बाबा रामदेव को Social Media पर Coronil बेचना पड़ा महंगा, दर्ज हुआ 1000 करोड़ का मानहानी का Case

बाबा रामदेव को Social Media पर Coronil बेचना पड़ा महंगा, दर्ज हुआ 1000 करोड़ का मानहानी का Case

बाबा रामदेव को Social Media पर Coronil बेचना पड़ा महंगा, दर्ज हुआ 1000 करोड़ का मानहानी का Case

देहरादून: योगगुरु बाबा रामदेव (Baba Ramdev) की कंपनी पतंजलि (Patanjali) द्वारा निर्मित कोरोनिल (Coronil) को सोशल मीडिया (Social Media) पर बेचना योग गुरू बाबा रामदेव को भारी पड़ गया. एलोपैथी (Allopathy) को बकवास और दिवालिया साइंस (Insolvent Science) कहना और अपनी कोरोनिल को कोरोना में कारगर दवा होने का दावा करने पर उनके खिलाफ 1000 करोड़ रुपए का मानहानि का केस दर्ज कराया हुआ है.

IMA ने करवाया मुकदमा दर्ज:
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) उत्तराखंड ने बुधवार को योग गुरु बाबा रामदेव पर 1000 करोड़ रुपए का मानहानि (Defamation) का केस दर्ज कराया है. एसोसिएशन ने यह केस सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे बाबा रामदेव के उस वीडियो के आधार पर किया है, जिसमें बाबा एलोपैथी को बकवास और दिवालिया साइंस कह रहे हैं.

बाद में बाबा ने अपना विवादित बयान वापस लिया:
हालांकि, बाबा ने बाद में अपना बयान वापस ले लिया था. इस पर एसोसिएशन (Association) का कहना है कि रामदेव ने जो बयान दिया है उसके जवाब में अगर वे अगले 15 दिनों में वीडियो जारी नहीं करते और लिखित रूप से माफी नहीं मांगते, तो वे उनसे 1000 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति (Compensation) की डिमांड करेंगे.

IMA ने भेजा था नोटिस :
इससे पहले इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने शनिवार को बाबा रामदेव पर एलोपैथी इलाज के खिलाफ झूठ फैलाने का आरोप लगाया था. IMA ने रामदेव को एक लीगल नोटिस (Legal Notice) भेजा था. डॉक्टर्स की संस्था ने रामदेव पर मुकदमा चलाने की मांग भी की थी. हालांकि, रामदेव की संस्था पतंजलि ने बयान जारी कर आरोपों को गलत बताया था.

रामदेव ने DGCI की साख को चुनौती दी:
IMA ने लिखा था कि बाबा रामदेव ने ये दावा किया है कि रेमडेसिविर, फेवीफ्लू और DGCI (Remadecivir, Favey Flu and DGCI) से अप्रूव (Approve) दूसरी ड्रग्स (Drugs) की वजह से लाखों लोगों की मौत हुई. उन्होंने ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) और स्वास्थ्य मंत्री (Health Minister) की साख को चुनौती दी है. कोरोना मरीजों के इलाज में रेमडेसिविर के इस्तेमाल की मंजूरी केंद्र की संस्था सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने जून-जुलाई 2020 में दी थी. ये भ्रम फैलाने और लाखों लोगों की जान खतरे में डालने के लिए बाबा रामदेव पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए. रामदेव ने फेवीपिराविर (Favipiravir) को बुखार की दवा बताया था. इससे पता चलता है कि मेडिकल साइंस (Medical Science) को लेकर उनका ज्ञान कितना कम है. 

पहले भी विवादित बयान देने का आरोप:
IMA ने पत्र में लिखा है कि इससे पहले कोरोना के लिए बनाई गई अपनी दवा की लॉन्चिंग (Launching) के दौरान भी रामदेव ने डॉक्टर्स को हत्यारा कहा था. कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री भी मौजूद थे. सभी इस बात को जानते हैं कि बाबा रामदेव और उनके साथी बालकृष्ण (Balkrishna) बीमार होने पर एलोपैथी इलाज लेते हैं. इसके बाद भी अपनी अवैध दवा को बेचने के लिए वे लगातार एलोपैथी के बारे में भ्रम फैला रहे हैं. इससे एक बड़ी आबादी पर असर पड़ रहा है.

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