खींवसर विधानसभा सीट को लेकर पशोपेश की स्थिति में प्रदेश भाजपा 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/21 07:32

जयपुर: महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के साथ ही देश के अलग-अलग राज्यों की रिक्त हुई 64 सीटों पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान आज कर दिया गया है, जिसमें प्रदेश की दो सीट शामिल है. हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने पहले से ही दोनों उप चुनाव की तैयारियों को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है, लेकिन फिलहाल भाजपा खींवसर विधानसभा सीट को लेकर पशोपेश की स्थिति में है और केंद्रीय नेतृत्व के इशारे का इंतजार है. 

हनुमान बेनीवाल का प्रदेश भाजपा से नहीं है गठबंधन:
21 अक्टूबर को खींवसर और मंडावा विधानसभा क्षेत्र में होने वाले उपचुनाव को लेकर बीजेपी ने भले ही तैयारियां शुरू कर दी है, लेकिन फिलहाल खींवसर सीट को लेकर अभी भी पेच फंसा हुआ है. कारण साफ है, क्योंकि हनुमान बेनीवाल ने साफ तौर पर कहा था कि उन्होंने मोदी से गठबंधन किया है ना कि प्रदेश भाजपा के साथ. ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व ने फिलहाल भाजपा को कोई इशारा नहीं किया है. 

बीजेपी निभा सकती है गठबंधन धर्म:
उसी के चलते भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का बयान है कि भाजपा हमेशा गठबंधन धर्म निभाती है, लेकिन अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा. ऐसे में सतीश पूनिया के इस बयान से संकेत साफ है कि भाजपा मंडावा सीट से अपना प्रत्याशी उतारेगी ही, लेकिन खींवसर से गठबंधन धर्म निभा सकती है और हनुमान बेनीवाल की पार्टी RLP के लिए सीट छोड़ सकती है. इसीलिए पार्टी ने आगामी दिनों की तमाम महत्वपूर्ण बैठकें मंडावा में ही रखी है. मिसाल के तौर पर कल उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ मंडावा में भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक लेने जा रहे हैं. तो दूसरी तरफ सतीश पूनिया भी झुंझुनू के कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करेंगे. 

दोनों सीटों से जुड़ी सतीश पूनिया की साख:
दरअसल लोकसभा चुनाव में नागौर सीट से भाजपा ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था, हनुमान बेनीवाल के लिए पार्टी ने सीट छोड़ दी थी. इसके बाद हनुमान बेनीवाल ने विधायक पद से इस्तीफा दिया तो उनसे उपचुनाव को लेकर भाजपा से गठबंधन के संबंध में सवाल पूछा गया तो बेनीवाल ने कहा था कि उन्होंने मोदी से गठबंधन किया है ना कि भारतीय जनता पार्टी के साथ. यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी आगामी दिनों में इन दोनों सीटों की पिछली जीत को बरकरार रखना चाहेगी. साथ ही नए प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया की साख भी इन दोनों सीटों के साथ जुड़ी हुई है. यदि इन दोनों सीटों को भारतीय जनता पार्टी जीतती है तो पार्टी में सतीश पूनिया का कद बढ़ेगा. साथ ही आगामी दिनों की राजनीति की भी कोई दिशा तय होगी. 

केवल जीतने के लिए तबादले:
मंडावा के पूर्व विधायक और झुंझुनू सांसद नरेंद्र कुमार ने कहा कि मैं पहली बार लोकसभा सदस्य के रूप में जीता था. राज्य सरकार केवल और केवल जीतने के लिए कर्मचारियों का ट्रांसफर एक ही विधानसभा क्षेत्र से किए जा रहे हैं. जो भी तबादला सूची आई है, एएनएम जीएनएम से लेकर तमाम सूचियां मंडावा विधानसभा क्षेत्र की है. प्रिंसिपल फर्स्ट ग्रेड सेकंड ग्रेड के तबादले भी मंडावा के ही हुए हैं. 200 विधानसभा क्षेत्रों में सिर्फ मंडावा विधानसभा क्षेत्र के ही तबादले किए गए हैं. सरकार चाहती है कि मंडावा को किसी तरह से जीता जाए. मंडावा हमेशा से कांग्रेस का गढ़ रहा है. 

जनता को लुभाने के लिए केंद्र सरकार के फैसले:
अब एक तरफ प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी बढ़ते अपराध और कानून व्यवस्था समेत किसान कर्ज माफी और युवाओं को बेरोजगारी भत्ते जैसे मुद्दों को उठाएगी, तो केंद्र सरकार के 100 दिन के 370 और तीन तलाक जैसे फैसलों पर भी जनता को लुभाना चाहेगी. बहराल देखना यह होगा कि भाजपा अपनी जीत को बरकार रखती है या फिर राज्य की कांग्रेस सरकार भाजपा के खाते से सीट को निकालती है. 

... संवाददाता ऐश्वर्य प्रधान की रिपोर्ट

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