असंतोष की सियासत से जूझ रही भाजपा, बागियों की वापसी से होगा डैमेज कंट्रोल 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/03/16 09:17

जयपुर (योगेश शर्मा)। टिकट चयन के फैसले से पहले ही राजस्थान में लोकसभा चुनावों को लेकर सियासत उफान पर आ गई है। कारण रहा गुटबाजी। चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी अलग अलग गुटों में बंटे नेताओं ने अंदरुनी असंतोष को हवा दे दी है। कुछ पार्टी छोड़ चुके है तो कुछ तैयारी में है। खास सियासी रिपोर्ट- 

देवी सिंह भाटी के बीजेपी से इस्तीफे की खबर ने राजस्थान में असंतोष की राजनीति को गर्मा दिया है। अलग अलग लोकसभा क्षेत्रों से असंतोष और गुटबाजी की प्रतिध्वनि सुनाई देने लगी है। केवल बीकानेर ही नहीं बीजेपी अन्य लोकसभा क्षेत्रों में भी टिकट चयन से पहले पनपी गुटबाजी से जूझ रही है। 

वो लोकसभा क्षेत्र जहां गुटों में बंटी भाजपा:

बीकानेर:
—अर्जुन राम मेघवाल के कारण देवी सिंह भाटी बीजेपी से इस्तीफा दे चुके
—अब अन्य नेता पार्टी नहीं छोड़े यह मेघवाल के समक्ष चुनौती
—विधानसभा चुनावों के वक्त किसनाराम और प्रभु दयाल सारस्वत ने बगावत की थी 
—बिहारी विश्नोई, सुमित गोदारा, गोपाल जोशी,महावीर रांका के अलग अलग खेमे है कुछ का झुकाव भाटी के साथ रहा है
—भाटी विरोधी कहते है उनके कन्हैया लाल झंवर से रहे सम्बंध 

पाली:
—यहां मौजूदा सांसद पीपी चौधरी के खिलाफ विरोध 
—पुष्प जैन के पक्ष में लामबंद गुट कर रहा विरोध
—माधो सिंह दीवान, मदन राठौड़ के अलग अलग कैम्प

झुंझुनूं: 
—यहां भाजपा अलग-अलग धड़ो में बंटी है
—संतोष अहलावत के टिकट का विरोध कर रहा एक धड़ा 
—नरेन्द्र मंडावा, दशरथ सिंह के यहां अलग अलग गुट
—सुभाष पूनिया माने जाते है सांसद विरोधी कैम्प में
—काका सुंदर लाल का भी यहां अलग कैम्प

सीकर:
—हरिराम रिणवां यहां मजबूत दावेदार
—उनके विरोधी धड़े के नेता है झाबर सिंह खर्रा
—खर्रा के साथ नजर आ रहा महेश शर्मा कैम्प
—सांसद सुमेधानंद सरस्वती का यहां अलग कैम्प

अलवर:
—अलवर में डॉ जसवंत - रामहेत यादव आमने सामने
—दोनों ही चाह रहे अलवर से लोकसभा चुनाव लड़ना
—यदुवंशियों की जंग के कारण अखाड़ा बना अलवर 

कोटा:
—हाड़ौती में सदैव गर्म रही है सियासत 
—ओम बिरला का एक धड़ा कर रहा विरोध
—दूसरा धड़ा है इज्येराज सिंह के साथ
—प्रहलाद गुंजल और भवानी राजावत के अलग अलग कैम्प

चूरु: 
—चूरु की सियासत दो धुर्वो के आस-पास
—राजेन्द्र राठौड़ और रामसिंह/राहुल कस्वां कैम्प आमने-सामने 

दौसा:
—यहां मीना क्षत्रपों के बीच है जंग
—डॉ किरोड़ी लाल मीणा का धड़ा मजबूत
—दूसरे धड़ो में शुमार है रामकिशोर मीना, जसकौर और वीरेन्द्र मीना

बांसवाड़ा - डूंगरपुर: 
—यहां भी गुटबाजी चरम पर है
—कनकमल कटारा का परिवार ही कलह से जूझ रहा
—धनसिंह रावत के कारण भी गुटबाजी को हवा मिली
—मानशंकर नीनामा के खिलाफ यहां विरोधी लामबंद है

टोंक-सवाई माधोपुर:
—यहां एक धड़ा कर रहा जौनापुरिया कैम्प का विरोध 
—दूसरा मजबूत धड़ा है प्रभुलाल सैनी-अजीत मेहता का
—स्थानीय संगठन में अलग अलग गुट बने हुये है

नागौर:
—यहां गुटबाजी चरम पर
—सी आर चौधरी और यूनुस खान के धड़े मजबूत 
—संघनिष्ठ मोहन राम चौधरी का धड़ा मजबूत 

अजमेर: 
—अजमेर में गुटबाजी पुरानी 
—बीपी सारस्वत की अगुवाई में नया धड़ा 
—देवनानी, भदेल और भागीरथ चौधरी के धड़े 
—ओंकार सिंह लखावत का भी अलग खेमा 

बीजेपी का थिंक टैंक टिकट को लेकर मचे घमासान से चिंतित है। इसके बावजूद उम्मीद जताई जा रही है कि समय रहते गुटबाजी को काबू कर लिया जाएगा। बीजेपी को लेकर लगता है कि नरेन्द्र मोदी का नाम ऐसा नाम है जिसे लेकर संपूर्ण एक ध्येय के साथ जुटेगी। डैमेज कंट्रोल के लिये बीजेपी उन बागियों की वापसी करा सकती है जिन्होंने विधानसभा चुनावों में बगावत की थी। 
 

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