दौसा में भाजपा की सियासी रणनीति, गुर्जर समाज पर डोरे डाल रही पार्टी

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/03/26 09:00

दौसा। चुनावी बिगुल बज गया है। बेशक अभी राजनीतिक दलों ने प्रत्याशियों को लेकर पत्ते न खोले हों, पर वोटों के ध्रूवीकरण की चौसर बिछने लगी हैं। दौसा में भाजपा की विजय संकल्प सभा में आज भाजपा गुर्जर पोलटिक्स के ईर्द-गिर्द नजर आई। दरअसल भाजपा ये मान रही हैं कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर चले विवाद से कहीं न कहीं गुर्जर समाज के लोग कांग्रेस से दूरी बनाए हुए हैं।

इसी दुखती नस पर हाथ रखने के लिए भाजपा ने लोकसभा का सियासी पासा गुर्जर पॉलिटिक्स के साथ शुरू किया। इसे लेकर भाजपा ने पहली लोकसभा चुनावी संकल्प सभा गुर्जर बाहुल्य सिकन्दरा से की। साथ ही इस सभा में गुर्जर समाज से ताल्लुक रखने वाले केन्द्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल सिंह को बुलाया गया। सभा में पहुंचे केन्द्रीय राज्यमंत्री ने तो इस मौके को जरा भी नहीं चूकने दिया और कहा कि कांग्रेस ने गुर्जरों के साथ बड़ा धोखा किया है। पांच साल तक कांग्रेस को उप मुख्यमन्त्री सचिन पायलट ने सींचा और फसल काटने के लिए कांग्रेस ने मुख्यमंत्री  के रूप में अशोक गहलोत को भेज दिया, लेकिन सम्बोधन में केन्द्रीय मंत्री ये भी भूल गये कि सिकन्दरा में सैनी समाज का भी वर्चस्व है। जिन में बड़ा हिस्सा भाजपा के समर्थन में भी रहता है। 

भाजपा की इस गुर्जर पॉलिटिक्स को लेकर हमने बात की केन्द्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल सिंह से। पूरे मामले को लेकर वे बेबाक बोले लेकिन गुर्जर समाज के आरक्षण के प्रकरण में भाजपा की केन्द्र सरकार के विचार को लेकर वे कहीं न कहीं गेंद कांग्रेस के पाले में ही फेंकते नजर आए। दरअसल आप को बता दें कि भाजपा सवर्णों के साथ दौसा में गुर्जर गठजोड़ बनाकर चुनावी बैतरणी को पार लगाना चाहती है। शायद इसलिए भाजपा गुर्जर सियासत के इर्द गिर्द मंडरा रही है।

... दौसा संवाददाता लक्ष्मीकांत शर्मा की रिपोर्ट 

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