मंडावा से निर्दलीय विधायक नरेंद्र कुमार पर भाजपा ने 15 साल बाद जताया विश्वास

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/12 09:35

मंडावा(झुंझुनू)। भाजपा ने आखिरकार 15 साल बाद वर्तमान निर्दलीय विधायक नरेंद कुमार खीचड़ पर विश्वास जताया और इस बार 2018 विधानसभा चुनाव में उनको मंडावा से टिकट देकर अपना प्रत्याशी बनाया है। नरेंद्र कुमार को 23 सितंबर के दिन यहां कस्बे में हुई सभा के दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने नरेंद्र को पार्टी में शामिल करने की घोषणा करते हुए यहां से टिकट देने का भी आह्वान किया था। 

ऐसे में एक और जहां कार्यकर्ताओं में खुशी है तो वहीं दुसरी और नरेंद्र कुमार की प्रतिष्ठा भी इस बार दाव पर रहेगी क्योंकि स्वंय वसुंधरा राजे ने अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाने की घोषणा की थी और इस बार टिकट भी मिल गया। अब यहां पर यह देखना होगा की भाजपा पार्टी में किसी प्रकार की गुटबाजी सामने नही आए तथा कार्यकर्ता एक होकर चुनाव लड़े। वर्तमान निर्दलीय विधायक खीचड़ के अलावा यहां पर पार्टी के पास कोई दमदार चेहरा नही था। 

अगर मंडावा विधानसभा क्षेत्र से सारे रिकॉर्ड तोड़कर जनता भाजपा पर विश्वास जताती है तो यह यहां का एक नया इतिहास भी बनेगा क्योंकि आज तक यहां कमल नही खिल पाया है। तथा हमेशा से ही कांग्रेस पार्टी का दबदबा इस क्षेत्र में रहा है । जिस विश्वास से भाजपा ने नरेंद्र पर विश्वास जता कर टिकट दिया है उस पर क्या वो खरे उतर पाएंगे यह तो 11 दिसंबर को ही पता चलेगा।

नरेंद्र कुमार की जीवनी:

57 वर्षीय नरेंद्र कुमार कमालसर गांव के रहने वाले है तथा बीकॉम, बीएड की शिक्षा ग्रहण की तथा अपेन राजनीतिक कैरियर में 2003 में भाजपा पार्टी से अलसीसर पंचायत समिति के प्रधान रहे। तथा 2003 में पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा तथा 12 हजार 403 वोट लिए। जबकि भाजपा प्रत्याशी कृष्ण कुमार जानू को 7 हजार 689 वोट ही मिलें। इसके बाद 2008 में दूसरी बार चुनाव लड़ा तथा कांग्रेस प्रत्याशी रीटा चौधरी से मात्र 405 वोटों से चुनाव हार गए। नरेंद्र ने 2003, 2008 में मंडावा से भाजपा की टिकट मांगी लेकिन नही मिली। वहीं 2013 में भी भाजपा से नरेंद्र प्रबल दावेदार थे लेकिन टिकट काट दिया गया और चुनाव में निर्दलीय ताल ठोकते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की। 

नरेंद्र ने 2003 व 2008 में निर्दलीय चुनाव लड़कर भी भाजपा उम्मीदवारों से ज्यादा वोट लिए। 2008 में भाजपा की प्रत्याशी सुमित्रासिंह थी जिनकी जमानत जब्त हों गई थी। सुमित्रा को 13 हजार 462 वोट मिलें तो नरेंद्र को 28 हजार 97 वोट मिहलें। नरेंद्र की खास बात यह रही की 15 सालों में निर्दलीय चुनाव लड़कर भी भाजपा का साथ नही छोड़ा और हमेशा पार्टी के साथ रहे। 2013 में भी नरेंद्र को भाजपा से टिकट नही मिला तो निर्दलीय चुनाव लड़ा और कांग्रेस की रीटा चौधरी को 17 हजार 118 वोटों से हराया। भाजपा प्रत्याशी सलीम तंवर को 20 हजार 458 वोट तथा कांग्रेस के चंद्रभान को 15 हजार 815 वोट मिलें। अब 2018 में राजनीतिक गणित पूरा पलट गया है और जहां नरेंद्र ने तीन बार पहले निर्दलीय चुनाव लड़ा तो इस बार वो भाजपा की टिकट से चुनाव मैदान में अपना भाग्य आजमाएंगे।
जितेंद्रसिंह शेखावत फर्स्ट इंडिया न्यूज मंडावा

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in

दीया का राजनीतिक भविष्य ?, राज्यपाल ने ये क्या कह दिया ? #ElectionExpress2019

दिल्ली में गिरफ्तार हुआ आईएसआई एजेंट | Breaking
KESARI WEEKEND BOX OFFICE COLLECTION | FIRST INDIA NEWS^
सोनिया गांधी के आवास पर CEC की बैठक
जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल और उनकी पत्नी ने बोर्ड की सदस्यता से दिया इस्तीफा
राहुल गाँधी की घोषणा \'हर गरीब को मिलेंगे 72 हजार रुपये\'
कांग्रेस ने जारी की 40 स्टार प्रचारकों की सूची, सूची में गहलोत, पायलट और विश्वेन्द्र सिंह शामिल
दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक संपन्न, कई अहम मुद्दों को लेकर हुई चर्चा