्यस्थता कमेटी खत्म कर स्वंय सुनवाई करके मामले का निस्तारण करें. 

विवाद मध्यस्थता के जरिए सुलझना मुश्किल: 
याचिकाकर्ता के वकील ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ के सामने कहा था कि यह विवाद पिछले 69 सालों से अटका पड़ा है और मामले को हल करने के लिए शुरू की गई मध्यस्थता का रुख सकारात्मक नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में यह विवाद मध्यस्थता के जरिए सुलझना मुश्किल है. 

जस्टिस कलीफुल्ला की अध्यक्षता में बनी थी कमेटी: 
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस कलीफुल्ला की अध्यक्षता में मध्यस्थता कमेटी बनाकर इस मसले को बातचीत के जरिए आपसी सहमति से ही सुलझाने की पहल की थी. पहले कमेटी को दो महीने का समय दिया, फिर यह अविध 15 अगस्त तक के लिए बढ़ा दी गई. 

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