Rajasthan By Election 2021: धरियावद और वल्लभनगर उपचुनाव के लिए BJP ने झोंकी पूरी ताकत, नेताओं को दी गई जिम्मेदारी

Rajasthan By Election 2021: धरियावद और वल्लभनगर उपचुनाव के लिए BJP ने झोंकी पूरी ताकत, नेताओं को दी गई जिम्मेदारी

जयपुर (ऐश्वर्य प्रधान): धरियावद और वल्लभनगर उपचुनाव में शह मात और प्लस माइनस गुणा भाग का खेल लगातार जारी है. बीजेपी कांग्रेस दोनों पार्टियों में कड़ी टक्कर है . लेकिन टिकट वितरण से पूर्व और वितरण बाद स्थानीय नेताओं ने भाजपा के सरदर्द भी खड़ा किया था.लेकिन भाजपा ने स्थिति को साध लिया है. कांग्रेस ने भाजपा में अंतर्कलह जैसे भी आरोप लगाए हैं. दोनों ही उपचुनाव में इन दिनों बनते बिगड़ते हालातों पर पेश है एक खास रिपोर्ट...

धरियावद में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को भले ही दिवंगत विधायक गौतम लाल मीणा के पुत्र कन्हैया लाल मीणा के टिकट की आस रही हो लेकिन इन सबके पर जब भाजपा ने परिवारवाद से परे सामान्य कार्यकर्ता खेत सिंह मीणा को टिकट दिया तो पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत भी खड़ी हो गई. कन्हैया लाल मीणा के बगावती तेवरों ने भाजपा को खासा परेशानी में डाल दिया. कहा जा रहा था कि अब तक के रिकॉर्ड के लिहाज से जो भी विधायक दिवंगत हुआ उसके परिवार में टिकट मिलने पर जीत दर्ज हुई लेकिन इस लाइन से परे बीजेपी ने परिवार में किसी को टिकट नहीं दिया.

ऐसे में बीजेपी के अंतर कलह खुलकर सामने आई जिसे पाटने के लिए प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौर दोनों ने कमान संभाली और नाराज हुए दिवंगत नेता स्वर्गीय गौतम लाल मीणा के पुत्र कन्हैया लाल मीणा को मना लिया. और भाजपा में प्रदेश मंत्री का पद देकर डैमेज को कंट्रोल करने की पूरी कोशिश भी की है. लेकिन भाजपा इस बात को भी बखूबी जानती है कि चुनाव अब इतना आसान नहीं रहा जितना पहले समझा जा रहा था. ऐसे में खुद कन्हैया लाल मीणा को टास्क दिया है कि वह तमाम कार्यकर्ताओं को एकजुट करें.और फोकस रखा गया है बूथ के मैनेजमेंट पर भी. भारतीय जनता पार्टी अब आगामी दिनों में धरियावद में अर्जुन मुंडा और अन्य कई बड़े नेताओं को भेजकर कांग्रेस से दो-दो हाथ जोर आजमाइश करेगी.

यहां पर चुनाव की कमान संभाल रहे राजेंद्र राठौड़ सरीखे नेता ने डेरा डाल रखा है और अन्य नेताओं के भी प्रवास लगातार जारी है. वही राजेंद्र राठौड़ के साथ कुछ विजयन और सुशील कटारा भी इस चुनाव में लगातार पार्टी की ओर से डेरा डाले हुए हैं. बहरहाल अंतरकलह जैसी बात कन्हैया लाल मीणा के चुनाव मैदान में रहते हुए हो सकती थी लेकिन अब कन्हैया लाल मीणा खुद बीजेपी के प्रचार प्रसार में जुटे हैं ऐसे में बाहरी तौर पर बीजेपी पूरी तरह से एकजुट नजर आ रही है.

वल्लभनगर में भाजपा के लिए चुनौती धरियावद से भी ज्यादा इसलिए नजर आ रही है क्योंकि जिस राजनीतिक बिसात को बिछाने के लिए भाजपा ने गोटिया सेट की थी. उससे परे गुलाबचंद कटारिया फैक्टर ज्यादा हावी रहा. कभी भारतीय जनता पार्टी में रहा रसूख वाला भिंडर परिवार जनता सेना से सामने है तो दूसरी तरफ पूरे गणित को उदय लाल डांगी ने भी चतुष्कोण यह बना दिया है क्योंकि उदय लाल डांगी लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी में स्थानीय तौर पर विभिन्न पदों में रहते हुए काम करते रहे हैं और लोकल स्तर पर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में भी पकड़ रही है ऐसे में उदय लाल डांगी का फेक्टर यहां पर भाजपा के लिये किसी चुनोती से कम नहीं है. लेकिन यहां पर सीपी जोशी जैसे मझे हुए भाजपा नेता कमान को संभाले हुए हैं तो दूसरी तरफ दीया कुमारी भी राजपूत एंगल से जुटी हैं. बाकी अन्य पार्टी के पदाधिकारी और नेता यहां पर लगातार जुटे हैं केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल यहां के प्रभारी हैं जो कि लगातार वल्लभनगर को लेकर एक्टिव हैं.

बात सर्वविदित है कि दोनों उपचुनाव में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की राय को भाजपा संगठन ने तवज्जो दी है. ऐसे में कटारिया भी मेवाड़ के बड़े भाजपा नेता होने के नाते लगातार डेरा डाले हुए हैं और खास तौर पर धरियावद को फोकस इसलिए कर रखा है क्योंकि कटारिया जानते हैं कि यदि पार्टी धरियावद में जीती है तो इस आधार पर पार्टी कांग्रेस के सामने आंख से आंख मिलाकर बात कर सकेगी. लेकिन इन दिनों कटारिया के कुछ बयान पार्टी के लिए थोड़ा सा संशय पैदा कर सकते हैं. भले ही इसे कटारिया की स्टाफ को ही कहें या फिर कोई सियासी प्लान. 

आगामी दिनों में अर्जुन मुंडा हो या फिर एसपी सिंह बघेल या अन्य दूसरे बड़े नेता इन दोनों चुनाव में दौरे और सभाएं करनी है. तो दूसरी तरफ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया भी लगभग 5 से 6 दिन धरियावद और वल्लभनगर में डेरा डालेंगे. प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशखर भाजपा संगठन में कार्यकर्ताओं को एकजुटता का पाठ पढ़ा कर भी आए हैं. और चंद्रशेखर ने बूथ स्तर पर पार्टी के कार्यकर्ताओं को छोटे-मोटे मनमुटाव दूर करने के साथ आपसी छोटी मोटी मतभेद या अंतर कलह की स्थिति को दूर करके एकजुटता के साथ चुनाव जीतने का आह्वान भी किया है. क्योंकि जाहिर सी बात है पार्टी चाहे कोई भी हो नीचे के स्तर पर कार्यकर्ताओं में छोटे-मोटे आंतरिक विवाद भी चलते रहते हैं.

बरहाल पार्टी के सामने इन 7 दिनों में सबसे बड़ा टास्क रहेगा तमाम कार्यकर्ताओं को एकजुट करते हुए इस बात के लिए प्रेरित करना कि कहीं कोई भी कार्यकर्ता ऐसा कोई बयान ना दें या फिर ऐसी बात ना करें जिससे कि पार्टी को जरा भी नुकसान हो. क्योंकि दोनों उपचुनाव में भाजपा के टिकट वितरण के बाद स्थितियां अलग है. अब देखना होगा कि कांग्रेस के द्वारा अंतर कलह के आरोपों की बात कहे जाने और मंत्री अशोक चांदना द्वारा छाती ठोक कर दोनों सीटें कांग्रेस को जीतने के बयान के प्रतिउत्तर में भाजपा कितनी बेहतरी से जवाब देती है.

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